भारत ने मालदीव को भेजी खसरे की 20,000 वैक्सीन खुराक और 3 टन चिकित्सा सामग्री, बढ़ते मामलों के बीच मदद
सारांश
मुख्य बातें
भारत के विदेश मंत्रालय ने 11 जून 2025 को जानकारी दी कि भारत ने पड़ोसी देश मालदीव को 20,000 खसरा वैक्सीन खुराक और लगभग 3 टन चिकित्सा सामग्री भेजी है। यह सहायता मालदीव में खसरे के बढ़ते मामलों के बीच उसकी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत करने के उद्देश्य से दी गई है। नई दिल्ली ने इसे अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत एक प्रतिबद्ध कदम बताया है।
सहायता का विवरण और उद्देश्य
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, यह खेप मालदीव सरकार के चल रहे टीकाकरण अभियान को गति देने और संक्रमण के प्रसार को रोकने में सहायक होगी। भारत ने कहा कि यह समय पर दी गई मदद वहाँ की स्वास्थ्य प्रतिक्रिया क्षमता को भी सुदृढ़ करेगी। बयान में स्पष्ट किया गया कि सहायता का मूल लक्ष्य मालदीव के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
मालदीव में खसरे की स्थिति
मालदीव की हेल्थ प्रोटेक्शन एजेंसी (HPA) ने 13 मई 2025 को देश में खसरे की पुनः दस्तक की पुष्टि की थी। इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रमण के स्रोत और संभावित प्रसार का पता लगाने के लिए जाँच शुरू की। पिछले सप्ताह 4 नए मामले सामने आने के बाद इस वर्ष कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है।
भारत-मालदीव संबंधों का संदर्भ
भारत ने इस अवसर पर दोहराया कि मालदीव उसकी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और 'विजन महासागर' के अंतर्गत विशेष प्राथमिकता रखता है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंध दशकों पुराने हैं। गौरतलब है कि हाल के वर्षों में भारत ने मालदीव को स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढाँचे और आपदा राहत सहित अनेक क्षेत्रों में सहायता प्रदान की है।
भारत की 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' भूमिका
भारत ने स्वयं को क्षेत्र का एक विश्वसनीय 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' बताते हुए कहा कि वह संकट या आवश्यकता के समय अपने पड़ोसी देशों के साथ खड़ा रहने के लिए प्रतिबद्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपनी कूटनीतिक उपस्थिति और मानवीय सहायता के ज़रिये संबंधों को प्रगाढ़ करने में जुटा है। मंत्रालय ने कहा कि भारत आगे भी मालदीव सरकार के साथ साझा प्राथमिकताओं पर मिलकर काम करता रहेगा।