अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026: मुंबई से पटना तक योग का जोश, नेताओं ने 365 दिन योग अपनाने का आह्वान किया
सारांश
मुख्य बातें
12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के अवसर पर 21 जून को देशभर में योग कार्यक्रमों की धूम रही। मुंबई और पटना समेत देश के अनेक शहरों में नागरिकों, नेताओं और सामाजिक संगठनों ने बड़े उत्साह के साथ योग सत्रों में हिस्सा लिया। इस वर्ष का मुख्य संदेश यही रहा कि योग को एक दिवसीय आयोजन तक सीमित न रखकर जीवनशैली का स्थायी हिस्सा बनाया जाए।
मुंबई में योग उत्सव: बारिश में भी उत्साह कायम
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मुंबई में योग दिवस कार्यक्रम में भाग लिया। उन्होंने कहा कि 'मुंबई की बारिश के बीच योग करना एक अलग और विशेष आनंद देता है।' मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि योग को वर्ष के 365 दिन अपने जीवन का अंग बनाना चाहिए, क्योंकि नियमित योग स्वस्थ और संतुलित जीवन की कुंजी है।
केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने भी देशवासियों को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने उल्लेख किया कि इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में भाग लेकर देशवासियों को प्रेरित किया।
अमृता फडणवीस का संवेदनशील संदेश
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने योग दिवस के महत्व पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि सरकारी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों द्वारा 21 जून को योग दिवस मनाया जाना अच्छी बात है, लेकिन इससे भी ज़रूरी यह है कि योग उन लोगों तक पहुँचे जो इसे अपने दैनिक जीवन में उतार सकें। उन्होंने विशेष रूप से उन किसानों के बच्चों का उल्लेख किया जिनके पिताओं ने आत्महत्या की है, और कहा कि ऐसे वर्गों तक योग की पहुँच बेहद आवश्यक है।
पटना में LJP कार्यालय में योग और ध्यान सत्र
पटना में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राज्य कार्यालय में योग और ध्यान सत्र का आयोजन किया गया। सांसद शांभवी चौधरी, मंत्री संजय सिंह और राजू तिवारी सहित कई नेताओं ने इसमें भाग लिया। कार्यक्रम में स्वस्थ, तनावमुक्त और संतुलित जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया गया।
आम जनता पर असर और व्यापक परिप्रेक्ष्य
गौरतलब है कि भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था और 2015 से यह हर वर्ष मनाया जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ — मधुमेह, उच्च रक्तचाप और मानसिक तनाव — तेज़ी से बढ़ रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, योग को सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति में शामिल करने से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
इस वर्ष के आयोजनों में नेताओं का एक स्वर में यही संदेश रहा — योग को उत्सव से आगे बढ़ाकर आदत बनाएँ। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या इस वार्षिक जागरूकता का असर जनस्वास्थ्य के आँकड़ों में भी दिखता है।