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तेलंगाना: कांग्रेस अनुशासन समिति ने मंत्री कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाने की सिफारिश की

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तेलंगाना: कांग्रेस अनुशासन समिति ने मंत्री कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाने की सिफारिश की

सारांश

तेलंगाना कांग्रेस में बड़ा घमासान — अनुशासन समिति ने मंत्री कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से और जी. चिन्ना रेड्डी को योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष पद से हटाने की सिफारिश की। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की आलोचना से उपजे इस विवाद पर अब AICC आलाकमान अंतिम फैसला सुनाएगा।

मुख्य बातें

तेलंगाना कांग्रेस अनुशासन समिति ने 25 अगस्त को मंत्री कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाने की सिफारिश की।
योजना बोर्ड उपाध्यक्ष जी.
चिन्ना रेड्डी को भी पद से हटाने की अनुशंसा की गई; वे कैबिनेट रैंक का दर्जा रखते हैं।
रिपोर्ट मल्लू रवि और श्याम मोहन ने राज्य अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ को सौंपी, जिन्होंने इसे AICC प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को भेजा।
विवाद की जड़ सुरेखा की बेटी कोंडा सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ की गई टिप्पणियाँ हैं।
चिन्ना रेड्डी ने 16 अगस्त को गोपालपेट में पार्टी नेतृत्व और विधायक टी.
मेघा रेड्डी पर अनुचित टिप्पणियाँ की थीं।
अंतिम निर्णय AICC नेतृत्व लेगा।

तेलंगाना की वन एवं बंदोबस्त मंत्री कोंडा सुरेखा और योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष जी. चिन्ना रेड्डी पर कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है — राज्य कांग्रेस की अनुशासनात्मक समिति ने 25 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में सुरेखा को कैबिनेट से बर्खास्त करने और चिन्ना रेड्डी को उनके पद से हटाने की औपचारिक सिफारिश की है। अब अंतिम निर्णय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) नेतृत्व के हाथों में है।

सिफारिश की पृष्ठभूमि

अनुशासन समिति के अध्यक्ष मल्लू रवि और उपाध्यक्ष श्याम मोहन ने मंगलवार को राज्य पार्टी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ को रिपोर्ट सौंपी। गौड़ ने यह रिपोर्ट तेलंगाना के लिए AICC प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को अग्रेषित कर दी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के विरुद्ध की जाने वाली कार्रवाई पर AICC नेतृत्व ही अंतिम मुहर लगाएगा।

विवाद की जड़

रिपोर्टों के अनुसार, अनुशासन समिति ने पाया कि मंत्री सुरेखा को अपनी बेटी कोंडा सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ की गई टिप्पणियों की सार्वजनिक रूप से निंदा करनी चाहिए थी। समिति की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि यह सुरेखा द्वारा पार्टी अनुशासन का पहला उल्लंघन नहीं है। वहीं, चिन्ना रेड्डी पर आरोप है कि उन्होंने 16 अगस्त को वनपर्थी जिले के गोपालपेट में मंडल कांग्रेस कार्यालय के उद्घाटन के दौरान पार्टी नेतृत्व और वनपर्थी के विधायक टी. मेघा रेड्डी के खिलाफ अनुचित टिप्पणियाँ कीं।

दोनों नेताओं का पक्ष

अनुशासन समिति द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में, सुरेखा ने वारंगल जिले के परकाला में हुए कार्यक्रम के दौरान सुष्मिता द्वारा की गई टिप्पणियों से स्वयं को अलग कर लिया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ की गई टिप्पणियाँ उनकी बेटी के निजी विचार थे और उन्हें इसके लिए राजनीतिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। सुरेखा ने नोटिस वापस लेने का भी आग्रह किया था। चिन्ना रेड्डी ने भी नोटिस वापस लेने की माँग की और कहा कि उनकी टिप्पणियाँ पुराने पार्टी कार्यकर्ताओं की शिकायतों को व्यक्त करने का माध्यम मात्र थीं।

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

सोमवार को एक प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सुरेखा और उनकी बेटी से जुड़े विवाद पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे मीडिया के सामने पार्टी के आंतरिक मामलों पर बात नहीं करना चाहते, क्योंकि मामला पहले से ही अनुशासन समिति के समक्ष है। रेवंत रेड्डी ने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी आलाकमान का फैसला अंतिम होगा और सभी नेताओं को उसे मानना होगा।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब तेलंगाना में कांग्रेस सरकार को आंतरिक असंतोष की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि चिन्ना रेड्डी कैबिनेट रैंक का दर्जा रखते हैं, इसलिए उनकी बर्खास्तगी भी राजनीतिक रूप से उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। AICC का निर्णय आने वाले दिनों में तेलंगाना कांग्रेस की आंतरिक स्थिति को स्पष्ट करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी परतें गहरी हैं — एक ओर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी अपनी सत्ता को सुदृढ़ करने की कोशिश में हैं, दूसरी ओर पुराने कांग्रेसी नेता हाशिये पर जाने से नाराज हैं। चिन्ना रेड्डी का यह कहना कि उनकी टिप्पणियाँ 'पुराने कार्यकर्ताओं की शिकायतों की अभिव्यक्ति' थीं, यह संकेत देता है कि असंतोष महज़ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संरचनात्मक है। AICC यदि कड़ी कार्रवाई करती है, तो यह संदेश जाएगा कि केंद्रीय नेतृत्व रेवंत रेड्डी के पीछे खड़ा है — लेकिन इससे राज्य इकाई में दबी नाराज़गी और भड़क सकती है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कोंडा सुरेखा के खिलाफ कांग्रेस अनुशासन समिति ने क्या सिफारिश की है?
तेलंगाना कांग्रेस अनुशासन समिति ने सिफारिश की है कि वन एवं बंदोबस्त मंत्री कोंडा सुरेखा को कैबिनेट से हटाया जाए। यह सिफारिश उनकी बेटी कोंडा सुष्मिता द्वारा मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के खिलाफ की गई टिप्पणियों की सार्वजनिक निंदा न करने और पूर्व में भी पार्टी अनुशासन के उल्लंघन के आधार पर की गई है।
जी. चिन्ना रेड्डी पर क्या आरोप हैं?
योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष जी. चिन्ना रेड्डी पर आरोप है कि उन्होंने 16 अगस्त को वनपर्थी जिले के गोपालपेट में पार्टी नेतृत्व और विधायक टी. मेघा रेड्डी के खिलाफ अनुचित टिप्पणियाँ कीं। अनुशासन समिति ने उन्हें उनके कैबिनेट रैंक के पद से हटाने की सिफारिश की है।
इस मामले में अंतिम फैसला कौन करेगा?
पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के विरुद्ध कार्रवाई पर अंतिम निर्णय AICC नेतृत्व लेगा। अनुशासन समिति की रिपोर्ट AICC प्रभारी मीनाक्षी नटराजन को भेजी जा चुकी है।
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने इस विवाद पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सोमवार को प्रेस वार्ता में इस विवाद पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मामला अनुशासन समिति के पास है और पार्टी आलाकमान का फैसला अंतिम होगा, जिसे सभी नेताओं को मानना होगा।
कोंडा सुरेखा ने अनुशासन नोटिस का क्या जवाब दिया था?
सुरेखा ने अपने जवाब में कहा कि उनकी बेटी की टिप्पणियाँ उसके निजी विचार थे और उन्हें इसके लिए राजनीतिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने अनुशासन समिति से नोटिस वापस लेने का आग्रह भी किया था।
राष्ट्र प्रेस
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