आईएमएफ का अगला डिप्टी MD होगा चीनी नागरिक: लियाओ मिन को 1 दिसंबर से नियुक्ति का प्रस्ताव
सारांश
मुख्य बातें
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने चीन के उप वित्त मंत्री लियाओ मिन को अपना अगला डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर (उप प्रबंध निदेशक) नियुक्त करने का प्रस्ताव रखा है। 29 अक्टूबर 2026 को आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने घोषणा की कि लियाओ मिन 1 दिसंबर 2026 से इस पद को संभालेंगे। वह मौजूदा डिप्टी एमडी बो ली का स्थान लेंगे, जो 30 नवंबर 2026 को अपना कार्यकाल पूरा कर पद छोड़ेंगे।
लियाओ मिन का परिचय और अनुभव
लियाओ मिन मई 2018 से चीन के उप वित्त मंत्री के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वह 2023 तक सेंट्रल फाइनेंशियल एंड इकोनॉमिक अफेयर्स कमीशन कार्यालय में उप मंत्री की भूमिका में भी रहे। 2023 से वह मौद्रिक नीति समिति के सदस्य हैं।
अपने करियर की शुरुआत उन्होंने पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना, चाइना एवरब्राइट ग्रुप और बैंक ऑफ चाइना से की। बाद में चाइना बैंकिंग रेगुलेटरी कमीशन में कई महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ निभाईं, जिनमें शंघाई ब्यूरो के महानिदेशक का पद भी शामिल है। उनके पास पेकिंग विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री है।
जॉर्जीवा ने क्यों चुना लियाओ मिन को
जॉर्जीवा ने कहा कि लियाओ मिन बैंकिंग, वित्तीय नियमन और व्यापक आर्थिक (मैक्रो इकोनॉमिक) प्रशासन के क्षेत्र में तीन दशकों से अधिक का अनुभव रखने वाले सम्मानित नीति-निर्माता हैं। उन्होंने कहा, 'लियाओ वैश्विक आर्थिक नीति समन्वय और द्विपक्षीय तथा बहुपक्षीय वित्तीय, राजकोषीय और व्यापारिक सहयोग में सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। घरेलू सुधारों और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग के संगम पर उनका अनुभव आईएमएफ और इसके सदस्य देशों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।'
बो ली का योगदान और विदाई
जॉर्जीवा ने निवर्तमान डिप्टी एमडी बो ली के कार्यकाल की भी सराहना की। अगस्त 2021 में वरिष्ठ प्रबंधन टीम में शामिल होने के बाद बो ली ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में आईएमएफ का मार्गदर्शन किया। डिप्टी एमडी के रूप में वह लगभग 90 सदस्य देशों से जुड़े आईएमएफ के कार्यों की देखरेख कर रहे थे। उन्होंने डिजिटल मुद्रा, सीमा-पार भुगतान, स्टेबलकॉइन नियमन, जी20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत ऋण पुनर्गठन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़े आईएमएफ के कार्यों का नेतृत्व किया।
आईएमएफ में चीन का बढ़ता प्रभाव और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंता
गौरतलब है कि यह पद एक दशक से भी अधिक समय से किसी चीनी नागरिक के पास रहा है, जो आईएमएफ में चीन की बड़ी हिस्सेदारी और प्रभाव को दर्शाता है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हो रही है जब भारत समेत कई उभरती अर्थव्यवस्थाएँ कोटा सुधारों के ज़रिए आईएमएफ में अपनी अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व की माँग कर रही हैं। आलोचकों का कहना है कि वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व का संतुलन अभी भी पश्चिमी और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के पक्ष में झुका हुआ है। यह नियुक्ति उस बहस को और तेज़ कर सकती है।