आयरन की कमी और एनीमिया का खतरा: थकान, सांस फूलना जैसे लक्षणों को न करें नज़रअंदाज़
सारांश
मुख्य बातें
शरीर में आयरन की कमी एक ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है और लंबे समय तक अनदेखी रहने पर एनीमिया का कारण बन सकती है। मुंबई के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कमज़ोरी, चक्कर आना और सांस फूलने जैसी शिकायतें जिन्हें लोग अक्सर थकान या अधिक काम का नतीजा मान लेते हैं, वे वास्तव में शरीर में इस ज़रूरी पोषक तत्व की कमी के संकेत हो सकते हैं।
आयरन शरीर के लिए क्यों ज़रूरी है
आयरन रक्त में हीमोग्लोबिन के निर्माण के लिए अनिवार्य तत्व है। हीमोग्लोबिन वह प्रोटीन है जो फेफड़ों से ऑक्सीजन ग्रहण कर शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचाता है। जब शरीर में आयरन की मात्रा घटती है, तो हीमोग्लोबिन का स्तर भी गिरने लगता है, जिससे अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। यही स्थिति लगातार बनी रहे तो आयरन-डेफिशिएंसी एनीमिया विकसित हो सकता है।
किन्हें है सबसे अधिक खतरा
आयरन की कमी किसी भी आयु वर्ग को प्रभावित कर सकती है, लेकिन कुछ समूहों में जोखिम अधिक होता है। बच्चों और किशोरों में तेज़ शारीरिक विकास के दौरान आयरन की माँग बढ़ जाती है। मासिक धर्म के दौरान अधिक रक्तस्राव वाली महिलाओं में भी यह कमी आम है।
गर्भावस्था के दौरान शरीर को सामान्य से अधिक आयरन की आवश्यकता होती है, क्योंकि माँ और शिशु दोनों की ज़रूरतें पूरी करनी होती हैं। इसके अलावा जिन लोगों के आहार में आयरन युक्त खाद्य पदार्थों की कमी है, या जो पेट व आँत की बीमारियों से ग्रस्त हैं, उनमें भोजन से आयरन का अवशोषण बाधित हो सकता है। बार-बार रक्तदान करने या किसी ऑपरेशन में अधिक रक्त निकलने के बाद भी शरीर में आयरन का स्तर गिर सकता है।
आयरन की कमी के प्रमुख लक्षण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार थकान और कमज़ोरी इस कमी के सबसे सामान्य संकेत हैं — यहाँ तक कि पर्याप्त आराम के बाद भी ऊर्जा का अभाव बना रहता है। चक्कर आना, सिरदर्द, सांस फूलना और किसी काम पर ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई भी इसके लक्षण हो सकते हैं।
शरीर के बाहर भी इसके संकेत दिखाई देते हैं: त्वचा का अत्यधिक पीला पड़ना, बालों का झड़ना, नाखूनों का कमज़ोर होकर टूटना और हाथ-पैरों में ठंडापन बने रहना। हालाँकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि ये लक्षण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी देखे जा सकते हैं, इसलिए स्व-निदान से बचना चाहिए।
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं
चिकित्सकों का कहना है कि यदि थकान, कमज़ोरी, चक्कर या सांस फूलने की शिकायत लंबे समय से बनी हुई है, तो इसे सामान्य मानकर अनदेखा करना उचित नहीं है। रक्त जाँच के ज़रिये हीमोग्लोबिन और सीरम फेरिटिन के स्तर की जाँच कराना ज़रूरी है। बार-बार आयरन की कमी सामने आने पर डॉक्टर की देखरेख में उचित उपचार लेना आवश्यक है।
यह स्थिति ऐसे समय में विशेष ध्यान माँगती है जब भारत में एनीमिया की दर, विशेषकर महिलाओं और बच्चों में, अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। समय पर जाँच और उचित आहार से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।