भाजपा की नई टीम पर हुसैन दलवई का तंज: 'फैसले तो पुराने लोग ही लेते हैं'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हुसैन दलवई ने 18 अगस्त को मुंबई में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि नई टीम बनाने का कोई विशेष अर्थ नहीं है, क्योंकि असली निर्णय तो पुराने और स्थापित चेहरे ही लेते हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी की नई टीम घोषित की है।
भाजपा की नई टीम और उसकी संरचना
भाजपा की नई कार्यकारिणी में उन राज्यों के कार्यकर्ताओं, नेताओं और पूर्व मंत्रियों को प्राथमिकता दी गई है जहाँ 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। पार्टी ने कुछ नए चेहरों को शामिल करने के साथ-साथ कई पुराने और अनुभवी नेताओं पर फिर से भरोसा जताया है।
दलवई ने इस पर व्यंग्य करते हुए कहा कि नितिन नवीन स्वयं एक नए चेहरे हैं और उनकी टीम भी नई है, लेकिन सभी बड़े निर्णय प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री के स्तर पर ही लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े नेताओं की वास्तविक भूमिका कितनी है, यह स्पष्ट नहीं होता।
एसआईआर पर गंभीर आरोप
दलवई ने विशेष पहचान रजिस्टर (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया का मकसद उन मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से बाहर करना है, जिनके बारे में यह माना जाता है कि वे सत्तारूढ़ दल के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक चुनावी व्यवस्था को कमज़ोर करने की कोशिश है। दलवई के अनुसार, समाज में 'एक पार्टी, एक देश, एक संस्कृति, एक धर्म' की विचारधारा थोपने का प्रयास किया जा रहा है।
'वंदे मातरम' विवाद और धर्मनिरपेक्षता का सवाल
'वंदे मातरम' को लेकर चल रही बहस पर दलवई ने कहा कि इस मुद्दे पर अनावश्यक माहौल बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' गाया जाना एक बात है, लेकिन हर नागरिक के लिए इसे अनिवार्य नहीं बनाया जा सकता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल किसी एक धर्म या समुदाय का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह भारत के धर्मनिरपेक्ष संवैधानिक चरित्र का सवाल है।
सोनिया गांधी और राम मंदिर एसआईटी रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से माफी मांगने की मांगों पर दलवई ने पलटवार करते हुए कहा कि माफी उन्हें माँगनी चाहिए जिन्होंने कभी अपने कार्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया।
राम मंदिर से जुड़े मामले में एसआईटी की रिपोर्ट पर भी दलवई ने सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जब एसआईटी का गठन हुआ था, तभी से जाँच के परिणाम की दिशा तय थी। उन्होंने दावा किया कि मामले की स्वतंत्र जाँच नहीं हुई और रिपोर्ट के ज़रिए मामले को दबाने की कोशिश की गई। दलवई ने रिपोर्ट को फर्जी करार दिया।
ट्रंप के प्रवासी-विरोधी रुख पर चिंता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रवासियों से जुड़े बयान पर दलवई ने कहा कि अमेरिका के निर्माण और विकास में बड़ी संख्या में भारतीयों का योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि ट्रंप जिस कानून की बात कर रहे हैं, उससे प्रवासियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की आशंका है, जो एक बेहद अफसोसजनक स्थिति होगी।
आने वाले दिनों में भाजपा की यह नई टीम किस तरह 2027 के चुनावी मैदान में उतरती है और विपक्ष के इन सवालों का जवाब देती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।