विजयादशमी पर हिमंता बिस्वा सरमा का बड़ा बयान: 'देश के खिलाफ साजिश रचने वाली आसुरी शक्तियाँ दब गई हैं'
सारांश
मुख्य बातें
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 को विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि देश के विरुद्ध साजिश रचने वाली ताकतों को अब काबू में किया जा रहा है। एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट और गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत के दौरान सरमा ने विजयादशमी को अधर्म पर धर्म की शाश्वत जीत से जोड़ा।
मुख्यमंत्री का संदेश
सरमा ने एक्स पर लिखा कि 'आप सभी देख रहे हैं कि विजयादशमी के आते ही देश के खिलाफ साजिशें रचने वाली आसुरी शक्तियाँ शांत हो गई हैं। यही हमारी शाश्वत सनातन संस्कृति है — यह अधर्म पर धर्म की जीत है।' उन्होंने इस संदेश को सनातन परंपरा और भारत के सांस्कृतिक मूल्यों के व्यापक ढाँचे में प्रस्तुत किया।
विजयादशमी समारोह के दौरान मीडिया से बात करते हुए सरमा ने दोहराया कि 'आज का दिन बुरी ताकतों पर 'शक्ति' की जीत का दिन है। जैसा कि आपने देखा है, विजयादशमी के करीब आते ही जो बुरी ताकतें सक्रिय थीं, वे अब दब गई हैं। हम हमेशा बुराई पर अच्छाई की जीत देखेंगे।'
विजयादशमी का सांस्कृतिक महत्व
विजयादशमी, जिसे दशहरा के नाम से भी जाना जाता है, पूरे भारत में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। हिंदू परंपरा में यह पर्व भगवान राम की रावण पर विजय और देवी दुर्गा की राक्षस महिषासुर पर जीत — दोनों महाकथाओं से जुड़ा है।
असम में इस उत्सव का विशेष सांस्कृतिक महत्व है, जहाँ दुर्गा पूजा का समापन प्रतिमाओं के विसर्जन और भव्य धार्मिक जुलूसों के साथ होता है। राज्यभर में श्रद्धालु धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागी हुए।
राजनीतिक संदर्भ
सरमा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में विजयादशमी के उत्सव का माहौल था। गौरतलब है कि उन्होंने 'आसुरी शक्तियों' और 'देश के खिलाफ साजिश' जैसे शब्दों का प्रयोग किया, लेकिन किसी विशेष व्यक्ति, दल या घटना का नाम नहीं लिया। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान धार्मिक पर्वों पर राजनीतिक संदेश देने की व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब असम में BJP सरकार कई आंतरिक सुरक्षा और सांप्रदायिक मुद्दों पर सक्रिय रही है। हालाँकि मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कोई सीधा संदर्भ नहीं दिया।
आगे की दिशा
सरमा ने विश्वास जताया कि भारत की परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप बुराई पर अच्छाई की जीत का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा। उनके इस संदेश को असम और देशभर में विजयादशमी की भावना के साथ जोड़कर देखा जा रहा है।