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जोरहाट में IAF का AN-32 विमान लैंडिंग के बाद आग की चपेट में, जांच समिति गठित

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जोरहाट में IAF का AN-32 विमान लैंडिंग के बाद आग की चपेट में, जांच समिति गठित

सारांश

असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के तुरंत बाद IAF का AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान आग की चपेट में आ गया। वायु सेना ने घटना की पुष्टि की और जांच समिति गठित की। यह घटना AN-32 बेड़े की दुर्घटनाओं की लंबी श्रृंखला में एक और कड़ी है।

मुख्य बातें

13 जून को जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन , असम पर लैंडिंग के बाद IAF का AN-32 विमान आग की चपेट में आया।
भारतीय वायु सेना ने एक्स पर घटना की पुष्टि की और जांच समिति के गठन की जानकारी दी।
हताहतों और विमान को हुए नुकसान की आधिकारिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
जून 2019 में जोरहाट से उड़ान भरने वाला AN-32 अरुणाचल में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई थी।
जुलाई 2016 में बंगाल की खाड़ी में लापता AN-32 में सवार 29 लोगों को मृत घोषित किया गया; मलबा 2024 में मिला।

भारतीय वायु सेना (IAF) का एक AN-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शनिवार, 13 जून को असम के जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के तुरंत बाद आग की चपेट में आ गया। विमान से आग की लपटें और घना धुआं उठता देखा गया, जिसके बाद एयरबेस पर तत्काल इमरजेंसी प्रोटोकॉल सक्रिय किए गए।

मुख्य घटनाक्रम

प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना विमान के रनवे पर उतरने के तुरंत बाद घटी। एयरपोर्ट और भारतीय वायु सेना की इमरजेंसी टीमें तत्काल मौके पर पहुँचीं और आग पर काबू पाने का काम शुरू किया। विमान को हुए नुकसान की सीमा और किसी के हताहत होने की जानकारी घटना के तुरंत बाद उपलब्ध नहीं हो सकी।

भारतीय वायु सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस दुर्घटना की पुष्टि करते हुए लिखा: 'आज जोरहाट में लैंडिंग के दौरान भारतीय वायु सेना का एक एएन-32 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए एक जांच समिति का गठन किया जा रहा है।' बचाव कार्य, स्थिति का आकलन और जांच प्रक्रिया जारी है।

AN-32 विमान की भूमिका और महत्व

सोवियत मूल का AN-32 एक ट्विन-इंजन वाला टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है, जो दशकों से भारतीय वायु सेना की रीढ़ रहा है। यह विमान विशेष रूप से उत्तर-पूर्व भारत और हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों के दुर्गम इलाकों में आपूर्ति और परिवहन के लिए अपरिहार्य माना जाता है। इसकी ऊँचाई पर उड़ान भरने की क्षमता इसे इन क्षेत्रों में अन्य विमानों की तुलना में अधिक उपयुक्त बनाती है।

AN-32 की पिछली दुर्घटनाओं का इतिहास

इस ताज़ा घटना ने AN-32 बेड़े के दुर्घटना-इतिहास को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। जून 2019 में 13 लोगों को लेकर जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन से अरुणाचल प्रदेश के मेचुका के लिए उड़ान भरने वाला एक AN-32 विमान लापता हो गया था। व्यापक सर्च ऑपरेशन के बाद विमान का मलबा अरुणाचल के पहाड़ी इलाके में मिला और सभी 13 लोगों को मृत घोषित किया गया।

इससे पहले जुलाई 2016 में एक AN-32 विमान चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जाते समय बंगाल की खाड़ी के ऊपर 29 लोगों सहित लापता हो गया था। भारत के सबसे बड़े सर्च ऑपरेशनों में से एक के बावजूद विमान का पता वर्षों तक नहीं चला और सभी को मृत मान लिया गया। 2024 में अंततः विमान से जुड़ा मलबा बरामद हुआ। पिछले कुछ वर्षों में अरुणाचल प्रदेश में क्रैश और सैन्य हवाई अड्डों पर ऑपरेशनल घटनाओं सहित कई अन्य दुर्घटनाएं भी इस बेड़े से जुड़ी रही हैं।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की जांच

भारतीय वायु सेना ने घटना की पुष्टि करते हुए जांच समिति के गठन की जानकारी दी है। अधिकारियों ने अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। दुर्घटना के सटीक कारणों, नुकसान की सीमा और चालक दल की स्थिति पर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्टता आएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन बार-बार होने वाली घटनाएं यह पूछने पर मजबूर करती हैं कि आधुनिकीकरण की प्रक्रिया कहाँ अटकी है। जांच समिति का गठन प्रक्रियागत कदम है, परंतु असली जवाबदेही तब होगी जब रिपोर्ट सार्वजनिक हो और सुधारात्मक कार्रवाई सत्यापन योग्य हो।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जोरहाट में IAF के AN-32 विमान में आग कब और कैसे लगी?
शनिवार, 13 जून को जोरहाट एयर फोर्स स्टेशन पर लैंडिंग के तुरंत बाद IAF के AN-32 ट्रांसपोर्ट विमान में आग लग गई। विमान से लपटें और घना धुआं निकलता देखा गया, जिसके बाद इमरजेंसी टीमें तत्काल मौके पर पहुँचीं।
क्या इस दुर्घटना में कोई हताहत हुआ?
घटना के समय हताहतों की कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं थी। भारतीय वायु सेना ने जांच समिति गठित की है और बचाव व आकलन कार्य जारी है।
AN-32 विमान क्या है और यह भारतीय वायु सेना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
AN-32 सोवियत मूल का ट्विन-इंजन टैक्टिकल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है, जो दशकों से IAF का अहम हिस्सा है। यह विशेष रूप से उत्तर-पूर्व भारत और हिमालयी सीमावर्ती दुर्गम क्षेत्रों में परिवहन और आपूर्ति के लिए उपयोग किया जाता है।
AN-32 की पिछली बड़ी दुर्घटनाएं कौन-सी हैं?
जून 2019 में जोरहाट से उड़ान भरने वाला AN-32 अरुणाचल प्रदेश में दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई। जुलाई 2016 में एक अन्य AN-32 चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर जाते समय बंगाल की खाड़ी में 29 लोगों सहित लापता हो गया; उसका मलबा 2024 में मिला।
भारतीय वायु सेना ने इस घटना पर क्या कार्रवाई की?
भारतीय वायु सेना ने एक्स पर घटना की पुष्टि की और दुर्घटना के कारणों का पता लगाने के लिए जांच समिति के गठन की जानकारी दी। बचाव कार्य और स्थिति का आकलन जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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