30 अक्टूबर 2026
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आईडीबीआई बैंक विनिवेश: सीतारमण का राहुल गांधी पर पलटवार, ₹25,000 करोड़ पुनर्पूंजीकरण का दिया हवाला

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आईडीबीआई बैंक विनिवेश: सीतारमण का राहुल गांधी पर पलटवार, ₹25,000 करोड़ पुनर्पूंजीकरण का दिया हवाला

सारांश

आईडीबीआई बैंक विनिवेश अब सिर्फ आर्थिक फैसला नहीं, बल्कि तीखा सियासी रणभूमि बन गया है। राहुल गांधी ₹9,000 करोड़ के मुनाफे का हवाला देकर बिक्री पर सवाल उठा रहे हैं, तो सीतारमण ₹25,000 करोड़ के सरकारी पुनर्पूंजीकरण और कांग्रेस युग की 'फोन बैंकिंग' का ज़िक्र कर पलटवार कर रही हैं।

मुख्य बातें

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30 अक्टूबर 2026 को एक्स पर राहुल गांधी के आईडीबीआई विनिवेश आरोपों का जवाब दिया।
सीतारमण ने कहा कि एनडीए सरकार ने ₹25,000 करोड़ से अधिक के पुनर्पूंजीकरण से आईडीबीआई बैंक को संकट से उबारा।
राहुल गांधी का दावा — बैंक अब ₹9,000 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमा रहा है; मुनाफे में बिक्री अनुचित।
गांधी के अनुसार सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी 95% से घटकर 34% रह जाएगी।
विपक्ष ने निजीकरण के बाद SC/ST/OBC आरक्षण और कर्मचारी सेवा शर्तों पर खतरे की आशंका जताई।
सीतारमण ने कांग्रेस काल की 'फोन बैंकिंग' प्रथा और राजनीतिक ऋण दबाव का उल्लेख करते हुए एनपीए के लिए विपक्ष को ज़िम्मेदार ठहराया।

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 30 अक्टूबर 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आईडीबीआई बैंक विनिवेश संबंधी आरोपों का कड़ा जवाब दिया और कांग्रेस पर बैंकों व वित्तीय संस्थाओं का राजनीतिक हितों के लिए दुरुपयोग करने का आरोप लगाया। सीतारमण ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि एनडीए सरकार ने ₹25,000 करोड़ से अधिक के पुनर्पूंजीकरण के ज़रिए इस बैंक को संकट से उबारा है और अब यह विकास के अगले चरण के लिए तैयार है।

विवाद की पृष्ठभूमि

राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में दावा किया कि आईडीबीआई बैंक सात साल पहले घाटे में था, लेकिन अब ₹9,000 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमा रहा है — और इस बदलाव का श्रेय बैंक के कर्मचारियों को जाता है। गांधी ने यह भी कहा कि संसद भवन में उनसे मिले बैंक कर्मचारियों ने सवाल पूछा था कि जब बैंक मुनाफे में है तो उसे बेचा क्यों जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस ने देश के औद्योगिक विकास के लिए आईडीबीआई जैसे संस्थानों की नींव रखी थी, जबकि मौजूदा सरकार लाभ में चल रहे सार्वजनिक बैंकों को बेच रही है।

सरकार की प्रतिक्रिया

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पर अपने पोस्ट में कहा, 'एनडीए सरकार ने पेशेवर प्रबंधन, विवेकपूर्ण नीतियों और ₹25,000 करोड़ से अधिक के पुनर्पूंजीकरण के ज़रिए आईडीबीआई बैंक को पुनर्जीवित किया। बैंक अब विकास के अगले चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है और इसके रणनीतिक पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की गई है।' सीतारमण ने यह भी कहा कि कांग्रेस द्वारा उठाए जा रहे सवाल तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

सीतारमण ने कांग्रेस शासन के दौरान 'फोन बैंकिंग' यानी राजनीतिक प्रभाव में ऋण स्वीकृत कराने की प्रथा का उल्लेख किया और कहा कि उस दौर में ऐसे कारोबारी समूहों को ऋण दिलाए गए जिनके राजनीतिक संबंध थे, और बाद में यही ऋण गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में तब्दील हो गए। उन्होंने दावा किया कि अब वह दौर समाप्त हो चुका है और आम नागरिकों को ऋण तक आसान पहुँच उपलब्ध है।

हिस्सेदारी और आरक्षण की चिंता

राहुल गांधी ने दावा किया कि फिलहाल सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास मिलकर बैंक की करीब 95 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो प्रस्तावित बिक्री के बाद घटकर 34 प्रतिशत रह जाएगी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि निजीकरण के बाद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण प्रावधान और कर्मचारियों की सेवा शर्तें प्रभावित हो सकती हैं। गांधी ने कहा कि 'सार्वजनिक बैंक केवल परिसंपत्तियाँ नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के उपकरण हैं।'

आम जनता और कर्मचारियों पर असर

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है। गौरतलब है कि बैंक के कर्मचारी संगठन भी रणनीतिक बिक्री के विरोध में आवाज़ उठाते रहे हैं। कर्मचारियों की मुख्य चिंता नौकरी की सुरक्षा, वेतन ढाँचे और आरक्षित वर्गों के लिए भर्ती नियमों को लेकर है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह विनिवेश सरकारी राजस्व संग्रह के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि एक मुनाफे में चल रहे बैंक की रणनीतिक बिक्री का औचित्य स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

आगे क्या होगा

आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और अन्य नियामक संस्थाओं की मंज़ूरी पर निर्भर है। सरकार ने अब तक रणनीतिक खरीदार के चयन की अंतिम समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है। यह राजनीतिक बहस आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर और तेज़ होने के संकेत दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और उसका लाभ किसे मिलेगा? सरकार का तर्क है कि पुनर्पूंजीकरण के बाद रणनीतिक साझेदार लाना स्वाभाविक अगला कदम है, लेकिन 95% से 34% तक की हिस्सेदारी गिरावट एक नाटकीय बदलाव है जिसका विस्तृत सार्वजनिक औचित्य अब तक अनुपस्थित है। 'फोन बैंकिंग' का प्रतिआरोप राजनीतिक रूप से धारदार है, पर विनिवेश के वर्तमान गुण-दोष को नहीं बदलता। असली जवाबदेही यह है कि रणनीतिक खरीदार का चयन कितना पारदर्शी होगा और कर्मचारियों के आरक्षण अधिकारों की कानूनी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी — इन प्रश्नों पर दोनों पक्षों की चुप्पी उल्लेखनीय है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीबीआई बैंक विनिवेश क्या है और विवाद क्यों है?
आईडीबीआई बैंक में सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 95% है, जिसे रणनीतिक बिक्री के ज़रिए घटाकर 34% तक लाने की योजना है। विवाद इसलिए है क्योंकि विपक्ष का कहना है कि मुनाफे में चल रहे बैंक को बेचना अनुचित है, जबकि सरकार इसे दीर्घकालिक सुधार का हिस्सा बताती है।
निर्मला सीतारमण ने राहुल गांधी के आरोपों का क्या जवाब दिया?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि एनडीए सरकार ने ₹25,000 करोड़ से अधिक के पुनर्पूंजीकरण और पेशेवर प्रबंधन से आईडीबीआई बैंक को संकट से उबारा। उन्होंने कांग्रेस काल में राजनीतिक दबाव में दिए गए ऋणों और एनपीए की समस्या का भी उल्लेख किया।
राहुल गांधी ने आईडीबीआई विनिवेश का विरोध क्यों किया?
राहुल गांधी ने कहा कि बैंक अब ₹9,000 करोड़ से अधिक का सालाना मुनाफा कमा रहा है और इसका श्रेय बैंक कर्मचारियों को जाता है। उन्होंने आशंका जताई कि निजीकरण के बाद SC/ST/OBC आरक्षण और कर्मचारियों की सेवा शर्तें प्रभावित हो सकती हैं।
आईडीबीआई बैंक में LIC की क्या भूमिका है?
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) आईडीबीआई बैंक का एक प्रमुख सरकारी हिस्सेदार है। राहुल गांधी के अनुसार, सरकार और LIC मिलकर फिलहाल बैंक की लगभग 95% हिस्सेदारी रखते हैं, जो प्रस्तावित विनिवेश के बाद 34% रह जाएगी।
आईडीबीआई बैंक विनिवेश की प्रक्रिया अभी किस चरण में है?
विनिवेश प्रक्रिया RBI और अन्य नियामक संस्थाओं की मंज़ूरी पर निर्भर है और अब तक रणनीतिक खरीदार के चयन की अंतिम समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। यह प्रक्रिया काफी समय से लंबित बताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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