भारत में कच्चे तेल का भंडार 72-73 दिन, प्रतुल शाहदेव का बयान
सारांश
Key Takeaways
- भारत में 72-73 दिन का कच्चा तेल भंडार है।
- इथेनॉल एक महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत बन चुका है।
- केंद्र सरकार यूरिया पर भारी सब्सिडी दे रही है।
- भारत 41 देशों से तेल का आयात कर रहा है।
- प्रधानमंत्री की नीति के तहत देश ऊर्जा संकट से निपटने के लिए तैयार है।
रांची, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव, तमिलनाडु और असम में राजनीतिक गतिविधियों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा इथेनॉल प्रोत्साहन, तेल भंडार उपायों और यूरिया सब्सिडी पर जोर दिया।
केंद्र सरकार ने कहा है कि पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने से देश हर साल 4.5 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल का आयात बचा रहा है। पिछले एक दशक में इथेनॉल उत्पादन को बढ़ाकर भारत ने वैश्विक अस्थिरता के बीच ऊर्जा स्वावलंबन में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
प्रतुल शाहदेव ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत के दौरान कहा कि प्रधानमंत्री ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि खाड़ी देशों में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न संकट से निपटने के लिए देश पूरी तरह तैयार है। अब भारत 21 देशों की बजाय 41 देशों से तेल का आयात करता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यदि किसी एक देश में संकट आए, तो विकल्प उपलब्ध हैं। उनकी उत्कृष्ट विदेश नीति के कारण भारत के अमेरिका और रूस के साथ अच्छे संबंध हैं। चीन, जापान, इजरायल और ईरान के साथ भी हमारे संबंध मजबूत हैं। इसी कारण से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत के जहाजों को आने की अनुमति मिली थी। अब लगातार वहां से तेल और गैस लाने वाले जहाज आ रहे हैं।
प्रतुल शाहदेव ने कहा, "हमारे देश में अभी भी 72-73 दिनों का कच्चा तेल और परिष्कृत तेल का भंडार है। यह हमारी नीति की महानता को दर्शाता है। हम इस भंडार को और बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। भारत ने इस संकट से खुद को काफी हद तक बचा लिया है। यह प्रधानमंत्री की भविष्य में आने वाली समस्याओं का सामना करने की विस्तृत योजना का एक भाग है।"
भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा, "किसानों की खेती में यूरिया एक महत्वपूर्ण तत्व है। यह एक सहायक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हम इस पर 10 गुना सब्सिडी प्रदान कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमत 3,000 रुपये प्रति बैग है, जबकि हम इसे किसानों को केवल 300 रुपये में दे रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हमारी सरकार हमेशा किसानों के समर्थन में खड़ी है।"
--आईएएनएल
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