क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर की सुनवाई के बाद बीमार व्यक्ति की मौत हुई?

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क्या पश्चिम बंगाल में एसआईआर की सुनवाई के बाद बीमार व्यक्ति की मौत हुई?

सारांश

पश्चिम बंगाल के स्वरूपनगर में एक व्यक्ति की मृत्यु ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के प्रति गहरी चिंता पैदा कर दी है। क्या प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कार्रवाई करेगा?

Key Takeaways

  • सुल्तान सरदार की मृत्यु ने एसआईआर प्रक्रिया की गंभीरता को उजागर किया।
  • परिवार के सदस्य प्रशासनिक प्रक्रिया से चिंतित थे।
  • पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन अभी कोई औपचारिक शिकायत नहीं हुई है।

कोलकाता, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की सुनवाई के बाद बीमार पड़ने के कुछ दिनों बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई। यह घटना उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर इलाके में घटी। पुलिस ने यह जानकारी गुरुवार को दी।

पुलिस ने बताया कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से संबंधित सुनवाई से लौटने के कुछ ही समय बाद 27 दिसंबर को दिल का दौरा पड़ने से एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई।

मृतक की पहचान 60 वर्षीय सुल्तान सरदार के रूप में हुई है। संयोगवश, उनका नाम पश्चिम बंगाल की 2002 की मतदाता सूची में शामिल नहीं था।

उन्हें हाल ही में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत सुनवाई के लिए पेश होने का समन मिला था। सुनवाई से लौटने के चार दिन बाद सुल्तान की मृत्यु हो गई।

यह घटना स्वरूपनगर पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत स्वरूपदा गांव में घटी। परिवार के सदस्यों के अनुसार, बुजुर्ग व्यक्ति को सुबह दिल का दौरा पड़ा और उनकी मृत्यु हो गई।

परिजनों ने बताया कि सुल्तान लंबे समय से इस इलाके में रह रहे थे, लेकिन उनके पहचान पत्र और अन्य कागजातों से संबंधित कुछ समस्याएं थीं। उनका नाम 2002 की मतदाता सूची में भी नहीं था। सुनवाई से पांच दिन पहले, उनके घर पर एक नोटिस भेजा गया था, जिसमें उन्हें एसआईआर प्रक्रिया के संबंध में अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए कहा गया था।

इसी के चलते सुल्तान 27 दिसंबर को सुनवाई के लिए स्वरूपनगर ब्लॉक विकास कार्यालय (बीडीओ) गए। परिवार के सदस्यों का आरोप है कि सुनवाई के दौरान अधिकारियों ने उन्हें बताया कि उनके दस्तावेजों में कुछ विसंगतियां हैं। बताया जाता है कि इन समस्याओं के बारे में सुनकर बुजुर्ग व्यक्ति बेहद चिंतित और परेशान हो गए।

सुल्तान के परिवार के अनुसार, सुनवाई से लौटने के बाद से वह चिंताग्रस्त थे। उनका दावा है कि मानसिक तनाव ने उनके स्वास्थ्य को प्रभावित किया, जिससे वे बीमार पड़ गए और अंततः उन्हें दिल का दौरा पड़ा।

कई दिनों से अस्वस्थ रहने के बाद, सुल्तान का गुरुवार सुबह निधन हो गया।

सुल्तान की बेगम दिलवारा बीबी ने पत्रकारों को बताया कि उनके पति 2002 में प्रवासी मजदूर के रूप में काम कर रहे थे, जब राज्य में पिछला एसआईआर अभियान चलाया गया था, और उस समय वे किसी अन्य राज्य में कार्यरत थे। हालांकि, उनके माता-पिता के नाम 2002 की मतदाता सूची में थे, लेकिन सुल्तान का नाम शामिल नहीं था।

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान सुल्तान को स्वरूपनगर बीडीओ कार्यालय में अधिकारियों के सामने पेश होने के लिए बुलाया गया।

घटनाक्रम का वर्णन करते हुए दिलवारा बीबी ने कहा, "वह 27 दिसंबर को सुनवाई के लिए बीडीओ कार्यालय गए थे। वहां उन्हें बताया गया कि उनके दस्तावेजों में कुछ विसंगतियां हैं। मेरे पति बहुत चिंतित होकर घर लौटे और फिर बीमार पड़ गए। वह बार-बार कह रहे थे, 'इस उम्र में मैं अपने बच्चों और परिवार को छोड़कर कहां जाऊंगा?'"

सुल्तान के बेटे उस्मान ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया ने उनके पिता में भय पैदा कर दिया था। उन्होंने कहा, "मेरे पिता की मृत्यु इसी एसआईआर के डर से हुई।"

मृत्यु के बाद स्थानीय पुलिस को घटना की सूचना दी गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है। हालांकि, स्वरूपनगर पुलिस स्टेशन में अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

Point of View

ताकि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई की जा सके।
NationPress
01/01/2026

Frequently Asked Questions

इस घटना में क्या हुआ?
एक व्यक्ति की मृत्यु एसआईआर सुनवाई के बाद हुई, जो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रस्त थे।
क्या प्रशासन ने कोई कार्रवाई की है?
अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है, लेकिन पुलिस मामले की जांच कर रही है।
इस घटना का समाज पर क्या असर होगा?
यह घटना प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सवाल उठाती है और लोगों में भय पैदा कर सकती है।
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