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बाकू में भारत की यूनेस्को विश्व धरोहर प्रदर्शनी का उद्घाटन, 44 स्थलों को मिली वैश्विक पहचान

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बाकू में भारत की यूनेस्को विश्व धरोहर प्रदर्शनी का उद्घाटन, 44 स्थलों को मिली वैश्विक पहचान

सारांश

बाकू में भारतीय दूतावास ने 17 पैनलों की एक स्थायी प्रदर्शनी के ज़रिए भारत के 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को अजरबैजान के सामने रखा। राजदूत अभय कुमार और यूएन-हैबिटैट की अन्ना सोवे ने संयुक्त उद्घाटन किया — यह भारत की सॉफ्ट पावर कूटनीति का एक और सुविचारित कदम है।

मुख्य बातें

बाकू स्थित भारतीय दूतावास में 19 जुलाई 2026 को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों पर स्थायी प्रदर्शनी का उद्घाटन हुआ।
प्रदर्शनी में 17 पैनल हैं, जो भारत के 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों — 36 सांस्कृतिक , 7 प्राकृतिक , 1 मिश्रित — को दर्शाते हैं।
संयुक्त उद्घाटन राजदूत अभय कुमार और यूएन-हैबिटैट की अन्ना सोवे ने किया।
कार्यक्रम में कई देशों के राजनयिक, अजरबैजान के सांसद, व्यापार प्रतिनिधि और भारतीय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।
'हेरिटेज-कम-फैशन वॉक' और 'इंडियन स्ट्रीट फूड फेस्टिवल' ने सांस्कृतिक उत्सव को जीवंत बनाया।

अजरबैजान की राजधानी बाकू स्थित भारतीय दूतावास परिसर में 19 जुलाई 2026 को भारत के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों पर एक स्थायी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। इस पहल का उद्देश्य भारत की सहस्राब्दी पुरानी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना और भारत-अजरबैजान के बीच लोगों से लोगों के सांस्कृतिक संबंधों को और प्रगाढ़ करना है।

प्रदर्शनी का उद्घाटन और स्वरूप

प्रदर्शनी का संयुक्त उद्घाटन अजरबैजान में भारत के राजदूत अभय कुमार और यूएन-हैबिटैट अजरबैजान की कंट्री प्रोग्राम हेड अन्ना सोवे ने किया। दोनों ने मिलकर 17 प्रदर्शनी पैनलों का अनावरण किया, जिनमें भारत के सर्वाधिक चर्चित सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों को दर्शाया गया है — वे स्थल जिन्हें उनके असाधारण वैश्विक महत्व के आधार पर यूनेस्को की मान्यता प्राप्त है।

यह प्रदर्शनी आम जनता के लिए स्थायी रूप से खुली रहेगी, ताकि बाकू में रहने वाले और आने वाले लोग भारत की विरासत को करीब से जान सकें।

राजदूत अभय कुमार का संबोधन

सभा को संबोधित करते हुए राजदूत अभय कुमार ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे पुरानी और अनवरत चलने वाली सभ्यताओं में से एक है, जिसकी सांस्कृतिक विरासत हजारों वर्ष पुरानी है। उन्होंने बताया कि भारत में कुल 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं — जिनमें 36 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल शामिल हैं। उनके अनुसार ये स्थल केवल भारत की नहीं, बल्कि समूची मानवता की साझा धरोहर हैं।

राजदूत ने विशेष रूप से प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय, ताजमहल, सांची के बौद्ध स्मारकों तथा हम्पी और खजुराहो के मंदिर परिसरों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये स्थल भारत की विविध सभ्यतागत यात्रा, कलात्मक उत्कृष्टता और वास्तुशिल्प की अद्वितीय मिसाल हैं।

यूएन-हैबिटैट की प्रतिक्रिया

अन्ना सोवे ने इस स्थायी प्रदर्शनी की स्थापना के लिए भारतीय दूतावास की सराहना की। उन्होंने इसे एक नवाचारी पहल बताया जो सांस्कृतिक जागरूकता, संवाद और मानवता की साझा धरोहर की समझ को बढ़ावा देती है। उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए अपनी ऐतिहासिक और प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखने के भारत के संकल्प की भी प्रशंसा की।

कार्यक्रम में भागीदारी और सांस्कृतिक उत्सव

शनिवार को आयोजित इस विशेष समारोह में कई देशों के राजदूत और राजनयिक, अजरबैजान की संसद के सदस्य, व्यापार जगत के प्रतिनिधि, पर्यटन और यात्रा ऑपरेटर, प्रमुख मीडिया संगठन, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और भारतीय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे।

उद्घाटन के बाद एक रंगारंग 'हेरिटेज-कम-फैशन वॉक' का आयोजन किया गया, जिसमें अजरबैजानी प्रतिभागियों ने भारत के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों की पारंपरिक पोशाकें धारण कर देश की सांस्कृतिक विविधता को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। इसके अतिरिक्त एक 'इंडियन स्ट्रीट फूड फेस्टिवल' भी आयोजित हुआ, जहाँ अतिथियों ने भारतीय व्यंजनों और पेय पदार्थों का स्वाद लिया। भारतीय कलात्मक परंपराओं से प्रेरित अजरबैजानी कलाकारों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उत्सव के माहौल को और भी यादगार बना दिया।

आगे की राह

यह स्थायी प्रदर्शनी भारतीय दूतावास में निरंतर खुली रहेगी और बाकू में भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का एक स्थायी केंद्र बनेगी। यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपनी सॉफ्ट पावर को सुदृढ़ करने के प्रयासों को तेज कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और वहाँ भारतीय सॉफ्ट पावर की उपस्थिति रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि इस तरह की प्रदर्शनियाँ तब तक सीमित प्रभाव डालती हैं जब तक इन्हें पर्यटन प्रोत्साहन, वीज़ा सुगमता और शैक्षणिक आदान-प्रदान जैसे ठोस कार्यक्रमों से नहीं जोड़ा जाता। असली कसौटी यह होगी कि क्या यह पहल बाकू से भारत आने वाले पर्यटकों की संख्या में मापनीय वृद्धि ला पाती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाकू में भारत की विश्व धरोहर प्रदर्शनी क्या है?
यह अजरबैजान की राजधानी बाकू स्थित भारतीय दूतावास परिसर में स्थापित एक स्थायी प्रदर्शनी है, जिसमें 17 पैनलों के माध्यम से भारत के 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को प्रदर्शित किया गया है। इसका उद्घाटन 19 जुलाई 2026 को हुआ और यह आम जनता के लिए खुली रहेगी।
इस प्रदर्शनी का उद्घाटन किसने किया?
प्रदर्शनी का संयुक्त उद्घाटन अजरबैजान में भारत के राजदूत अभय कुमार और यूएन-हैबिटैट अजरबैजान की कंट्री प्रोग्राम हेड अन्ना सोवे ने किया। दोनों ने मिलकर 17 प्रदर्शनी पैनलों का अनावरण किया।
भारत में कितने यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं?
राजदूत अभय कुमार के अनुसार भारत में कुल 44 यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल हैं — जिनमें 36 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित स्थल शामिल हैं। इनमें ताजमहल, नालंदा विश्वविद्यालय, सांची के बौद्ध स्मारक, हम्पी और खजुराहो जैसे विश्वप्रसिद्ध स्थल शामिल हैं।
इस प्रदर्शनी से भारत-अजरबैजान संबंधों पर क्या असर पड़ेगा?
यह प्रदर्शनी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक कदम है। राजदूत कुमार के अनुसार इससे भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा की बेहतर समझ बढ़ेगी और द्विपक्षीय सांस्कृतिक जुड़ाव गहरा होगा।
उद्घाटन समारोह में और क्या-क्या हुआ?
उद्घाटन के बाद एक 'हेरिटेज-कम-फैशन वॉक' आयोजित हुई जिसमें अजरबैजानी प्रतिभागियों ने भारतीय पारंपरिक पोशाकें पहनी। इसके साथ ही 'इंडियन स्ट्रीट फूड फेस्टिवल' और भारतीय परंपराओं से प्रेरित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए।
राष्ट्र प्रेस
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