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भारत-म्यांमार शिखर वार्ता: साइबर स्कैम नेटवर्क पर कड़ा रुख, 2,411 भारतीय नागरिक वापस लाए गए

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भारत-म्यांमार शिखर वार्ता: साइबर स्कैम नेटवर्क पर कड़ा रुख, 2,411 भारतीय नागरिक वापस लाए गए

सारांश

नई दिल्ली में मोदी-ह्लाइंग शिखर वार्ता में म्यांमार के साइबर स्कैम कंपाउंड्स का मुद्दा केंद्र में रहा। 18 महीनों में 2,411 भारतीय नागरिक वापस लाए गए, पर 150 से अधिक अभी भी फंसे हैं। भारत ने क्षेत्रीय सहयोग की माँग तेज की।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय बैठक हुई।
पिछले 18 महीनों में 2,411 भारतीय नागरिकों को म्यांमार के साइबर स्कैम कंपाउंड्स से वापस लाया गया।
अभी भी 150 से अधिक भारतीय नागरिकों के इन ठिकानों में फंसे होने की रिपोर्ट है।
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बताया कि पीड़ितों को अक्सर तीसरे देश के रास्ते तस्करी कर इन कंपाउंड्स तक पहुँचाया जाता है।
भारत ने इस मुद्दे पर व्यापक क्षेत्रीय सहयोग की माँग की और इसे केवल द्विपक्षीय नहीं, बल्कि बहु-देशीय चुनौती बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग के बीच 2 जून 2025 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई द्विपक्षीय बैठक में म्यांमार के सीमावर्ती क्षेत्रों में संचालित साइबर स्कैम नेटवर्क का मुद्दा केंद्र में रहा। भारत ने स्पष्ट किया कि यह खतरा केवल द्विपक्षीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निपटने के लिए व्यापक क्षेत्रीय सहयोग अनिवार्य है।

मुख्य घटनाक्रम

बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को बताया कि पिछले 18 महीनों में भारत और म्यांमार के संयुक्त प्रयासों से 2,411 भारतीय नागरिकों को दक्षिण-पूर्व म्यांमार के सीमावर्ती साइबर स्कैम कंपाउंड्स से सकुशल वापस लाया जा चुका है। मिस्री ने कहा, 'पिछले डेढ़ साल में, हम म्यांमार में साइबर स्कैम के मामलों में फंसे 2,411 भारतीय नागरिकों को वापस ला पाए हैं, खासकर दक्षिण-पूर्व म्यांमार के सीमावर्ती इलाकों में।'

अभी भी फंसे हैं 150 से अधिक नागरिक

विदेश सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि अभी भी 150 से अधिक भारतीय नागरिकों के इन साइबर स्कैम ठिकानों में फंसे होने की रिपोर्ट है। उन्होंने कहा, 'हम बाकी लोगों को भी वापस लाने की कोशिश करने के लिए म्यांमार सरकार के संपर्क में हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर स्कैम कंपाउंड्स से मानव तस्करी की घटनाएँ अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बन चुकी हैं।

तीसरे देश के रास्ते होती है तस्करी

मिस्री ने एक महत्वपूर्ण तथ्य उजागर किया कि भारतीय नागरिकों को आमतौर पर किसी तीसरे देश के माध्यम से इन ठिकानों तक पहुँचाया जाता है। उन्होंने कहा, 'यह न सिर्फ इस मुद्दे से जुड़े ज्यादा द्विपक्षीय सहयोग की जरूरत को दिखाता है... बल्कि इस खास इलाके में मामले पर ज्यादा क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत को भी दिखाता है।' गौरतलब है कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कई अन्य द्विपक्षीय मंचों पर भी उठाया जाता रहा है।

क्षेत्रीय सहयोग की माँग

भारत ने इस मुद्दे पर केवल म्यांमार तक सीमित न रहते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों को भी साथ लेकर एक समन्वित क्षेत्रीय रणनीति बनाने की वकालत की। विशेषज्ञों के अनुसार, इन साइबर स्कैम नेटवर्क्स की बहु-देशीय प्रकृति को देखते हुए एकतरफा या द्विपक्षीय कार्रवाई अपर्याप्त साबित हो सकती है।

आगे की राह

भारत सरकार ने संकेत दिया है कि शेष फंसे नागरिकों की वापसी के लिए म्यांमार प्रशासन के साथ कूटनीतिक संपर्क जारी रहेगा। यह बैठक दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने का अवसर मानी जा रही है, जिसमें साइबर अपराध और मानव तस्करी दोनों पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

411 नागरिकों की वापसी कूटनीतिक सफलता है, लेकिन 150 से अधिक का अभी भी फंसे रहना यह बताता है कि समस्या की जड़ें गहरी हैं। असली सवाल यह है कि तीसरे देश के रास्ते होने वाली तस्करी की श्रृंखला को तोड़ने के लिए भारत किन देशों को क्षेत्रीय मंच पर साथ लाने में सफल होता है — केवल म्यांमार से बात करना पर्याप्त नहीं। म्यांमार में जारी आंतरिक संघर्ष को देखते हुए इन सीमावर्ती क्षेत्रों पर केंद्र सरकार की पकड़ सीमित है, जो किसी भी द्विपक्षीय समझौते की व्यावहारिक सीमाएँ तय करती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

म्यांमार के साइबर स्कैम कंपाउंड्स में भारतीय नागरिक कैसे फंसते हैं?
विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, भारतीय नागरिकों को आमतौर पर किसी तीसरे देश के रास्ते इन साइबर स्कैम ठिकानों तक तस्करी करके पहुँचाया जाता है। इन कंपाउंड्स में उन्हें जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी करने पर मजबूर किया जाता है।
अब तक कितने भारतीय नागरिकों को म्यांमार से वापस लाया गया है?
पिछले 18 महीनों में भारत और म्यांमार के संयुक्त प्रयासों से 2,411 भारतीय नागरिकों को दक्षिण-पूर्व म्यांमार के सीमावर्ती साइबर स्कैम कंपाउंड्स से वापस लाया जा चुका है। इसके अलावा 150 से अधिक नागरिक अभी भी फंसे हैं और उनकी वापसी के प्रयास जारी हैं।
भारत ने म्यांमार के साथ इस मुद्दे पर क्या माँग रखी?
भारत ने द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने के साथ-साथ व्यापक क्षेत्रीय सहयोग की माँग रखी, क्योंकि यह समस्या बहु-देशीय प्रकृति की है। विदेश सचिव मिस्री ने कहा कि यह मुद्दा दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय मंचों पर उठाया जाता रहा है।
मोदी और यू मिन आंग ह्लाइंग की बैठक कहाँ हुई?
यह बैठक नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई, जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने द्विपक्षीय वार्ता की। बैठक के बाद विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने मीडिया को इसकी जानकारी दी।
साइबर स्कैम नेटवर्क के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग क्यों जरूरी है?
चूँकि पीड़ितों को अक्सर तीसरे देशों के रास्ते तस्करी कर इन ठिकानों तक पहुँचाया जाता है, इसलिए केवल द्विपक्षीय कार्रवाई अपर्याप्त है। भारत का मानना है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के अन्य देशों को मिलाकर एक समन्वित क्षेत्रीय रणनीति ही इस नेटवर्क को प्रभावी ढंग से तोड़ सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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