इंदौर के संगीत के दिग्गज परिवार से जुड़े शाहबाज ने चुनी फिल्मों की दुनिया, मां ने रखा था संगीत से दूर
सारांश
Key Takeaways
- शाहबाज खान का संगीत घराना
- मां का संगीत से दूर रखने का निर्णय
- टीवी सीरियल 'टीपू सुल्तान' से पहचान
- फिल्मों में खतरनाक विलेन की भूमिकाएं
- आज भी टीवी और ओटीटी पर सक्रिय
मुंबई, 9 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कहते हैं कि किस्मत कहां ले जाएगी, यह कोई नहीं जानता। हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे अभिनेता हैं, जो विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े रहे हैं।
ऐसे ही एक अभिनेता हैं शाहबाज खान, जिन्हें यह नहीं पता था कि उन्हें क्या करना है, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और भाग्य के बल पर उन्होंने दर्शकों के दिलों में जगह बनाई और आज भी अपने निगेटिव रोल्स के लिए जाने जाते हैं। बहुत कम लोग जानते हैं कि शाहबाज के पिता हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक थे, जिन्होंने इस कला को नई पहचान दी।
10 मार्च को इंदौर में जन्मे शाहबाज एक शाही परिवार से आते हैं। उनके पिता, उस्ताद अमीर खान, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के दिग्गज थे और उन्होंने कई प्रसिद्ध गीत गाए थे। उनके दादा, शामीर खान, भी एक सारंगी वादक थे। इतने बड़े परिवार से होने के बावजूद, उनकी मां चाहती थीं कि वह संगीत से दूर रहें।
अभिनेता की मां नहीं चाहती थीं कि कोई कहे कि उस्ताद अमीर खान का बेटा कैसा गाता है। जब शाहबाज छोटे थे, तब उनके पिता का निधन हो गया और उन्हें संगीत की शिक्षा देने वाला कोई नहीं था। अगर वह किसी अन्य परिवार में संगीत सीखने जाते, तो बहुत सारी बातें होतीं। अभिनेता ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनकी मां ने कहा था कि भले ही रिक्शा चला लो, लेकिन संगीत नहीं सीखना है। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई एक बोर्डिंग स्कूल में हुई, जहां उन्होंने खुद को संभालना सीखा। वह छोटी उम्र में ही समझदार बन चुके थे, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि भाग्य उन्हें सिनेमा की ओर ले जाएगा।
होटल प्रबंधन की पढ़ाई के बाद भी उन्हें यह नहीं पता था कि उन्हें क्या करना है, लेकिन एक दोस्त के बुलावे पर वह मुंबई चले गए, जहां उन्होंने कई महीनों तक थिएटर सीखा। उनकी किस्मत तब चमकी जब उन्हें टीवी सीरियल 'टीपू सुल्तान' में हैदर अली का रोल मिला। पहले यह सीरियल कुछ ही एपिसोड के लिए था लेकिन अभिनेता की किस्मत ने साथ दिया और उन्होंने 58 एपिसोड तक काम किया। टीपू सुल्तान ने शाहबाज़ को पहचान दिलाई। उन्हें उर्दू की बेहतर समझ के कारण कई अन्य सीरियल्स जैसे 'चंद्रकांता', 'बेताल पचीसी' और 'द ग्रेट मराठा' में भी मजबूत भूमिकाएं मिलीं।
सीरियल में पहचान के बाद, शाहबाज ने फिल्मों की ओर कदम बढ़ाया। उनकी शुरुआत फिल्म 'नाचनेवाले गानेवाले' से हुई, लेकिन बाद में उन्होंने 'कैसे-कैसे रिश्ते', 'धरतीपुत्र', 'जिद्दी', 'युग' और 'मेजर साब' जैसी फिल्मों में खतरनाक विलेन के रूप में अपनी पहचान बनाई। आज भी वह टीवी और ओटीटी की दुनिया में राज कर रहे हैं।