रामेश्वर तेली: दुलियाजन से दिल्ली और अब हिमंता कैबिनेट तक का सफर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता रामेश्वर तेली ने 12 मई 2026 को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की नई कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली। गुवाहाटी में आयोजित शपथ समारोह में सरमा के साथ रामेश्वर तेली, अजंता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की। चाय बागान श्रमिक समुदाय से आने वाले तेली का कैबिनेट में शामिल होना राज्य के पिछड़े वर्गों के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
रामेश्वर तेली का राजनीतिक परिचय
14 अगस्त 1970 को जन्मे रामेश्वर तेली ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ऑल असम टी ट्राइब स्टूडेंट एसोसिएशन के साथ की थी। वर्ष 2001 में उन्होंने पहली बार दुलियाजन विधानसभा सीट से BJP के टिकट पर जीत दर्ज की और 2011 तक लगातार इसी सीट से विधायक रहे। 2006 में भी उन्होंने इस सीट पर जीत का सिलसिला जारी रखा, जिससे दुलियाजन BJP का अभेद्य गढ़ बन गया।
लोकसभा और केंद्रीय मंत्रिमंडल में भूमिका
वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में रामेश्वर तेली ने डिब्रूगढ़ सीट से जीत दर्ज कर संसद में कदम रखा। 2019 की जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में उन्हें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में राज्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अतिरिक्त उन्हें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में भी राज्य मंत्री बनाया गया।
2024 में सीट छोड़ने का फैसला
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में रामेश्वर तेली ने पार्टी हित में डिब्रूगढ़ सीट पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल के लिए छोड़ दी। यह कदम पार्टी के भीतर उनकी परिपक्वता और अनुशासन का प्रमाण माना गया। इसके बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव की ओर रुख किया और दुलियाजन सीट से कांग्रेस के ध्रुबा गोगोई को हराकर एक बार फिर विधायक बने।
चाय समुदाय की आवाज़
रामेश्वर तेली चाय बागान श्रमिक समुदाय से आते हैं, जो असम की राजनीति में एक निर्णायक मतदाता वर्ग है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उनका मंत्रिमंडल में शामिल होना राज्य सरकार की चाय श्रमिकों और पिछड़े वर्गों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि असम में चाय बागान श्रमिकों की बड़ी आबादी चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित करती है।
आगे की राह
हिमंता कैबिनेट में रामेश्वर तेली की वापसी उनके दशकों लंबे राजनीतिक सफर का नया अध्याय है। केंद्र में राज्य मंत्री के रूप में अर्जित अनुभव और जमीनी जुड़ाव के साथ वे असम की नई सरकार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की स्थिति में हैं।