एआई नियमन पर अगले महीने परामर्श पत्र जारी करेगी सरकार, डीपफेक पर रहेगा विशेष फोकस: अश्विनी वैष्णव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को घोषणा की कि केंद्र सरकार नवंबर 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) नियमन पर एक औपचारिक परामर्श पत्र जारी करेगी, जिसमें डीपफेक के बढ़ते खतरे और एआई के सुरक्षित उपयोग को केंद्र में रखा जाएगा। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह चर्चा पत्र केवल कानूनी नियमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कौशल विकास, समावेशी तकनीकी विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसे व्यापक पहलू भी शामिल होंगे।
मुख्य घोषणा और उद्देश्य
मंत्री वैष्णव ने कहा कि वह अपने विभाग से अनुरोध करेंगे कि एआई नियमन पर ऐसा चर्चा पत्र तैयार किया जाए जिसका प्रमुख आधार सुरक्षा हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई के उपयोग से जुड़ा सबसे संवेदनशील मुद्दा सुरक्षा है और इसे प्राथमिकता के साथ संबोधित करना अनिवार्य है। उन्होंने इस प्रक्रिया में उद्योग जगत, नीति विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों की सक्रिय भागीदारी को भी ज़रूरी बताया।
डीपफेक खतरे पर सरकार की चिंता
वैष्णव ने कहा, 'डीपफेक एक बड़ी समस्या बन चुका है और यह समाज में गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है। लोग अक्सर डीपफेक सामग्री को सच मान लेते हैं, जिससे गलत धारणाएं बनती हैं और लोग भ्रामक जानकारी के आधार पर निर्णय लेने लगते हैं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि एआई को केवल कानून बनाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता — इसके लिए 'टेक्नो-लीगल समाधान' विकसित करने होंगे, जो तकनीक और नियमन दोनों का समन्वित संयोजन हों।
इंडिया एआई गवर्नेंस: अब तक की प्रगति
गौरतलब है कि सरकार इस वर्ष पहले ही इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइन्स जारी कर चुकी है, जो विश्वसनीयता, मानव-केंद्रित प्रशासन और जिम्मेदार एआई नवाचार के सिद्धांतों पर आधारित हैं। इन दिशा-निर्देशों में भ्रामक सूचना, डीपफेक, एल्गोरिदमिक पक्षपात और एआई से उत्पन्न संभावित सामाजिक नुकसान को प्रमुख जोखिमों के रूप में चिन्हित किया गया है। साथ ही एआई से जुड़ी कानूनी खामियों की पहचान करने, डेटा संरक्षण, कॉपीराइट, कंटेंट प्रमाणीकरण और जनरेटिव एआई के दुरुपयोग जैसे मुद्दों की समीक्षा की भी सिफारिश की गई है।
संस्थागत ढाँचा और इंडियाएआई मिशन
प्रस्तावित नीतिगत ढाँचे में एआई गवर्नेंस ग्रुप, टेक्नोलॉजी और पॉलिसी एक्सपर्ट कमिटी तथा एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट जैसी संस्थागत व्यवस्थाएं स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसके अतिरिक्त, सरकार इंडियाएआई मिशन के अंतर्गत 'सुरक्षित और भरोसेमंद एआई' पहल पर काम कर रही है, जिसके तहत डीपफेक पहचान, गोपनीयता-सुरक्षित एआई, एल्गोरिदमिक पक्षपात में कमी और एआई जोखिम मूल्यांकन से जुड़े कई परियोजनाओं पर कार्य जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर यूरोपीय संघ के एआई एक्ट और अमेरिकी नियामक बहसों के बीच भारत के अपने नीतिगत रुख को स्पष्ट करने की माँग बढ़ रही है।
उद्योग की जिम्मेदारी और आगे की राह
वैष्णव ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि एआई से जुड़े जोखिमों, साइबर हमलों और डीपफेक जैसी चुनौतियों का सामना करने में उद्योग जगत को प्राथमिक जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने यह भी जोर दिया कि एआई नियामक ढाँचे में मानव हित सर्वोपरि होना चाहिए और तकनीकी विस्तार के दौरान कोई भी वर्ग हाशिए पर न रहे। प्रस्तावित परामर्श पत्र के बाद व्यापक सार्वजनिक और उद्योग परामर्श अपेक्षित है, जो भारत की पहली बाध्यकारी एआई नियामक नीति की नींव रख सकता है।