क्या तेलंगाना विधानसभा में पीपीटी प्रस्तुति का अवसर मांगा जाए?

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क्या तेलंगाना विधानसभा में पीपीटी प्रस्तुति का अवसर मांगा जाए?

सारांश

तेलंगाना की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया है जब केटीआर ने विधानसभा में पीपीटी प्रस्तुति के लिए समान अवसर की मांग की। क्या यह विपक्ष को सशक्त बनाएगा?

Key Takeaways

  • तेलंगाना विधानसभा में समान अवसर की मांग
  • बीआरएस की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा
  • संसदीय परंपराएँ और विपक्ष का अधिकार

हैदराबाद, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (केटीआर) ने गुरुवार को यह मांग रखी कि यदि तेलंगाना सरकार विधानसभा में पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) देने की योजना बना रही है, तो संसदीय लोकतंत्र के सिद्धांतों के अनुसार प्रमुख विपक्षी दल बीआरएस को भी ऐसा ही अवसर प्रदान किया जाना चाहिए।

तेलंगाना भवन में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए केटीआर ने कहा कि जब विधायक विधानसभा में प्रवेश करते हैं, तो मुख्यमंत्री और सामान्य विधायक के बीच कोई भेद नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा, “सदन में सभी 120 विधायकों के समान अधिकार हैं। यदि सरकार अपना पक्ष रखती है, तो विपक्ष को भी अपने तथ्य प्रस्तुत करने का पूरा मौका मिलना चाहिए।”

यह ध्यान देने योग्य है कि तेलंगाना सरकार शुक्रवार को विधानसभा में सिंचाई परियोजनाओं और नदी जल-बंटवारे से संबंधित मुद्दों पर एक पावरपॉइंट प्रस्तुति देने की संभावना है।

केटीआर ने कहा, “आप अपना पक्ष रखें और हमें भी अपना पक्ष रखने दीजिए। प्रमुख विपक्ष होने के नाते हम यह स्पष्ट करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं कि बीआरएस शासन के पिछले दस वर्षों में तेलंगाना की कृषि और सिंचाई प्रणाली में किस प्रकार व्यापक परिवर्तन आया है।”

उन्होंने दावा किया कि बीआरएस के पास तथ्यों और आंकड़ों के साथ विधानसभा में अपनी बात रखने की पूर्ण तैयारी है।

एक पुराने उदाहरण का हवाला देते हुए केटीआर ने कहा कि 31 मार्च 2016 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने विधानसभा में पावरपॉइंट प्रस्तुति दी थी, तब कांग्रेस पार्टी ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सदन का बहिष्कार किया था।

उन्होंने सवाल किया, “जो बात तब अस्वीकार्य थी, वह आज अचानक कैसे स्वीकार्य हो गई?”

केटीआर ने बताया कि इस मुद्दे पर निष्पक्षता और विपक्ष को समान अवसर देने की मांग करते हुए स्पीकर को पत्र सौंपा गया है।

कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए केटीआर ने मुख्यमंत्री की सिंचाई और नदी जल संबंधी समझ पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि भाखड़ा नांगल परियोजना तेलंगाना में स्थित है, जबकि वास्तव में वह हिमाचल प्रदेश में है।

केटीआर ने तंज कसते हुए कहा, “जो मुख्यमंत्री बुनियादी नदी बेसिन तक नहीं जानते, वे हमें सिंचाई पर उपदेश देना चाहते हैं?”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को देवदुला परियोजना के नदी बेसिन की जानकारी तक नहीं है।

बीआरएस नेता ने सिंचाई क्षेत्र में सरकार की कथित विफलताओं का उल्लेख करते हुए श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल टनल हादसे, जिसमें आठ लोगों की मौत हुई, सुनकीशाला परियोजना के ढहने और वट्टेम पंप हाउस के जलमग्न होने की घटनाओं का जिक्र किया।

उन्होंने सवाल किया, “हमें आपसे क्या सीखना चाहिए- चेक डैम कैसे फेल होते हैं, मेदिगड्डा कैसे गिरा, या कृष्णा जल में तेलंगाना के वैध हिस्से को कृष्णा रिवर मैनेजमेंट बोर्ड (केआरएमबी) को कैसे सौंपा गया?”

केटीआर ने कांग्रेस सरकार पर पालामूरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना की पिछले दो वर्षों से उपेक्षा करने का भी आरोप लगाया और पूछा कि क्या मौजूदा शासन में एक भी अतिरिक्त एकड़ भूमि को सिंचाई का पानी मिला है।

उन्होंने अंत में सवाल उठाया, “क्या सरकार ने एक भी टैंक की मरम्मत की है या एक भी नहर को बहाल किया है?”

Point of View

जिससे सभी पक्षों को समान अवसर मिल सके। यह न केवल बीआरएस के लिए, बल्कि पूरे विधानसभा के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

क्या केटीआर ने विपक्ष के लिए समान अवसर की मांग की?
हाँ, केटीआर ने विधानसभा में पीपीटी प्रस्तुति के लिए विपक्ष को समान अवसर देने की मांग की है।
तेलंगाना सरकार क्या प्रस्तुति देने वाली है?
तेलंगाना सरकार सिंचाई परियोजनाओं और नदी जल-बंटवारे से संबंधित मुद्दों पर प्रस्तुति देने की योजना बना रही है।
केटीआर ने किस स्थिति का उल्लेख किया?
केटीआर ने 2016 में कांग्रेस द्वारा विधानसभा का बहिष्कार करने का उदाहरण दिया।
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