8 अक्टूबर 2026
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एआई नियमन पर अगले महीने परामर्श पत्र जारी करेगी सरकार, डीपफेक पर रहेगा विशेष फोकस: अश्विनी वैष्णव

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एआई नियमन पर अगले महीने परामर्श पत्र जारी करेगी सरकार, डीपफेक पर रहेगा विशेष फोकस: अश्विनी वैष्णव

सारांश

भारत सरकार नवंबर 2026 में एआई नियमन पर परामर्श पत्र लाने जा रही है — और केंद्र में है डीपफेक का बढ़ता खतरा। मंत्री वैष्णव का 'टेक्नो-लीगल समाधान' वाला फॉर्मूला संकेत देता है कि भारत केवल कानूनी रास्ते से नहीं, तकनीक और नीति के संयोजन से एआई को नियंत्रित करना चाहता है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि सरकार नवंबर 2026 में एआई नियमन पर परामर्श पत्र जारी करेगी।
परामर्श पत्र का प्राथमिक फोकस डीपफेक खतरे और एआई के सुरक्षित उपयोग पर होगा।
मंत्री ने 'टेक्नो-लीगल समाधान' की आवश्यकता पर जोर दिया — केवल कानून नहीं, तकनीक और नियमन का संयोजन।
सरकार इस वर्ष पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है, जिसमें डीपफेक और एल्गोरिदमिक पक्षपात को प्रमुख जोखिम माना गया है।
इंडियाएआई मिशन के तहत डीपफेक पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित एआई और जोखिम मूल्यांकन परियोजनाओं पर काम जारी है।
एआई गवर्नेंस ग्रुप, एक्सपर्ट कमिटी और एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित करने का प्रस्ताव है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि केंद्र सरकार नवंबर 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नियमन पर एक औपचारिक परामर्श पत्र जारी करेगी, जिसमें डीपफेक के बढ़ते खतरे और एआई के सुरक्षित उपयोग को केंद्र में रखा जाएगा। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह चर्चा पत्र केवल कानूनी नियमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कौशल विकास, समावेशी तकनीकी विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे व्यापक पहलू भी शामिल होंगे।

मुख्य घोषणा और उद्देश्य

मंत्री वैष्णव ने कहा कि वह अपने विभाग से अनुरोध करेंगे कि एआई नियमन पर ऐसा चर्चा पत्र तैयार किया जाए जिसका प्रमुख आधार सुरक्षा हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के उपयोग से जुड़ा सबसे संवेदनशील मुद्दा सुरक्षा है और इसे प्राथमिकता के साथ संबोधित करना अनिवार्य है। उन्होंने इस प्रक्रिया में उद्योग जगत, नीति विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को भी ज़रूरी बताया।

डीपफेक खतरे पर सरकार की चिंता

वैष्णव ने कहा, 'डीपफेक एक बड़ी समस्या बन चुका है और यह समाज में गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है। लोग अक्सर डीपफेक सामग्री को सच मान लेते हैं, जिससे गलत धारणाएं बनती हैं और लोग भ्रामक जानकारी के आधार पर निर्णय लेने लगते हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता — इसके लिए 'टेक्नो-लीगल समाधान' विकसित करने होंगे, जो तकनीक और नियमन दोनों का समन्वित संयोजन हों।

इंडिया एआई गवर्नेंस: अब तक की प्रगति

गौरतलब है कि सरकार इस वर्ष पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है, जो विश्वसनीयता, मानव-केंद्रित प्रशासन और जिम्मेदार एआई नवाचार के सिद्धांतों पर आधारित हैं। इन दिशा-निर्देशों में भ्रामक सूचना, डीपफेक, एल्गोरिदमिक पक्षपात और एआई से उत्पन्न संभावित सामाजिक नुकसान को प्रमुख जोखिमों के रूप में चिन्हित किया गया है। साथ ही एआई से जुड़ी कानूनी खामियों की पहचान करने, डेटा संरक्षण, कॉपीराइट, कंटेंट प्रमाणीकरण और जनरेटिव एआई के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की समीक्षा की भी सिफारिश की गई है।

संस्थागत ढाँचा और इंडियाएआई मिशन

प्रस्तावित नीतिगत ढाँचे में एआई गवर्नेंस ग्रुप, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी तथा एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके अतिरिक्त, सरकार इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत 'सुरक्षित और भरोसेमंद एआई' पहल पर काम कर रही है, जिसके तहत डीपफेक पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित एआई, एल्गोरिदमिक पक्षपात में कमी और एआई जोखिम मूल्यांकन से जुड़े कई परियोजनाओं पर कार्य जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर यूरोपीय संघ के एआई एक्ट और अमेरिकी नियामक बहसों के बीच भारत के अपने नीतिगत रुख को स्पष्ट करने की माँग बढ़ रही है।

उद्योग की जिम्मेदारी और आगे की राह

वैष्णव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एआई से जुड़े जोखिमों, साइबर हमलों और डीपफेक जैसी चुनौतियों का सामना करने में उद्योग जगत को प्राथमिक जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने यह भी जोर दिया कि एआई नियामक ढाँचे में मानव हित सर्वोपरि होना चाहिए और तकनीकी विस्तार के दौरान कोई भी वर्ग हाशिए पर न रहे। प्रस्तावित परामर्श पत्र के बाद व्यापक सार्वजनिक और उद्योग परामर्श अपेक्षित है, जो भारत की पहली बाध्यकारी एआई नियामक नीति की नींव रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि परामर्श पत्र कब बाध्यकारी नीति में बदलेगा — भारत में परामर्श प्रक्रियाएं अक्सर दस्तावेज़ी औपचारिकता बनकर रह जाती हैं। इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स पहले से मौजूद हैं, फिर भी डीपफेक की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं — जो सुझाता है कि समस्या दिशा-निर्देशों की नहीं, प्रवर्तन तंत्र की है। यूरोपीय संघ का एआई एक्ट लागू हो चुका है और अमेरिका में नियामक बहस तेज है — ऐसे में भारत का विलंब वैश्विक एआई मानक-निर्धारण में उसकी भूमिका को कमज़ोर कर सकता है। उद्योग पर 'प्राथमिक जिम्मेदारी' डालना तभी कारगर होगा जब उसके साथ स्पष्ट जवाबदेही ढाँचा और दंड प्रावधान भी जुड़े हों।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत सरकार का एआई नियमन परामर्श पत्र क्या होगा?
यह केंद्र सरकार द्वारा नवंबर 2026 में जारी किया जाने वाला चर्चा पत्र है, जिसमें डीपफेक खतरे, एआई सुरक्षा, कौशल विकास और समावेशी तकनीकी विकास पर नीतिगत सुझाव माँगे जाएंगे। यह भारत की संभावित बाध्यकारी एआई नीति की नींव रख सकता है।
डीपफेक क्या है और यह इतना खतरनाक क्यों है?
डीपफेक एआई तकनीक से बनाई गई ऐसी नकली ऑडियो-वीडियो सामग्री है जो वास्तविक लगती है। मंत्री वैष्णव के अनुसार, लोग इसे सच मान लेते हैं, जिससे गलत धारणाएं बनती हैं और भ्रामक जानकारी के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं — जो सामाजिक और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के लिए गंभीर खतरा है।
इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स पहले से हैं तो नए परामर्श पत्र की क्या ज़रूरत है?
सरकार इस वर्ष पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है, जो सलाहकारी प्रकृति की हैं। नया परामर्श पत्र इन्हें एक व्यापक, बाध्यकारी नियामक ढाँचे में बदलने की दिशा में अगला कदम है, जिसमें उद्योग और विशेषज्ञों की राय शामिल की जाएगी।
'टेक्नो-लीगल समाधान' से मंत्री का क्या आशय है?
अश्विनी वैष्णव के अनुसार एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीकी उपाय — जैसे डीपफेक पहचान प्रणाली — और कानूनी नियमन दोनों का एक साथ उपयोग आवश्यक है, जिसे वे 'टेक्नो-लीगल समाधान' कहते हैं।
इंडियाएआई मिशन के तहत अभी कौन-से काम हो रहे हैं?
इंडियाएआई मिशन के 'सुरक्षित और भरोसेमंद एआई' पहल के अंतर्गत डीपफेक पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित एआई विकास, एल्गोरिदमिक पक्षपात को कम करने और एआई जोखिम मूल्यांकन से जुड़े कई प्रोजेक्ट सक्रिय हैं। इसके साथ ही एआई गवर्नेंस ग्रुप और एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थाएं स्थापित करने का प्रस्ताव भी है।
राष्ट्र प्रेस
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