डॉ. मुरुगन का लोकसभा में ऐलान: इंटरनेट को अश्लील व गैरकानूनी कॉन्टेंट से मुक्त रखना सरकार की प्राथमिकता
सारांश
मुख्य बातें
सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने 5 अगस्त 2026 को लोकसभा में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार भारत के इंटरनेट इकोसिस्टम को गैरकानूनी, अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री से मुक्त रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह जानकारी सांसद प्रभाकर रेड्डी वेमिरेड्डी के एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी। सरकार का लक्ष्य महिलाओं, बच्चों और तमाम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक सुरक्षित, भरोसेमंद और जवाबदेह डिजिटल वातावरण सुनिश्चित करना है।
कानूनी ढाँचा और मध्यस्थों की जिम्मेदारी
डॉ. मुरुगन ने बताया कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश एवं डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 डिजिटल क्षेत्र में हानिकारक सामग्री से निपटने के लिए व्यापक कानूनी आधार प्रदान करते हैं। इन नियमों के अंतर्गत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य मध्यस्थों पर स्पष्ट दायित्व तय किए गए हैं।
आईटी नियम, 2021 के अनुसार कोई भी मध्यस्थ अपने प्लेटफॉर्म पर अश्लील, पोर्नोग्राफिक, बाल यौन शोषण से जुड़ी, बच्चों के लिए हानिकारक, निजता का उल्लंघन करने वाली या किसी भी कानून के विरुद्ध सामग्री को होस्ट, प्रकाशित, प्रसारित या साझा होने की अनुमति नहीं दे सकता। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाली कानूनी छूट खो सकते हैं और उनके विरुद्ध कार्रवाई भी की जा सकती है।
डीपफेक और एआई कॉन्टेंट पर नए नियम
राज्य मंत्री ने बताया कि 10 फरवरी 2026 को सरकार ने आईटी नियमों में संशोधन कर कृत्रिम रूप से तैयार की गई जानकारी, डीपफेक और एआई जनित सामग्री से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए नियामक व्यवस्था को और सुदृढ़ किया। संशोधित नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मध्यस्थों को अश्लील, भ्रामक, प्रतिरूपण करने वाली या बच्चों के लिए हानिकारक एआई जनित सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए उचित तकनीकी उपाय अपनाने होंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डीपफेक से जुड़े मामलों में तेज़ी देखी जा रही है। ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 तथा पॉक्सो अधिनियम, 2012 जैसे कानूनों के तहत संबंधित अपराधों की जानकारी सक्षम अधिकारियों को देनी होगी।
साइबर अपराध रिपोर्टिंग और नागरिक सुविधाएँ
डॉ. मुरुगन ने बताया कि गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के अंतर्गत शुरू किए गए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर नागरिक सभी प्रकार के साइबर अपराधों की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस पोर्टल पर महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध साइबर अपराधों की गुमनाम शिकायत दर्ज कराने की सुविधा भी उपलब्ध है।
'महिला/बाल संबंधित अपराध की रिपोर्ट करें' मॉड्यूल के तहत शिकायतकर्ता अपनी पहचान उजागर किए बिना शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके अलावा NCRP पर 'रिपोर्ट एंड चेक सस्पेक्ट' मॉड्यूल के ज़रिए नागरिक संदिग्ध वेबसाइट यूआरएल, व्हाट्सएप नंबर, टेलीग्राम हैंडल, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, एसएमएस हेडर, सोशल मीडिया यूआरएल और डीपफेक सामग्री की रिपोर्ट कर सकते हैं।
क्षमता निर्माण और वित्तीय सहायता
राज्य मंत्री के अनुसार, सरकार ने 'महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम' योजना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को क्षमता निर्माण के लिए ₹132.93 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की है। इस राशि से साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना, साइबर सलाहकारों की नियुक्ति तथा पुलिसकर्मियों, अभियोजकों और न्यायिक अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
गौरतलब है कि देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में साइबर फोरेंसिक-सह-प्रशिक्षण प्रयोगशालाएँ स्थापित की जा चुकी हैं। अब तक 24,600 से अधिक कानून प्रवर्तन एजेंसियों के कर्मियों, न्यायिक अधिकारियों और लोक अभियोजकों को साइबर अपराध जागरूकता, जाँच और फोरेंसिक से संबंधित प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
युवाओं और महिलाओं में जागरूकता अभियान
I4C ने देशभर में एनसीसी, एनएसएस और नेहरू युवा केंद्र संगठन से जुड़े 2 लाख से अधिक छात्रों को साइबर स्वच्छता का प्रशिक्षण प्रदान किया है। छात्रों और महिलाओं में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए 'किशोरों/शिक्षार्थियों के लिए हैंडबुक' और 'महिला सुरक्षा के लिए साइबर सुरक्षा हैंडबुक' भी जारी की गई हैं। इसके अलावा सरकार 'सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता' परियोजना के माध्यम से सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में मानव संसाधन तैयार करने और आम जनता के बीच साइबर सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने का कार्य जारी रखे हुए है।