इन-स्टेप के चौथे संस्करण में उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन का आह्वान: वैश्विक चुनौतियों का हल सामूहिक प्रयास से
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में 'इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक एंगेजमेंट प्रोग्राम' (इन-स्टेप) के चौथे संस्करण के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए निरंतर अंतरराष्ट्रीय संवाद, आपसी सीख और रणनीतिक सहयोग की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि तेज़ी से बदलती वैश्विक सुरक्षा एवं विकास संबंधी चुनौतियों से अकेले कोई भी देश नहीं निपट सकता।
कार्यक्रम का परिचय और भागीदारी
इन-स्टेप का यह चौथा संस्करण 22 देशों के 25 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों सहित कुल 38 प्रतिभागियों की भागीदारी के साथ आयोजित हुआ। इसमें श्रीलंका, मॉरिशस, मालदीव, ओमान, फिलीपींस, थाईलैंड, ब्राज़ील, अर्जेंटीना, चिली, गुयाना, आर्मेनिया, किर्गिस्तान, उज़्बेकिस्तान, कतर, म्यांमार, मंगोलिया, पालाउ, सेशेल्स और अन्य देशों के वरिष्ठ पेशेवर एवं नेता सम्मिलित हुए।
राधाकृष्णन ने विशेष रूप से 'ग्लोबल साउथ' के देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति को रेखांकित किया और इसे भारत की G20 अध्यक्षता की भावना की निरंतरता बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम उस स्थायी मंच की परिकल्पना को साकार करता है जिसकी चाहत भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान व्यक्त की गई थी।
बदलते रणनीतिक माहौल पर चिंतन
उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि आज का रणनीतिक परिदृश्य बहुआयामी हो चुका है — पारंपरिक सुरक्षा चिंताएँ अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबरस्पेस, ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक मज़बूती, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी चुनौतियों के साथ अटूट रूप से जुड़ गई हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर एकपक्षीय नीतियों की प्रवृत्ति बढ़ रही है और बहुपक्षीय मंचों की प्रभावशीलता पर बहस तेज़ है। राधाकृष्णन का यह संदेश उस संदर्भ में विशेष महत्त्व रखता है।
तीन मूल सिद्धांत
राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में तीन मूल सिद्धांत प्रतिपादित किए — 'वैश्विक स्तर पर सोचें, रणनीतिक रूप से जुड़ें और एकजुट होकर काम करें।' उनका मानना है कि साझा चुनौतियों का समाधान सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयासों के ज़रिये ही अधिक प्रभावी ढंग से संभव है।
उन्होंने 'वसुधैव कुटुंबकम' की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा कि तकनीकी प्रगति और वैज्ञानिक खोजों का लाभ संपूर्ण मानवता को मिलना चाहिए। इस संदर्भ में उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान 'वैक्सीन मैत्री' पहल के अंतर्गत विकासशील देशों को भारत की ओर से की गई सहायता का भी उल्लेख किया।
भ्रष्टाचार और सुशासन पर ज़ोर
उपराष्ट्रपति ने भ्रष्टाचार को विकासशील देशों के समक्ष एक बड़ी और सतत चुनौती बताया। उन्होंने प्रतिभागियों से हर स्तर पर भ्रष्टाचार-मुक्त व्यवस्था के निर्माण की दिशा में काम करने का आग्रह किया तथा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और पारदर्शिता के महत्त्व को रेखांकित किया।
गौरतलब है कि इन-स्टेप के पिछले तीन संस्करण मार्च 2024, अक्टूबर 2024 और अक्टूबर-नवंबर 2025 में आयोजित किए जा चुके हैं। इस दो-सप्ताहीय कार्यक्रम का आयोजन विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय ने नेशनल डिफेंस कॉलेज के सहयोग से किया है।
आगे की राह
राधाकृष्णन ने आशा व्यक्त की कि इस कार्यक्रम में हुई चर्चाओं से भाग लेने वाले देशों के बीच मज़बूत पेशेवर रिश्ते विकसित होंगे और रणनीतिक समझ गहरी होगी। इन-स्टेप जैसे मंच, जो 'ग्लोबल साउथ' के देशों को एक छत के नीचे लाते हैं, आने वाले समय में भारत की विदेश नीति के केंद्रीय स्तंभ बन सकते हैं।