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पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की मध्यस्थता: भारत की विफलता का संकेत, इमरान मसूद का बयान

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पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की मध्यस्थता: भारत की विफलता का संकेत, इमरान मसूद का बयान

सारांश

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह भारत की विफलता है। इसके साथ ही भारतीय जहाजों के सुरक्षित निकलने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

पाकिस्तान की मध्यस्थता भारत की विफलता को दर्शाती है।
इमरान मसूद ने सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए।
नीतीश कुमार के इस्तीफे पर तंज किया गया।
नक्सलवाद के खात्मे की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया।

नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने पश्चिम एशिया में जारी युद्ध में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि पाकिस्तान इस भूमिका में आता है, तो यह भारत की विफलता मानी जाएगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारतीय जहाजों का होर्मुज से सुरक्षित निकलना सरकार की असफलता का संकेत है।

इमरान मसूद ने सोमवार को राष्ट्र प्रेस से बातचीत में कहा, "यदि पाकिस्तान इस भूमिका को निभाता है, तो यह हमारी विफलता होगी। यह कार्य भारत का था। भारत इस भूमिका में रह सकता था यदि हमारे प्रधानमंत्री जी ने बेंजामिन नेतन्याहू का मेडल नहीं पहना होता।"

उन्होंने आगे कहा, "हम एकतरफा खड़े हो गए हैं। यह कार्य हमारा नहीं था। हम गुटनिरपेक्ष थे। यदि आपने एक पक्ष का समर्थन किया है, तो उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं। आपने ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या पर एक शब्द नहीं कहा। इसके लिए देश अब परिणाम भुगत रहा है, और आगे भी भुगतेगा।"

कांग्रेस सांसद ने भारतीय जहाजों के होर्मुज से सुरक्षित निकलने पर कहा, "सरकार का इसमें क्या योगदान है? ईरान कह रहा है कि 'मैं भारत के साथ हूं, लेकिन भारतीयों के लिए यह रास्ता दे रहा हूं।' इसमें आपका क्या बड़ा काम है? हमारे जहाज बिना किसी समस्या के निकलते हैं। यदि आपने सही निर्णय लिया होता तो हमारे सभी जहाज निकलते।"

इमरान मसूद ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विधान परिषद से इस्तीफे पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "नीतीश कुमार दिल्ली आकर क्या करेंगे? क्या वह वहां प्रधानमंत्री बन जाएंगे? दिल्ली में 200 सदस्य हैं, और वह उनमें से एक होंगे और पीछे बैठ जाएंगे।"

भाजपा सरकार में नक्सलवाद के खात्मे पर इमरान मसूद ने कहा, "हर चीज की एक समय सीमा होती है। नक्सलवाद को 50 साल हो गए हैं, उसे खत्म होना ही था। राज्य के साथ नहीं लड़ा जा सकता। यह एक प्रक्रिया थी, जो अब समाप्त हो गई है।"

संपादकीय दृष्टिकोण

जो न केवल भारत की विदेश नीति को प्रभावित करता है, बल्कि क्षेत्रीय संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इमरान मसूद ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान मध्यस्थता करता है, तो यह भारत की विफलता होगी।
कांग्रेस सांसद ने भारतीय जहाजों के सुरक्षित निकलने पर क्या टिप्पणी की?
उन्होंने कहा कि इसमें सरकार का कोई बड़ा योगदान नहीं है और भारतीय जहाजों का निकलना सामान्य प्रक्रिया है।
नीतीश कुमार के इस्तीफे पर इमरान मसूद की क्या राय है?
उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार दिल्ली आकर प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हैं।
इमरान मसूद ने नक्सलवाद के खात्मे पर क्या कहा?
उन्होंने बताया कि नक्सलवाद को 50 वर्षों बाद खत्म होना ही था।
पश्चिम एशिया में युद्ध का भारत पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
यह भारत की विदेश नीति और क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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