शेख अबूबकर अहमद के महिला-विरोधी बयान पर मंत्री बिंदु कृष्णन का पलटवार, बोलीं- 'संविधान का सम्मान करें'
सारांश
मुख्य बातें
केरल की श्रम मंत्री बिंदु कृष्णन ने सोमवार, 31 अगस्त को भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के महिलाओं को लेकर दिए गए विवादित बयानों की कड़ी आलोचना की। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार सभी को है, परंतु शेख के विचार अनुकरणीय नहीं हैं और संविधान का सम्मान अनिवार्य है।
मंत्री बिंदु कृष्णन की प्रतिक्रिया
बिंदु कृष्णन ने सीधे और स्पष्ट शब्दों में कहा, 'संविधान सभी को समान मानता है। देश की राष्ट्रपति खुद एक महिला हैं। कोई भी अपनी धार्मिक मान्यताओं का पालन कर सकता है, लेकिन संविधान का सम्मान भी किया जाना चाहिए।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि शेख के विचार समाज के लिए अनुकरणीय नहीं हैं, भले ही उन्हें व्यक्त करने का अधिकार उन्हें प्राप्त है।
शेख अबूबकर अहमद का विवादित बयान
कोच्चि में आयोजित केरल मुस्लिम जमात के 'हुब्बुर रसूल' सम्मेलन में शेख अबूबकर अहमद ने कहा था कि महिलाओं को घर की चारदीवारी में रहना चाहिए और दावा किया कि उनके सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होने से 'भारी तबाही' आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोकना उनके सम्मान की रक्षा के लिए ही है। शेख अबूबकर अहमद देश के सुन्नी मुस्लिम समुदाय के सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली धार्मिक नेताओं में गिने जाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि इस्लाम ने पर्दा प्रथा इसलिए लागू की क्योंकि सार्वजनिक जगहों पर महिलाओं की उपस्थिति से बुरे परिणाम हो सकते हैं, और उनके अनुसार कुरान भी यही शिक्षा देता है। अपने बयान देने के अधिकार पर सवाल उठाने वालों को जवाब देते हुए शेख ने कहा कि उन्होंने और उनके सहयोगियों ने धर्म का गहन अध्ययन किया है और मुस्लिम समुदाय का मार्गदर्शन करना उनकी जिम्मेदारी है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह बयान ऐसे समय में आया जब समस्था के कांथापुरम गुट की ओर से पहले जारी एक सर्कुलर पर पहले से ही तीखा विवाद चल रहा था। उस सर्कुलर में निर्देश दिया गया था कि महिलाएँ सार्वजनिक सड़कों या सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे पुरुषों के साथ न दिखें जिनसे उनका कोई पारिवारिक संबंध न हो। गौरतलब है कि इस सर्कुलर की व्यापक सामाजिक आलोचना तब और तेज हो गई जब लड़कियों और महिलाओं ने पैगंबर दिवस की रैलियों में बड़ी संख्या में हिस्सा लिया था।
आम जनता और समाज पर असर
यह ऐसे समय में है जब केरल में महिला सशक्तिकरण और सार्वजनिक भागीदारी को लेकर व्यापक सामाजिक बहस जारी है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार के विरुद्ध हैं और महिलाओं की स्वतंत्रता को सीमित करने का प्रयास करते हैं। मंत्री बिंदु कृष्णन का यह बयान राज्य सरकार की ओर से एक स्पष्ट संकेत है कि धार्मिक मान्यताएँ संवैधानिक मूल्यों से ऊपर नहीं हो सकतीं।
आगे क्या
इस पूरे विवाद के बाद केरल में महिला अधिकार संगठनों और नागरिक समाज की ओर से शेख के बयानों की निंदा जारी है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार और अन्य राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आगे क्या रुख अपनाते हैं, और क्या धार्मिक नेताओं के ऐसे बयानों पर कोई औपचारिक कार्रवाई होती है।