भारत इटली साझेदारी में अभूतपूर्व प्रगति: राजदूत बार्तोली, 2029 तक ₹1.68 लाख करोड़ व्यापार का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
इटली के राजदूत एंटोनियो बार्तोली ने 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि भारत और इटली के बीच परिणामोन्मुख विशेष रणनीतिक साझेदारी में अभूतपूर्व गति आई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच व्यक्तिगत तालमेल को इस प्रगति का एक अहम कारक बताया।
मुख्य घटनाक्रम
बार्तोली एनडीटीवी वर्ल्ड समिट के सत्र 'द वेस्ट, रीवायर्ड: द न्यू ट्रांसअटलांटिक ऑर्डर' में बोल रहे थे। इस सत्र में यूरोपीय संघ के राजदूत जीन एरिक पकेट, ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन और जर्मनी के राजदूत जैस्पर वीक भी उपस्थित थे।
राजदूत ने स्पष्ट किया कि नेताओं के बीच अच्छा तालमेल जरूरी है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं — दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों का परस्पर मेल होना भी उतना ही आवश्यक है।
व्यापार और औद्योगिक सहयोग
बार्तोली ने बताया कि दोनों देशों ने वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, "भारत अपने विनिर्माण आधार को मजबूत करना चाहता है, जबकि इटली यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी औद्योगिक शक्ति है — इसलिए सहयोग की संभावनाएं अत्यंत व्यापक हैं।"
दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक रोडमैप तैयार किया है और उसकी प्रगति की निगरानी के लिए एक समर्पित व्यवस्था भी बनाई गई है। रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा, सुरक्षा और आवागमन प्रमुख सहयोग क्षेत्र बताए गए।
भारत की वैश्विक भूमिका पर बार्तोली का नजरिया
इटली के राजदूत ने कहा कि भारत अब वैश्विक मंच पर महज दर्शक नहीं रह गया है। उनके अनुसार, भारत गुटनिरपेक्षता से बहु संरेखण की नीति की ओर बढ़ा है और उसकी भूमिका निष्क्रिय से सक्रिय हुई है। उन्होंने कहा कि इटली इस अधिक सक्रिय और जिम्मेदारीपूर्ण भूमिका का स्वागत करता है।
यूक्रेन संघर्ष पर बात करते हुए बार्तोली ने कहा कि रूस की आक्रामकता को केवल यूरोप की समस्या नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियाद पर पड़ता है और आम उपभोक्ताओं की जेब तक पहुँचता है। उन्होंने काला सागर से खाद्य आपूर्ति में बाधाओं और बाब अल मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर संभावित अवरोध का भी उल्लेख किया।
ऑस्ट्रेलिया की चीन पर चिंता
सत्र में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने चीन के तेज़ सैन्य विस्तार, नौसैनिक तैनाती और अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों के परीक्षणों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से किसी भी देश का सैन्य विस्तार इतनी तेज़ी से नहीं हुआ है।
ग्रीन ने बताया कि एक समय चीन के साथ आर्थिक गतिरोध के कारण ऑस्ट्रेलिया के लगभग 20 अरब डॉलर के व्यापार पर एक सप्ताह के भीतर असर पड़ा था, लेकिन उसका करीब 96 प्रतिशत हिस्सा दूसरे बाजारों में पहुँच गया। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच तस्मान सागर में चीनी नौसैनिक गतिविधियों और दक्षिण पश्चिम प्रशांत के छोटे द्वीपीय देशों के आसपास बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों का भी उल्लेख किया।
क्या होगा आगे
भारत इटली सांस्कृतिक और पर्यटन सहयोग के लिहाज से अगले वर्ष को 'भारत इटली संस्कृति एवं पर्यटन वर्ष' के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे दोनों देशों के लोगों के बीच परस्पर संपर्क और समझ को बढ़ावा मिलेगा। व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के रोडमैप की प्रगति निगरानी तंत्र के तहत जारी रहेगी।