13 सितंबर 2026
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कैबिनेट से हटाई गईं कोंडा सुरेखा का ऐलान: 'कांग्रेस नहीं छोड़ूंगी, जनता के बीच रहकर करूंगी काम'

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कैबिनेट से हटाई गईं कोंडा सुरेखा का ऐलान: 'कांग्रेस नहीं छोड़ूंगी, जनता के बीच रहकर करूंगी काम'

सारांश

मंत्री पद जाने के बाद कोंडा सुरेखा ने वारंगल में पहली बार खुलकर बात की — पार्टी छोड़ने से साफ इनकार, हाईकमान के फैसले को सम्मान, और वारंगल नगर निगम चुनावों में मैदान थामने का संकल्प। तेलंगाना कांग्रेस के आंतरिक तनाव अब खुलकर सामने आ गए हैं।

मुख्य बातें

कोंडा सुरेखा को इसी महीने तेलंगाना मंत्रिमंडल से अनुशासनहीनता के आरोप में हटाया गया।
उन्होंने और उनके पति कोंडा मुरली ने 13 सितंबर 2026 को वारंगल में स्पष्ट किया कि वे कांग्रेस नहीं छोड़ेंगे।
कार्रवाई का कारण — बेटी कोंडा सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री ए.
रेवंत रेड्डी और कांग्रेस नेताओं पर सार्वजनिक टिप्पणियाँ।
सुरेखा ने पारकल सीट के लिए साजिश का आरोप लगाया और अवसरवादी राजनीति पर निशाना साधा।
उन्होंने समर्थकों को आंदोलन से रोका और वारंगल नगर निगम चुनावों में अधिकतम सीटें जीतने का संकल्प लिया।

तेलंगाना मंत्रिमंडल से बर्खास्त की गईं विधायक कोंडा सुरेखा ने 13 सितंबर 2026 को वारंगल में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वे और उनके पति कोंडा मुरली किसी भी स्थिति में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) नहीं छोड़ेंगे। अनुशासनहीनता के आरोप में मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था, जिसमें उन्होंने पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करने की बात कही।

मंत्रिमंडल से हटाने का कारण क्या रहा

कोंडा सुरेखा के खिलाफ कार्रवाई तब शुरू हुई जब उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता ने सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कुछ कांग्रेस नेताओं पर तीखे प्रहार किए। सुष्मिता ने रेवंत रेड्डी द्वारा कांग्रेस विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी के समर्थन पर सवाल उठाए और पारकल विधानसभा सीट से खुद चुनाव लड़ने की इच्छा भी सार्वजनिक रूप से जताई।

इसके बाद तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासन समिति ने कोंडा सुरेखा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। सुरेखा ने जवाब में कहा कि उनकी बेटी बालिग और स्वतंत्र वयस्क है, इसलिए उसके बयानों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालाँकि कांग्रेस हाईकमान ने इस स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना और अंततः उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया।

सुरेखा की प्रतिक्रिया और राजनीतिक रुख

सुरेखा ने कहा, 'मैं मंडल परिषद अध्यक्ष (एमपीपी) के पद से आगे बढ़कर मंत्री बनी हूं। कुछ लोग हर दिन पार्टी बदलते रहते हैं।' उन्होंने अवसरवादी राजनीति पर यह टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि पद उनके लिए कभी प्राथमिकता नहीं रहे। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल से हटाए जाने का दुख नहीं है, लेकिन जिस कारण से यह कदम उठाया गया, उससे वे आहत जरूर हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के लिए उन्होंने अतीत में मंत्री पद भी छोड़ा था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उन्हें टिकट से वंचित करने के लिए साजिश की थी।

राजनीतिक सफर: टीआरएस से कांग्रेस तक

गौरतलब है कि वर्ष 2014 में तत्कालीन तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने उन्हें वारंगल पूर्व सीट से टिकट दिया था और उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री को हराया था। 2018 में वे कांग्रेस में शामिल हुईं और 2023 के विधानसभा चुनाव में उसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की।

समर्थकों को संयम की सलाह, नगर निगम चुनावों पर नजर

सुरेखा ने बताया कि उनके कुछ समर्थक मंत्री पद से हटाए जाने के विरोध में आंदोलन की योजना बना रहे थे, लेकिन उन्होंने उन्हें पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगामी वारंगल नगर निगम चुनावों में अधिकतम सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ जनता के बीच सक्रिय रहेंगी।

यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के भीतर आंतरिक मतभेदों की चर्चा थमी नहीं है और आने वाले स्थानीय चुनावों से पहले पार्टी एकजुटता की परीक्षा होनी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतना ही तेलंगाना कांग्रेस के भीतर धधकते असंतोष की भी गवाही देता है — एक ऐसी नेता जो बर्खास्तगी के बाद भी खुले मंच से पार्टी की कथित 'साजिशों' का जिक्र करती है। रेवंत रेड्डी के लिए असली चुनौती यह है कि इस सार्वजनिक असंतोष को मैनेज किए बिना वारंगल नगर निगम चुनावों में एकजुट दिखना मुश्किल होगा। बेटी के बयानों को 'स्वतंत्र वयस्क' कहकर पल्ला झाड़ने का तर्क कांग्रेस हाईकमान को स्वीकार्य नहीं हुआ — यह एक मिसाल है जो आगे पार्टी अनुशासन के मानदंड तय करेगी।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोंडा सुरेखा को तेलंगाना मंत्रिमंडल से क्यों हटाया गया?
कोंडा सुरेखा को अनुशासनहीनता के आरोप में तेलंगाना मंत्रिमंडल से हटाया गया। उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता ने सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कुछ कांग्रेस नेताओं पर तीखे बयान दिए थे, जिसके बाद कांग्रेस की अनुशासन समिति ने कारण बताओ नोटिस जारी किया और हाईकमान ने सुरेखा का जवाब संतोषजनक नहीं माना।
क्या कोंडा सुरेखा कांग्रेस छोड़ेंगी?
नहीं। कोंडा सुरेखा ने 13 सितंबर 2026 को वारंगल में अपने समर्थकों के सामने स्पष्ट किया कि वे और उनके पति कोंडा मुरली कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करने की भी बात कही।
कोंडा सुरेखा का राजनीतिक सफर कैसा रहा है?
कोंडा सुरेखा ने 2014 में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के टिकट पर वारंगल पूर्व सीट से कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री को हराया था। 2018 में वे कांग्रेस में शामिल हुईं और 2023 के विधानसभा चुनाव में इसी सीट से कांग्रेस टिकट पर जीत दर्ज की, जिसके बाद उन्हें मंत्री पद मिला।
कोंडा सुरेखा की बेटी ने किस पर क्या आरोप लगाए थे?
कोंडा सुष्मिता ने सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कांग्रेस नेताओं पर तीखी टिप्पणियाँ कीं। उन्होंने रेवंत रेड्डी द्वारा विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी के समर्थन पर सवाल उठाए और पारकल विधानसभा सीट से खुद चुनाव लड़ने की इच्छा जताई।
कोंडा सुरेखा आगे क्या करने का इरादा रखती हैं?
सुरेखा ने स्पष्ट किया कि मंत्री पद जाने के बाद वे घर नहीं बैठेंगी बल्कि जनता के बीच सक्रिय रहेंगी। उनका प्राथमिक लक्ष्य आगामी वारंगल नगर निगम चुनावों में कांग्रेस के लिए अधिकतम सीटें जीतना है।
राष्ट्र प्रेस
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