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लद्दाख से 5 मरीज़ एयरलिफ्ट, भारतीय वायुसेना ने C-17 और AN-32 से चंडीगढ़ पहुँचाया

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लद्दाख से 5 मरीज़ एयरलिफ्ट, भारतीय वायुसेना ने C-17 और AN-32 से चंडीगढ़ पहुँचाया

सारांश

प्रतिकूल मौसम और दुर्गम ऊँचाई को चुनौती देते हुए भारतीय वायुसेना ने लद्दाख से 5 गंभीर मरीज़ों को C-17 और AN-32 विमानों से चंडीगढ़ पहुँचाया। इनमें सेना के 3 जवान शामिल थे। 2026 में लद्दाख सेक्टर से अब तक 143 जानें बचाई जा चुकी हैं।

मुख्य बातें

भारतीय वायुसेना ने 8 जून 2026 को लद्दाख से 5 गंभीर मरीज़ों को एयरलिफ्ट कर चंडीगढ़ पहुँचाया।
निकाले गए मरीज़ों में भारतीय सेना के 3 जवान , 1 आश्रित परिजन और 1 स्थानीय नागरिक शामिल थे।
अभियान में C-17 ग्लोबमास्टर और AN-32 परिवहन विमानों का उपयोग हुआ।
वर्ष 2026 में लद्दाख सेक्टर में अब तक 143 लोगों की जान कैजुअल्टी इवैक्यूएशन अभियानों से बचाई जा चुकी है।
इससे पहले फायर एंड फ्यूरी कोर की एविएशन यूनिट ने 17,000 फीट की ऊँचाई पर फँसे 2 कोरियाई नागरिकों को रात में बचाया था।

भारतीय वायुसेना ने 8 जून 2026 को लद्दाख के दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र से 5 गंभीर रूप से बीमार मरीज़ों को सफलतापूर्वक एयरलिफ्ट कर चंडीगढ़ पहुँचाया। निकाले गए मरीज़ों में भारतीय सेना के 3 जवान, उनका 1 आश्रित परिजन और लद्दाख का 1 स्थानीय निवासी शामिल था। प्रतिकूल मौसम और ऊँचाई की चुनौतियों के बावजूद यह मिशन पूरी तरह सफल रहा।

अभियान का विवरण

वायुसेना ने इस मेडिकल इमरजेंसी अभियान के लिए C-17 ग्लोबमास्टर और AN-32 परिवहन विमानों का उपयोग किया। दोनों विमानों के चालक दल ने ऊँचे पहाड़ी इलाके, सीमित संसाधन और खराब मौसम जैसी बाधाओं को पार करते हुए सभी मरीज़ों को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाओं तक पहुँचाया।

पश्चिमी वायु कमान की प्रतिक्रिया

वायुसेना के पश्चिमी वायु कमान ने बताया कि यह अभियान आपात परिस्थितियों में जीवन बचाने के प्रति वायुसेना की दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रमाण है। कमान के अनुसार, सेना के जवानों, उनके परिजनों और आम नागरिकों को आवश्यकता पड़ने पर त्वरित सहायता उपलब्ध कराना वायुसेना की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।

2026 में लद्दाख से 143 जानें बचाई गईं

वायुसेना के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में केवल लद्दाख सेक्टर में कैजुअल्टी इवैक्यूएशन अभियानों के ज़रिये अब तक 143 लोगों की जान बचाई जा चुकी है। यह आँकड़ा संवेदनशील और दुर्गम सीमावर्ती क्षेत्रों में वायुसेना की मानवीय भूमिका की व्यापकता को रेखांकित करता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब लद्दाख में सैन्य तैनाती और नागरिक बसावट दोनों बढ़ी हैं, जिससे मेडिकल इवैक्यूएशन की माँग भी बढ़ी है।

पूर्व अभियानों की पृष्ठभूमि

कुछ महीने पहले 17,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर फँसे दो कोरियाई नागरिकों को रात के अँधेरे में सफलतापूर्वक बचाया गया था। यह अभियान भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर की आर्मी एविएशन यूनिट ने संपन्न किया था। ये दोनों घटनाएँ मिलकर दर्शाती हैं कि लद्दाख में हवाई बचाव क्षमता अब केवल सैन्य ज़रूरत नहीं, बल्कि मानवीय सुरक्षा की धुरी बन चुकी है।

आगे की राह

वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि हर आपातकालीन पुकार का जवाब देना उसका कर्तव्य है और इस भावना से ही ऐसे चुनौतीपूर्ण अभियान सफल होते हैं। आने वाले महीनों में लद्दाख में मौसम और अधिक कठिन होने की संभावना को देखते हुए वायुसेना की तैयारी और सतर्कता बनाए रखना अनिवार्य होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह आँकड़ा खिंचाव की सीमा को भी दर्शाता है। C-17 और AN-32 जैसे भारी विमानों का मेडिकल इवैक्यूएशन में नियमित उपयोग संसाधन-आवंटन की प्राथमिकताओं पर एक महत्वपूर्ण नीतिगत बहस की माँग करता है।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लद्दाख से किन्हें एयरलिफ्ट किया गया?
भारतीय वायुसेना ने 8 जून 2026 को लद्दाख से 5 गंभीर मरीज़ों को एयरलिफ्ट किया, जिनमें भारतीय सेना के 3 जवान, उनका 1 आश्रित परिजन और लद्दाख का 1 स्थानीय निवासी शामिल था। सभी को चंडीगढ़ में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए पहुँचाया गया।
इस अभियान में किन विमानों का उपयोग किया गया?
वायुसेना ने C-17 ग्लोबमास्टर और AN-32 परिवहन विमानों का उपयोग किया। दोनों विमानों के चालक दल ने ऊँचाई, सीमित संसाधन और खराब मौसम की चुनौतियों के बावजूद मिशन सफलतापूर्वक पूरा किया।
2026 में लद्दाख से कितने लोगों को एयरलिफ्ट किया जा चुका है?
वायुसेना के आँकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में केवल लद्दाख सेक्टर में कैजुअल्टी इवैक्यूएशन अभियानों के ज़रिये अब तक 143 लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
फायर एंड फ्यूरी कोर का पिछला बचाव अभियान क्या था?
कुछ महीने पहले भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर की आर्मी एविएशन यूनिट ने 17,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर फँसे दो कोरियाई नागरिकों को रात के अँधेरे में सफलतापूर्वक बचाया था। यह अभियान अत्यंत संवेदनशील और साहसिक माना गया।
लद्दाख में मेडिकल इवैक्यूएशन क्यों चुनौतीपूर्ण है?
लद्दाख की अत्यधिक ऊँचाई, दुर्गम भूगोल, सीमित ज़मीनी संपर्क और अचानक बदलने वाला मौसम मेडिकल इवैक्यूएशन को जटिल बनाते हैं। इन परिस्थितियों में वायुसेना के भारी परिवहन विमान ही एकमात्र त्वरित विकल्प होते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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