कैबिनेट से हटाई गईं कोंडा सुरेखा का ऐलान: 'कांग्रेस नहीं छोड़ूंगी, जनता के बीच रहकर करूंगी काम'
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना मंत्रिमंडल से बर्खास्त की गईं विधायक कोंडा सुरेखा ने 13 सितंबर 2026 को वारंगल में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वे और उनके पति कोंडा मुरली किसी भी स्थिति में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) नहीं छोड़ेंगे। अनुशासनहीनता के आरोप में मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन था, जिसमें उन्होंने पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करने की बात कही।
मंत्रिमंडल से हटाने का कारण क्या रहा
कोंडा सुरेखा के खिलाफ कार्रवाई तब शुरू हुई जब उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता ने सार्वजनिक कार्यक्रमों और सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और कुछ कांग्रेस नेताओं पर तीखे प्रहार किए। सुष्मिता ने रेवंत रेड्डी द्वारा कांग्रेस विधायक रेवुरी प्रकाश रेड्डी के समर्थन पर सवाल उठाए और पारकल विधानसभा सीट से खुद चुनाव लड़ने की इच्छा भी सार्वजनिक रूप से जताई।
इसके बाद तेलंगाना कांग्रेस की अनुशासन समिति ने कोंडा सुरेखा को कारण बताओ नोटिस जारी किया। सुरेखा ने जवाब में कहा कि उनकी बेटी बालिग और स्वतंत्र वयस्क है, इसलिए उसके बयानों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। हालाँकि कांग्रेस हाईकमान ने इस स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना और अंततः उन्हें मंत्रिमंडल से हटा दिया गया।
सुरेखा की प्रतिक्रिया और राजनीतिक रुख
सुरेखा ने कहा, 'मैं मंडल परिषद अध्यक्ष (एमपीपी) के पद से आगे बढ़कर मंत्री बनी हूं। कुछ लोग हर दिन पार्टी बदलते रहते हैं।' उन्होंने अवसरवादी राजनीति पर यह टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि पद उनके लिए कभी प्राथमिकता नहीं रहे। उन्होंने यह भी कहा कि मंत्रिमंडल से हटाए जाने का दुख नहीं है, लेकिन जिस कारण से यह कदम उठाया गया, उससे वे आहत जरूर हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी के लिए उन्होंने अतीत में मंत्री पद भी छोड़ा था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उन्हें टिकट से वंचित करने के लिए साजिश की थी।
राजनीतिक सफर: टीआरएस से कांग्रेस तक
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में तत्कालीन तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने उन्हें वारंगल पूर्व सीट से टिकट दिया था और उन्होंने कांग्रेस के तत्कालीन मंत्री को हराया था। 2018 में वे कांग्रेस में शामिल हुईं और 2023 के विधानसभा चुनाव में उसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की।
समर्थकों को संयम की सलाह, नगर निगम चुनावों पर नजर
सुरेखा ने बताया कि उनके कुछ समर्थक मंत्री पद से हटाए जाने के विरोध में आंदोलन की योजना बना रहे थे, लेकिन उन्होंने उन्हें पार्टी हाईकमान के फैसले का सम्मान करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आगामी वारंगल नगर निगम चुनावों में अधिकतम सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ जनता के बीच सक्रिय रहेंगी।
यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार के भीतर आंतरिक मतभेदों की चर्चा थमी नहीं है और आने वाले स्थानीय चुनावों से पहले पार्टी एकजुटता की परीक्षा होनी है।