भारतीय वायु सेना ने मणिपुर से 132 एनसीसी कैडेट्स को एयरलिफ्ट किया, तीन AN-32 विमानों से असम पहुँचाया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय वायु सेना (IAF) ने 23 मई 2026 को मणिपुर की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति और सड़क मार्ग पर लगी पाबंदियों के बीच 132 एनसीसी कैडेट्स को इम्फाल से सुरक्षित निकालकर असम के गुवाहाटी और जोरहाट पहुँचाया। इस आपातकालीन एयरलिफ्ट ऑपरेशन में तीन AN-32 विमानों का उपयोग किया गया, जिसमें 72 कैडेट्स को गुवाहाटी और 60 कैडेट्स को जोरहाट भेजा गया।
मुख्य घटनाक्रम
ये सभी कैडेट्स 11 मई से 20 मई 2026 तक इम्फाल में आयोजित एनसीसी नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (NER) फ्लाइंग कैंप में भाग ले रहे थे। कैंप समाप्त होने के बाद मणिपुर में जारी तनाव और सड़क यातायात पर प्रतिबंधों के कारण ये कैडेट्स सड़क मार्ग से अपने घरों को नहीं लौट पा रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल हवाई निकासी का निर्णय लिया गया।
ऑपरेशन की योजना और समन्वय
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, इस एयरलिफ्ट ऑपरेशन की योजना एनसीसी NER डायरेक्टरेट ने एनसीसी हेडक्वार्टर के डायरेक्टर जनरल से परामर्श कर और ईस्टर्न एयर कमांड हेडक्वार्टर के साथ समन्वय बनाकर तैयार की। इस त्वरित कार्रवाई ने सुनिश्चित किया कि कैडेट्स अपनी आगामी परीक्षाओं के लिए समय पर और सुरक्षित रूप से अपने गंतव्य तक पहुँच सकें।
कैडेट्स और परिजनों की प्रतिक्रिया
सफल निकासी के बाद कैडेट्स ने रक्षा मंत्रालय, भारतीय वायु सेना और एनसीसी डायरेक्टरेट का हार्दिक आभार व्यक्त किया। अधिकारियों के अनुसार, इस ऑपरेशन से चिंतित माता-पिता और परिजनों को बड़ी राहत मिली। एनसीसी डायरेक्टरेट नॉर्थ ईस्टर्न रीजन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर इस ऑपरेशन को टीम वर्क और कैडेट्स की भलाई के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।
राष्ट्रीय एकता का संदेश
एनसीसी डायरेक्टरेट ने अपनी पोस्ट में कहा कि यह एयरलिफ्ट ऑपरेशन न केवल कैडेट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास था, बल्कि यह राष्ट्रीय एकता और सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को भी दर्शाता है। गौरतलब है कि मणिपुर में जारी अशांति के बीच यह ऑपरेशन IAF की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का उदाहरण बना।
आगे की स्थिति
फिलहाल मणिपुर में सुरक्षा हालात सामान्य नहीं हैं और सड़क मार्ग से आवाजाही पर पाबंदियाँ जारी हैं। प्रशासन और सुरक्षा बलों द्वारा स्थिति पर नज़र रखी जा रही है। इस ऑपरेशन की सफलता भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों में हवाई निकासी के लिए एक मिसाल के रूप में देखी जा रही है।