वरुण-24: आईएनएस त्रिशूल ने टूलॉन में फ्रांसीसी नौसेना संग पनडुब्बी रोधी युद्ध और फायरिंग अभ्यास किया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिशूल फ्रांस के टूलॉन बंदरगाह पहुँचा और वहाँ भारत-फ्रांस द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास 'वरुण' के 24वें संस्करण में भाग लिया। इस अभ्यास ने दोनों देशों के बीच गहरी समुद्री रणनीतिक साझेदारी को एक बार फिर रेखांकित किया। 1 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के अनुसार अभ्यास में पनडुब्बी रोधी युद्ध से लेकर वास्तविक फायरिंग अभ्यास तक की एक व्यापक शृंखला शामिल रही।
अभ्यास का दायरा और युद्धक गतिविधियाँ
समुद्री चरण में आईएनएस त्रिशूल ने फ्रांसीसी नौसेना की इकाइयों एफडीए फोर्बिन, एफएलएफ ला फायेत्ते और एसएनए सफ्रेन के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर अभ्यास किया। दोनों नौसेनाओं ने पनडुब्बी रोधी युद्ध, सतही लक्ष्यों के विरुद्ध अभियान और लाइव फायरिंग ड्रिल को अंजाम दिया। इसके साथ ही एनएच90 हेलीकॉप्टरों और अटलांटिक-2 समुद्री गश्ती विमानों ने भी अभ्यास में हिस्सेदारी की।
दोनों नौसेनाओं के हेलीकॉप्टरों ने एक-दूसरे के जहाज़ों पर उतरने का अभ्यास किया, जो संयुक्त अभियानों के लिए अंतर-संचालन क्षमता की दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। इन गतिविधियों ने समुद्र में दोनों नौसेनाओं के बीच तालमेल, संचालन क्षमता और आपसी समझ को और पैना किया।
बंदरगाह चरण: स्वागत, बैठकें और सांस्कृतिक आदान-प्रदान
टूलॉन पहुँचने पर फ्रांसीसी नौसेना ने आईएनएस त्रिशूल को औपचारिक जल तोपों की सलामी देकर गर्मजोशी से स्वागत किया। आईएनएस त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर ने फ्रांसीसी नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की, जिनमें रियर एडमिरल मैकारा ऊक, संचालन के लिए उपकमांडर-इन-चीफ, प्रमुख रूप से शामिल रहे। इस बैठक में समुद्री अभियानों और द्विपक्षीय सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ।
आईएनएस त्रिशूल पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में टूलॉन के उप महापौर वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) लॉरेंट इसनार्द और अन्य नागरिक गणमान्य लोग शामिल हुए। दोनों नौसेनाओं के जवानों के बीच एक मैत्रीपूर्ण वॉलीबॉल मुकाबला भी हुआ, जिसने सैन्य सहयोग के साथ-साथ आपसी दोस्ती को भी प्रगाढ़ किया।
ऐतिहासिक विरासत को नमन: मार्सेय युद्ध स्मारक
फ्रांस यात्रा के दौरान आईएनएस त्रिशूल के कमांडिंग ऑफिसर, अधिकारियों और जवानों ने मार्सेय के मजार्ग युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्मारक प्रथम और द्वितीय विश्व युद्धों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले 205 भारतीय सैनिकों की स्मृति को समर्पित है। इस श्रद्धांजलि ने भारत-फ्रांस के ऐतिहासिक सैन्य सम्बंधों की गहरी जड़ों को उजागर किया।
गौरतलब है कि दोनों देशों का यह साझा सैन्य इतिहास आज की रणनीतिक साझेदारी की नींव को और मज़बूत करता है।
फ्रांसीसी प्रमुख युद्धपोतों का दौरा और तकनीकी आदान-प्रदान
आईएनएस त्रिशूल के चालक दल ने फ्रांसीसी नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों — चार्ल्स द गॉल, फोर्बिन और ला फायेत्ते — का दौरा किया। इस दौरान भारतीय नौसैनिकों ने विमानवाहक पोत से जुड़े अभियानों, विमानन सुविधाओं और जहाज़ पर अपनाई जाने वाली संचालन प्रक्रियाओं को करीब से समझा।
परिचालन अनुभव के इस आदान-प्रदान से भविष्य के संयुक्त समुद्री अभियानों के लिए दोनों नौसेनाओं के बीच पेशेवर तालमेल और बेहतर होगा।
रणनीतिक महत्त्व और आगे की राह
वरुण अभ्यास की शृंखला भारत-फ्रांस की उस व्यापक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग पर केंद्रित है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देश हिंद-प्रशांत में नौवहन की स्वतंत्रता और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को बनाए रखने पर एकमत हैं। 24वें संस्करण तक पहुँचा यह अभ्यास इस बात का प्रमाण है कि दोनों नौसेनाओं के बीच सहयोग केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि गहरे परिचालन स्तर पर जड़ें जमा चुका है। आगे के संयुक्त अभियानों और संभावित लॉजिस्टिक सहयोग की दिशा में यह अभ्यास एक ठोस आधार तैयार करता है।