राष्ट्रीय आयुष मिशन: देशभर में 12,500 आयुष केंद्र अपग्रेड, प्रतापराव जाधव ने राज्यसभा में दी जानकारी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने 4 अगस्त को राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से बताया कि राष्ट्रीय आयुष मिशन (NAM) के अंतर्गत देशभर में आयुष औषधालयों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों की 12,500 इकाइयों को उन्नत कर 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष)' के रूप में संचालित किया जा रहा है। यह कदम पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे में मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
मौजूदा आयुष स्वास्थ्य ढाँचा
जाधव ने सदन को बताया कि वर्तमान में देशभर में 40,269 औषधालय और 3,648 अस्पताल आयुष ओपीडी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। इनमें से सबसे अधिक केंद्र कर्नाटक में हैं, जहाँ 7,641 आयुष औषधालय और 274 आयुष अस्पताल कार्यरत हैं। यह आँकड़ा देश के किसी भी अन्य राज्य से सर्वाधिक है।
वित्तीय सहायता का ढाँचा
राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि NAM के दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को उनकी स्टेट एनुअल एक्शन प्लान (SAAP) के आधार पर समेकित निधि जारी की जाती है। आयुष औषधालयों को आयुष्मान आरोग्य मंदिर में अपग्रेड करने के लिए प्रति इकाई ₹16.22 लाख और उप-स्वास्थ्य केंद्रों को उन्नत करने के लिए प्रति इकाई ₹15.744 लाख की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
सेवाओं का दायरा और लाभार्थियों में वृद्धि
जाधव के अनुसार, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) को परिचालन दिशा-निर्देशों के तहत एक समग्र कल्याण मॉडल के रूप में स्थापित किया गया है, जो योग चिकित्सा, आयुर्वेद परामर्श और प्राकृतिक चिकित्सा उपचार पर केंद्रित है। इन केंद्रों का उद्देश्य निवारक, प्रोत्साहन, उपचारात्मक और पुनर्वास स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करना है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की रिपोर्टों के अनुसार, अपग्रेड के बाद इन केंद्रों पर लाभार्थियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, क्योंकि ओपीडी सेवाओं के अतिरिक्त प्रकृति परीक्षण और योग से जुड़ी गतिविधियाँ भी संचालित की जा रही हैं।
गुणवत्ता निगरानी और मूल्यांकन
इन केंद्रों पर तैनात आयुष चिकित्सकों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण सुनिश्चित करने के लिए NABH मूल्यांकन और तीसरे पक्ष की समीक्षा के साथ-साथ केंद्रीय टीमों के राज्य दौरे भी किए जाते हैं। राज्य और केंद्रशासित प्रदेश सरकारों को सलाह दी गई है कि वे आयुष्मान आरोग्य मंदिर टीमों का उचित प्रशिक्षण सुनिश्चित करें, अन्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ रेफरल संबंध मजबूत करें और क्षेत्र-स्तरीय कार्यकर्ताओं — विशेष रूप से आशा कार्यकर्ताओं — की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब सरकार पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक स्वास्थ्य सेवा तंत्र के साथ एकीकृत करने पर जोर दे रही है। आयुष्मान आरोग्य मंदिर नेटवर्क का विस्तार ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता की दिशा में एक संरचनात्मक प्रयास है, जिसकी सफलता प्रभावी क्रियान्वयन और नियमित निगरानी पर निर्भर करेगी।