2 अगस्त 2026
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जोरहाट एयरबेस पर AN-32 विमान क्रैश: भारतीय वायुसेना के 5 कर्मियों की मौत, लैंडिंग के दौरान लगी आग

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जोरहाट एयरबेस पर AN-32 विमान क्रैश: भारतीय वायुसेना के 5 कर्मियों की मौत, लैंडिंग के दौरान लगी आग

सारांश

असम के जोरहाट एयरबेस पर 13 जून को लैंडिंग के दौरान IAF का AN-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और उसमें आग लग गई। स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह समेत पाँच वायुसेना कर्मी शहीद हुए। यह उसी जोरहाट बेस से जुड़ी AN-32 की तीसरी बड़ी त्रासदी है।

मुख्य बातें

13 जून 2026 को सुबह लगभग 10 बजे IST असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर AN-32 विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
हादसे में IAF के 5 कर्मी शहीद — स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह , फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार , सार्जेंट जितेंद्र शर्मा , अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम ।
लैंडिंग के दौरान विमान में आग लगी; वायुसेना व हवाई अड्डे की अग्निशमन टीमों ने तत्काल कार्रवाई की।
IAF ने अटकलों से बचने की अपील की; विस्तृत जाँच के आदेश अपेक्षित।
AN-32 इससे पहले जून 2019 (जोरहाट से उड़ान, 13 कर्मी शहीद) और जुलाई 2016 ( 29 लोग लापता) की दुर्घटनाओं में भी शामिल रहा है।

भारतीय वायुसेना (IAF) के एक AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान के 13 जून 2026 को असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो जाने से पाँच वायुसेना कर्मियों की मौत हो गई। यह हादसा सुबह लगभग 10 बजे IST हुआ, जब उतरते वक्त विमान में अचानक आग भड़क उठी। वायुसेना और हवाई अड्डे की अग्निशमन टीमों ने तत्काल आपातकालीन कार्रवाई शुरू की।

हादसे का विवरण

वायुसेना के अनुसार, यह एक रूटीन उड़ान थी जो जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर उतर रही थी। लैंडिंग के दौरान विमान में आग लग गई, जिसके बाद दुर्घटनास्थल पर तत्काल बचाव अभियान शुरू किया गया। IAF ने एक आधिकारिक बयान में कहा, "आज सुबह लगभग 10 बजे असम के जोरहाट में एक रूटीन उड़ान के दौरान IAF के AN-32 विमान का एक्सीडेंट हो गया। अभी क्रैश वाली जगह पर जाँच चल रही है। IAF सभी से अपील करता है कि शुरुआती नतीजे आने तक कोई अटकलें न लगाएँ।"

शहीद कर्मियों के नाम

वायुसेना ने दूसरे आधिकारिक बयान में पाँचों शहीद कर्मियों के नाम जारी किए। इस दुर्घटना में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया। IAF ने शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि वह "दुख की इस घड़ी में मज़बूती से उनके साथ खड़ी है।"

जाँच और आगे की कार्रवाई

दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जाँच के आदेश दिए जाने की उम्मीद है। तकनीकी विशेषज्ञ और वायुसेना अधिकारी क्रैश स्थल की प्रारंभिक जाँच में जुटे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब वायुसेना के पुराने बेड़े की उड़ान-सुरक्षा पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं।

AN-32 की पृष्ठभूमि और पूर्व हादसे

सोवियत मूल का AN-32 एक ट्विन-इंजन सामरिक परिवहन विमान है, जो दशकों से IAF के बेड़े में शामिल है। पूर्वोत्तर भारत के दुर्गम इलाकों और हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में यह विमान महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

गौरतलब है कि यह इस प्रकार के विमान की पहली दुर्घटना नहीं है। जून 2019 में जोरहाट वायुसेना स्टेशन से ही अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के लिए उड़ान भरने वाला एक AN-32 लापता हो गया था। व्यापक खोज अभियान के बाद विमान का मलबा अरुणाचल के पहाड़ी इलाके में मिला और उसमें सवार सभी 13 कर्मियों को मृत घोषित किया गया। इससे पहले जुलाई 2016 में चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जा रहा एक अन्य AN-32 बंगाल की खाड़ी के ऊपर लापता हो गया था, जिसमें 29 लोग सवार थे। भारत के सबसे बड़े खोज अभियानों में से एक चलाए जाने के बावजूद वर्षों तक विमान नहीं मिला और 2024 में उससे जुड़े मलबे की पहचान की गई।

क्या होगा आगे

दुर्घटना की विस्तृत जाँच रिपोर्ट आने के बाद ही आधिकारिक कारण स्पष्ट होगा। यह हादसा AN-32 बेड़े की दीर्घकालिक उड़ान-योग्यता और प्रतिस्थापन योजना पर नए सिरे से बहस छेड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो इस पुराने सोवियत-युग के बेड़े की उड़ान-सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। AN-32 के आधुनिकीकरण और प्रतिस्थापन की चर्चा वर्षों से चलती रही है, लेकिन ठोस प्रगति सीमित रही है। अग्निवीर योजना के तहत भर्ती हुए दो कर्मियों का इस हादसे में शामिल होना उस बहस को भी नई धार देता है कि क्या अल्पकालिक सैन्य सेवा में जोखिम-प्रबंधन पर्याप्त है। जाँच रिपोर्ट का दायरा तकनीकी खराबी से आगे बढ़कर बेड़े की दीर्घकालिक योजना तक जाना चाहिए।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोरहाट एयरबेस पर AN-32 दुर्घटना में कितने लोग मारे गए?
इस हादसे में भारतीय वायुसेना के पाँच कर्मी शहीद हुए। मृतकों में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीर वायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीर वायु दानिश आलम शामिल हैं।
जोरहाट AN-32 दुर्घटना कब और कैसे हुई?
यह हादसा 13 जून 2026 को सुबह लगभग 10 बजे IST हुआ, जब AN-32 विमान जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर एक रूटीन उड़ान के बाद लैंडिंग कर रहा था। उतरते समय विमान में आग लग गई, जिसके बाद वायुसेना और हवाई अड्डे की अग्निशमन टीमों ने तत्काल कार्रवाई की।
AN-32 विमान क्या है और IAF इसे क्यों उपयोग करती है?
AN-32 एक सोवियत-मूल का ट्विन-इंजन सामरिक परिवहन विमान है, जो दशकों से भारतीय वायुसेना के बेड़े में है। यह विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत के दुर्गम इलाकों और हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में आपूर्ति और कर्मियों की आवाजाही के लिए उपयोग किया जाता है।
क्या AN-32 विमान पहले भी दुर्घटनाग्रस्त हुआ है?
हाँ, AN-32 कई बड़े हादसों में शामिल रहा है। जून 2019 में जोरहाट से उड़ान भरने वाला एक AN-32 अरुणाचल प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 13 कर्मी शहीद हुए। जुलाई 2016 में चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जाते समय एक अन्य AN-32 बंगाल की खाड़ी के ऊपर लापता हो गया, जिसमें 29 लोग सवार थे और 2024 में उसके मलबे की पहचान हुई।
इस दुर्घटना की जाँच कौन करेगा और कब तक रिपोर्ट आएगी?
भारतीय वायुसेना ने विस्तृत जाँच के आदेश दिए जाने की बात कही है। तकनीकी विशेषज्ञ और वायुसेना अधिकारी दुर्घटनास्थल की जाँच में जुटे हैं। IAF ने अनुरोध किया है कि शुरुआती नतीजे आने तक कोई अटकलें न लगाई जाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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