एनीमिया से बचाव के लिए WHO की सलाह: डाइट में शामिल करें आयरन, विटामिन B12 और फोलेट
सारांश
मुख्य बातें
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एनीमिया यानी शरीर में खून की कमी से बचाव के लिए आहार संबंधी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश साझा किए हैं। संगठन के अनुसार, आयरन, फोलेट, विटामिन ए और विटामिन बी12 से भरपूर खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से डाइट में शामिल करने से एनीमिया के कई प्रकारों से बचाव संभव है। थकान, चक्कर आना और सांस फूलना जैसे लक्षण शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी की ओर संकेत कर सकते हैं।
एनीमिया क्या है और यह क्यों होता है
एनीमिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में हीमोग्लोबिन या लाल रक्त कोशिकाओं की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँच पाती, जिससे रोजमर्रा के कामकाज में कठिनाई हो सकती है। WHO के अनुसार, एनीमिया के पीछे केवल खानपान की कमी नहीं, बल्कि रक्तस्राव, पोषक तत्वों का अवशोषण न होना या अन्य स्वास्थ्य समस्याएँ भी हो सकती हैं।
आयरन और विटामिन सी: जरूरी जोड़ी
आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए अनिवार्य पोषक तत्व है। शाकाहारी लोगों के लिए दालें, राजमा, छोले, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्जियाँ आयरन के प्रमुख स्रोत हैं। मांसाहारी लोग लीन रेड मीट और मछली से भी आयरन प्राप्त कर सकते हैं।
गौरतलब है कि शरीर में आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन सी की उपस्थिति आवश्यक है। संतरा, नींबू, अमरूद और आँवला जैसे फल विटामिन सी के अच्छे स्रोत हैं। उदाहरण के तौर पर, दाल या हरी सब्जी के साथ नींबू का रस मिलाने से आयरन अवशोषण में उल्लेखनीय सुधार होता है।
हरी सब्जियाँ और विटामिन ए का महत्व
पालक, मेथी और सरसों जैसी गहरी हरी पत्तेदार सब्जियाँ फोलेट का समृद्ध स्रोत हैं, जो लाल रक्त कोशिकाओं के सही निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा, गाजर, कद्दू और शकरकंद जैसी नारंगी-पीले रंग की सब्जियाँ विटामिन ए की आपूर्ति करती हैं, जो लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को सहायता देता है।
विटामिन बी12 और फोलेट की भूमिका
विटामिन बी12 और फोलेट दोनों मिलकर शरीर में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण सुनिश्चित करते हैं। मछली, पोल्ट्री और अन्य पशु-आधारित खाद्य पदार्थ विटामिन बी12 के प्रमुख स्रोत हैं। वहीं, दालें, बीन्स और हरी पत्तेदार सब्जियाँ फोलेट की पर्याप्त मात्रा प्रदान करती हैं।
डॉक्टर से कब मिलें
WHO की सलाह के अनुसार, यदि लगातार थकान, चक्कर, सांस फूलना या असामान्य कमजोरी जैसी समस्याएँ बनी रहें, तो इन्हें केवल तनाव या व्यस्त दिनचर्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चिकित्सक की सलाह पर हीमोग्लोबिन परीक्षण करवाना जरूरी है। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार संभव है — क्योंकि एनीमिया के हर मामले में सिर्फ खानपान में बदलाव पर्याप्त नहीं होता।