30 अक्टूबर 2026
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आईडीबीआई बैंक विनिवेश पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- सरकारी बैंक बेचने की वस्तु नहीं

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आईडीबीआई बैंक विनिवेश पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- सरकारी बैंक बेचने की वस्तु नहीं

सारांश

राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक को फेयरफैक्स को बेचने के फैसले को जनता से विश्वासघात बताया — वह बैंक जिसने सात साल में घाटे से ₹9,000 करोड़ के मुनाफे तक का सफर तय किया। 95% सरकारी हिस्सेदारी घटकर 34% होने और SC/ST/OBC आरक्षण खत्म होने की चेतावनी के साथ यह विवाद अब संसद से सड़क तक पहुँचने की ओर है।

मुख्य बातें

राहुल गांधी ने 30 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक को कनाडा की फेयरफैक्स को बेचने के केंद्र सरकार के फैसले की कड़ी आलोचना की।
फिलहाल सरकार और LIC की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 95% ; विनिवेश के बाद यह घटकर लगभग 34% रह जाएगी।
आईडीबीआई बैंक ने पिछले वर्ष ₹9,000 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया — सात साल पहले बैंक घाटे में था।
राहुल ने 2003 में संसद में दिए सरकारी आश्वासन की याद दिलाई, जिसमें 51% सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखने का वादा था।
निजीकरण से SC, ST, OBC कर्मचारियों के आरक्षण और सेवा शर्तों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई।
केंद्र सरकार ने अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने 30 अक्टूबर 2026 को आईडीबीआई बैंक की हिस्सेदारी कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को बेचने के केंद्र सरकार के फैसले पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार कांग्रेस के कार्यकाल में स्थापित सार्वजनिक संस्थाओं को एक-एक कर बेच रही है। इसी के साथ उन्होंने बैंक कर्मचारियों के साथ अपनी एकजुटता का ऐलान किया।

एक्स पर राहुल का सीधा वार

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'कांग्रेस के समय आईडीबीआई को देश के उद्योग को बनाने के लिए स्थापित किया गया था। पीएम मोदी के समय पहले बोली लगी, फिर दाम तय हुआ। कांग्रेस के समय बैंक बनाए जा रहे थे, पीएम मोदी के समय बेचे जा रहे हैं। मैं आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के साथ खड़ा हूँ।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब विनिवेश प्रक्रिया अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।

कर्मचारियों को लिखी भावनात्मक चिट्ठी

राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक के कर्मचारियों के नाम एक खुला पत्र भी लिखा। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल मार्च में संसद भवन में कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल से उनकी मुलाकात हुई थी, जहाँ उन्होंने सरकार से सवाल किया था कि एक मुनाफे वाले बैंक को क्यों बेचा जा रहा है।

उन्होंने पत्र में लिखा, 'आपने मुझसे एक सीधा सवाल पूछा था कि सरकार उस बैंक को क्यों बेच रही है, जिसे आपने मुनाफे में लाया है? मैं आपका सवाल लोकसभा में लेकर गया। मैंने पूछा कि एक मुनाफे वाले सरकारी बैंक को क्यों बेचा जा रहा है और उसके कर्मचारियों और जमाकर्ताओं की सुरक्षा कैसे होगी? सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया।'

घाटे से मुनाफे तक का सफर, फिर भी बिक्री

राहुल गांधी ने कहा कि सात साल पहले आईडीबीआई बैंक घाटे में था, लेकिन कर्मचारियों की मेहनत से बैंक ने पिछले वर्ष ₹9,000 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया। गौरतलब है कि फिलहाल केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की संयुक्त हिस्सेदारी बैंक में करीब 95 प्रतिशत है, जो विनिवेश के बाद घटकर करीब 34 प्रतिशत रह जाएगी।

उन्होंने 2003 में संसद में सरकार द्वारा दिए गए उस आश्वासन की भी याद दिलाई, जिसमें कहा गया था कि आईडीबीआई बैंक में सरकारी हिस्सेदारी कम से कम 51 प्रतिशत बनाए रखी जाएगी। उनके अनुसार, यह जनता से किया गया वादा था जिसे तोड़ा जा रहा है।

आरक्षण और सेवा शर्तों पर चिंता

राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि इस निजीकरण से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के कर्मचारियों के लिए आरक्षण प्रावधान समाप्त हो सकते हैं। साथ ही, कर्मचारियों की सेवा शर्तों पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका उन्होंने जताई। आलोचकों का कहना है कि सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण में यह सामाजिक न्याय का पहलू अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाता है।

केंद्र की चुप्पी और आगे की राह

राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस एक मजबूत सार्वजनिक क्षेत्र में विश्वास रखती है, जो निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम करे। उन्होंने कहा, 'सरकारी बैंक बेचने की संपत्ति नहीं हैं, वे देश बनाने के औजार हैं।' अभी तक केंद्र सरकार ने इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। बैंक कर्मचारी संगठनों ने भी इस विनिवेश के विरोध में आंदोलन तेज़ करने के संकेत दिए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

और SC/ST/OBC कर्मचारियों के आरक्षण की सुरक्षा के लिए कोई कानूनी ढाँचा है या नहीं — यह पहलू मुख्यधारा की कवरेज में प्रायः अनदेखा रह जाता है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईडीबीआई बैंक विनिवेश विवाद क्या है?
केंद्र सरकार आईडीबीआई बैंक में अपनी और LIC की संयुक्त करीब 95% हिस्सेदारी को घटाकर लगभग 34% करने की प्रक्रिया में है, जिसके तहत कनाडा की कंपनी फेयरफैक्स को हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया गया है। विपक्ष का आरोप है कि यह एक मुनाफे वाले सार्वजनिक बैंक की अनावश्यक बिक्री है।
राहुल गांधी ने आईडीबीआई बैंक बिक्री पर क्या कहा?
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट और कर्मचारियों को लिखे पत्र में कहा कि सरकारी बैंक बेचने की संपत्ति नहीं, बल्कि देश बनाने के औजार हैं। उन्होंने कहा कि जिस बैंक ने पिछले साल ₹9,000 करोड़ से अधिक का मुनाफा कमाया, उसे बेचना जनता से विश्वासघात है।
आईडीबीआई बैंक बिक्री से कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?
राहुल गांधी ने चेतावनी दी है कि निजीकरण के बाद SC, ST और OBC कर्मचारियों के लिए आरक्षण प्रावधान समाप्त हो सकते हैं और सेवा शर्तों में बदलाव हो सकता है। बैंक कर्मचारी संगठन पहले से ही इस बिक्री के विरोध में आंदोलनरत हैं।
2003 का संसदीय आश्वासन क्या था जिसका राहुल गांधी ने ज़िक्र किया?
2003 में सरकार ने संसद में यह आश्वासन दिया था कि आईडीबीआई बैंक में सरकारी हिस्सेदारी कम से कम 51% बनाए रखी जाएगी। राहुल गांधी का कहना है कि प्रस्तावित विनिवेश इस वादे का सीधा उल्लंघन है।
आईडीबीआई बैंक की वित्तीय स्थिति अभी कैसी है?
आईडीबीआई बैंक ने पिछले वर्ष ₹9,000 करोड़ से अधिक का शुद्ध मुनाफा कमाया, जबकि सात साल पहले बैंक घाटे में था। यह बदलाव कर्मचारियों के प्रयासों और बैंक के डेवलपमेंट बैंक से कमर्शियल बैंक में रूपांतरण का नतीजा माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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