राहुल गांधी 2029 की हार से डरे हुए हैं, पहले से बहाने गढ़ रहे हैं: भाजपा तमिलनाडु
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की तमिलनाडु इकाई के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने बुधवार, 2 सितंबर को कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपनी आने वाली हार का पूरा अहसास है और वे 2029 के लोकसभा चुनावों में संभावित पराजय के लिए अभी से बहाने तैयार कर रहे हैं। तिरुपति ने यह प्रतिक्रिया महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राहुल गांधी की टिप्पणियों के संदर्भ में दी।
विवाद की पृष्ठभूमि
महाराष्ट्र में SIR के दौरान मसौदा मतदाता सूची में 9.78 करोड़ में से 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बाद, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि भाजपा और जिसे उन्होंने 'वोट चोरी आयोग' कहा, वे अपनी रणनीति बदलते रहते हैं और 'किसी भी कीमत पर भाजपा की जीत' सुनिश्चित करने की कोशिश करते हैं। इस बयान पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
भाजपा प्रवक्ता का पलटवार
नारायणन तिरुपति ने कहा, 'राहुल गांधी जानते हैं कि उनकी हार निश्चित है। इसलिए वे चाहे जो कहें। जहाँ तक SIR का सवाल है, वे अदालत गए हैं। लेकिन अदालत ने साफ तौर पर कहा है कि चुनाव आयोग जो कर रहा है, वह सही है।' उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष की आलोचना का एकमात्र उद्देश्य अपनी संभावित हार के लिए पहले से जमीन तैयार करना है।
चुनाव आयोग के बचाव में
तिरुपति ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) का पुरजोर बचाव करते हुए कहा कि मतदाता सूचियों की सटीकता सुनिश्चित करना एक अनिवार्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों के दो या तीन वोट हैं, या कई वोट हैं, या जो मृत हैं, या जिन्होंने अपना स्थान बदल लिया है — उन सभी के नाम निश्चित रूप से हटाए जाने चाहिए। इसका विरोध करने के बजाय स्वागत किया जाना चाहिए।' उन्होंने इसे 'बहुत बड़ा सुधार' करार दिया।
नोएडा-दिल्ली बस दुष्कर्म पर प्रतिक्रिया
नोएडा-दिल्ली बस दुष्कर्म मामले पर प्रवक्ता ने इस घटना को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताया और दोषियों को तत्काल कड़ी सजा देने की माँग की। उन्होंने कहा, 'सजा इतनी कड़ी होनी चाहिए कि भारत में कहीं भी ऐसी घटनाएँ न हों।'
मेट्टूर बाँध पर सवाल
मेट्टूर बाँध को खोले जाने पर तिरुपति ने राज्य सरकार द्वारा एक नियमित प्रक्रिया के इर्द-गिर्द किए गए राजनीतिक आयोजन और उस पर हुए अनावश्यक व्यय की आलोचना की। आलोचकों का कहना है कि यह मुद्दा तमिलनाडु में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। 2029 के चुनावों से पहले यह बयानबाजी आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।