एएन-32 क्रैश: केजरीवाल, आतिशी और हुड्डा ने 5 शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि
सारांश
मुख्य बातें
जोरहाट (असम) में भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर ने 13 जून को पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया। इस हादसे में 5 वायुसेना कर्मियों ने कर्तव्य निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। देशभर के राजनीतिक नेताओं ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त कीं।
केजरीवाल और आतिशी की श्रद्धांजलि
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर लिखा कि असम में वायुसेना के एएन-32 विमान हादसे में हमारे पाँच वीर जवानों के शहीद होने की खबर अत्यंत दुखद है। उन्होंने ईश्वर से शोक संतप्त परिवारों को इस कठिन समय में शक्ति देने की प्रार्थना की।
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और AAP की वरिष्ठ नेता आतिशी ने भी शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देश के लिए उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने शहीदों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए ईश्वर से उन्हें साहस और शक्ति प्रदान करने की कामना की।
हुड्डा का शोक संदेश
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी इस हादसे पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि जोरहाट में एएन-32 विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने का समाचार बेहद दुखद है। हुड्डा ने कहा कि इस दुख की घड़ी में पूरा देश शहीदों के परिवारों के साथ एकजुट है और देश अपने वीर सपूतों के बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।
शहीद जवानों के नाम
भारतीय वायुसेना के अनुसार, इस हादसे में स्क्वाड्रन लीडर प्रशांत सिंह, फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार, सार्जेंट जितेंद्र शर्मा, अग्निवीरवायु खेमाराम कुमावत और अग्निवीरवायु दानिश आलम ने सर्वोच्च बलिदान दिया। वायुसेना ने कहा कि वह इस दुख की घड़ी में शहीदों के परिवारों के साथ है।
वायुसेना का बयान
भारतीय वायुसेना ने शहीद जवानों के प्रति गहरा शोक व्यक्त करते हुए उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़े रहने की प्रतिबद्धता जताई। यह हादसा ऐसे समय में आया है जब वायुसेना अपने बेड़े के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया में है। गौरतलब है कि एएन-32 विमान वायुसेना का एक पुराना परिवहन विमान है जो दशकों से सेवा में है।
देश के नेताओं की एकजुट श्रद्धांजलि यह दर्शाती है कि सशस्त्र बलों के बलिदान पर राजनीतिक सीमाएँ नहीं होतीं। शहीदों के परिवारों को सरकारी सहायता और सम्मान मिलने की प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।