भारत-म्यांमार शिखर वार्ता: साइबर स्कैम नेटवर्क पर कड़ा रुख, 2,411 भारतीय नागरिक वापस लाए गए
सारांश
मुख्य बातें
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच 2 जून 2025 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय बैठक में म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित साइबर स्कैम नेटवर्क का मुद्दा केंद्र में रहा। भारत ने स्पष्ट किया कि यह खतरा केवल द्विपक्षीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निपटने के लिए व्यापक क्षेत्रीय सहयोग अनिवार्य है।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को बताया कि पिछले 18 महीनों में भारत और म्यांमार के संयुक्त प्रयासों से 2,411 भारतीय नागरिकों को दक्षिण-पूर्व म्यांमार के सीमावर्ती साइबर स्कैम कंपाउंड्स से सकुशल वापस लाया जा चुका है। मिस्री ने कहा, 'पिछले डेढ़ साल में, हम म्यांमार में साइबर स्कैम के मामलों में फंसे 2,411 भारतीय नागरिकों को वापस ला पाए हैं, खासकर दक्षिण-पूर्व म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में।'
अभी भी फंसे हैं 150 से अधिक नागरिक
विदेश सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि अभी भी 150 से अधिक भारतीय नागरिकों के इन साइबर स्कैम ठिकानों में फंसे होने की रिपोर्ट है। उन्होंने कहा, 'हम बाकी लोगों को भी वापस लाने की कोशिश करने के लिए म्यांमार सरकार के संपर्क में हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर स्कैम कंपाउंड्स से मानव तस्करी की घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी हैं।
तीसरे देश के रास्ते होती है तस्करी
मिस्री ने एक महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया कि भारतीय नागरिकों को आमतौर पर किसी तीसरे देश के माध्यम से इन ठिकानों तक पहुँचाया जाता है। उन्होंने कहा, 'यह न सिर्फ इस मुद्दे से जुड़े ज्यादा द्विपक्षीय सहयोग की जरूरत को दिखाता है... बल्कि इस खास इलाके में मामले पर ज्यादा क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत को भी दिखाता है।' गौरतलब है कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कई अन्य द्विपक्षीय मंचों पर भी उठाया जाता रहा है।
क्षेत्रीय सहयोग की माँग
भारत ने इस मुद्दे पर केवल म्यांमार तक सीमित न रहते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों को भी साथ लेकर एक समन्वित क्षेत्रीय रणनीति बनाने की वकालत की। विशेषज्ञों के अनुसार, इन साइबर स्कैम नेटवर्क्स की बहु-देशीय प्रकृति को देखते हुए एकतरफा या द्विपक्षीय कार्रवाई अपर्याप्त साबित हो सकती है।
आगे की राह
भारत सरकार ने संकेत दिया है कि शेष फंसे नागरिकों की वापसी के लिए म्यांमार प्रशासन के साथ कूटनीतिक संपर्क जारी रहेगा। यह बैठक दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने का अवसर मानी जा रही है, जिसमें साइबर अपराध और मानव तस्करी दोनों पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।