5 नवंबर 2026
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हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026 संपन्न: 20 देशों ने समुद्री सुरक्षा और AI तकनीक पर बनाई साझा रणनीति

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हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026 संपन्न: 20 देशों ने समुद्री सुरक्षा और AI तकनीक पर बनाई साझा रणनीति

सारांश

नई दिल्ली में संपन्न आईआरपीडी-2026 महज एक वार्षिक सम्मेलन नहीं था — यह हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीति की झलक था। 20 देशों के विशेषज्ञों ने AI, क्वांटम तकनीक और महासागर प्रशासन पर मिलकर रणनीति बनाई, जो भारत की MAHASAGAR परिकल्पना को ठोस बहुपक्षीय आकार देती है।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना का आईआरपीडी-2026 सम्मेलन 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
20 देशों के 40 से अधिक विशेषज्ञों ने पाँच प्रमुख सत्रों में समुद्री सुरक्षा और तकनीक पर विचार-विमर्श किया।
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस.
राजा सुब्रमणि ने अंतिम दिन प्रतिभागियों के साथ संवाद किया; रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने समापन संबोधन दिया।
सम्मेलन में AI और क्वांटम तकनीक के जिम्मेदार समुद्री उपयोग तथा द्वीपीय देशों के लिए IRIS कार्यक्रम पर विशेष चर्चा हुई।
आईआरपीडी-2026 भारत की MAHASAGAR — क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास — नीति को आगे बढ़ाने की दिशा में आयोजित किया गया।

भारतीय नौसेना का तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सम्मेलन 'हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026' (आईआरपीडी-2026) 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ, जिसमें 20 देशों के 40 से अधिक विशेषज्ञों ने समुद्री सुरक्षा, महासागर प्रशासन और उभरती समुद्री तकनीकों के जिम्मेदार उपयोग पर विचार-विमर्श किया। इस संवाद का मुख्य विषय 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग' था, जो भारत की 'MAHASAGAR' — यानी क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास — की परिकल्पना को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखी जा रही है।

सम्मेलन का स्वरूप और प्रतिभागी

भारतीय नौसेना ने राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन के सहयोग से इस वार्षिक सम्मेलन का आयोजन किया। तीन दिनों में पाँच प्रमुख सत्रों और वरिष्ठ स्तर की चर्चाओं के माध्यम से समुद्री सहयोग के विभिन्न आयामों पर विचार किया गया। प्रतिभागियों में सैन्य विशेषज्ञ, नीति-निर्माता, समुद्री उद्योग के प्रतिनिधि, राजनयिक, शिक्षाविद, मीडियाकर्मी और छात्र शामिल रहे।

सम्मेलन के अंतिम दिन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। तीन दिवसीय कार्यक्रम का समापन रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के समापन संबोधन के साथ हुआ।

महासागर प्रशासन पर मुख्य विचार-विमर्श

अंतिम दिन के एक प्रमुख सत्र का विषय 'महासागर प्रशासन और समुद्री मजबूती के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण' रहा। इसमें इस बात पर चर्चा हुई कि समुद्र से जुड़े वैज्ञानिक ज्ञान और विशेषज्ञता को बेहतर समुद्री प्रबंधन तथा नीतिगत फैसलों से कैसे जोड़ा जाए।

फिलीपींस विश्वविद्यालय की प्रोफेसर देव फ्लोरेंस ओंडा ने समुद्री प्रशासन के क्षेत्र में फिलीपींस के अनुभव साझा करने के लिए सहयोगात्मक योजना पर विचार रखे। अंतरराष्ट्रीय समुद्र तल प्राधिकरण की पूर्व चीफ ऑफ स्टाफ डॉ. मैरी बोरेल-मैककिनन ने गहरे समुद्र में अनुसंधान के लिए समान भागीदारी और समुद्री संसाधनों के सतत प्रबंधन पर जोर दिया।

गौरतलब है कि आपदा रोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI) के रामराज नरसिम्हन ने द्वीपीय देशों के बुनियादी ढाँचे को आपदाओं से सुरक्षित बनाने के लिए चलाए जा रहे IRIS कार्यक्रम के क्रियान्वयन की जानकारी दी। स्वीडन की Future Maritime की सोफिया फर्स्टेनबर्ग-स्टॉट ने समुद्री विज्ञान और जहाजरानी गतिविधियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

AI और क्वांटम तकनीक पर विशेष सत्र

सम्मेलन का अंतिम सत्र तेज़ी से बदलती समुद्री तकनीकों और उनके दोहरे इस्तेमाल से जुड़े पहलुओं पर केंद्रित रहा। इसमें AI और क्वांटम तकनीक जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के समुद्री क्षेत्र में उपयोग और उनके जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर विस्तृत चर्चा हुई।

जर्मनी स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज की डोंगयून चो ने हिंद-प्रशांत देशों के बीच AI और क्वांटम तकनीक के क्षेत्र में सहयोग का व्यावहारिक ढाँचा तैयार करने पर विचार रखे। ब्रुसेल्स स्कूल ऑफ गवर्नेंस की डॉ. ईवा पेजसोवा ने दोहरे इस्तेमाल वाली समुद्री तकनीकों के जिम्मेदार प्रबंधन के लिए यूरोपीय संघ और हिंद-प्रशांत देशों के बीच सहयोग के तरीकों पर प्रकाश डाला।

दक्षिण अफ्रीकी नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कैप्टन मार्क ब्लेन ने छोटी और मध्यम आकार की नौसेनाओं को नई तकनीकों के अनुरूप तैयार करने के लिए सहयोग का रोडमैप प्रस्तुत किया। भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त कमोडोर अरुण गोलाया ने इन तकनीकों को जिम्मेदारी से अपनाने के लिए विभिन्न देशों की नौसेनाओं के बीच व्यावहारिक सहयोग पर जोर दिया।

MAHASAGAR परिकल्पना और रणनीतिक संदर्भ

यह सम्मेलन ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री शक्ति-संघर्ष तेज़ हो रहा है और भारत अपनी 'MAHASAGAR' — यानी Maritime and Strategic Harmonization for All-round Growth and Regional — नीति के तहत क्षेत्रीय नौसेनाओं के साथ संस्थागत सहयोग बढ़ाने में लगा है। चर्चा में इस बात पर सहमति बनी कि अलग-अलग संसाधनों और क्षमताओं वाले देश संयुक्त अनुसंधान, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग के माध्यम से नई तकनीकों के विकास और इस्तेमाल में भागीदार बन सकते हैं।

आगे, आईआरपीडी-2026 में हुई चर्चाओं और सुझावों को नीतिगत दस्तावेजों में शामिल किए जाने की उम्मीद है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बहुपक्षीय समुद्री सहयोग को नई दिशा दे सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तकनीक और नीति के साझा ढाँचे में बदल रहा है — यही MAHASAGAR की असली महत्वाकांक्षा है। लेकिन सवाल यह है कि पाँच सत्रों और 40 विशेषज्ञों की चर्चाएँ क्या किसी बाध्यकारी सहयोग-ढाँचे में तब्दील होंगी, या यह भी वार्षिक घोषणाओं की उस लंबी सूची में जुड़ जाएगा जहाँ विचार तो होते हैं, क्रियान्वयन नहीं। AI और क्वांटम तकनीक जैसे संवेदनशील विषयों पर हिंद-प्रशांत के विविध देशों के बीच सहमति बनाना कूटनीतिक दृष्टि से जटिल है, क्योंकि इन्हीं देशों के बीच रणनीतिक हित अक्सर टकराते हैं। रक्षा सचिव और सीडीएस की उपस्थिति यह संकेत देती है कि भारत इस मंच को महज अकादमिक नहीं, बल्कि नीति-निर्माण का औजार बनाना चाहता है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026 (आईआरपीडी-2026) क्या है?
आईआरपीडी-2026 भारतीय नौसेना द्वारा राष्ट्रीय समुद्री फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित एक वार्षिक अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक सम्मेलन है, जो 5 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में संपन्न हुआ। इसमें 20 देशों के 40 से अधिक विशेषज्ञों ने समुद्री सुरक्षा, महासागर प्रशासन और उभरती तकनीकों पर विचार-विमर्श किया।
आईआरपीडी-2026 में किन प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई?
सम्मेलन में पाँच प्रमुख सत्रों में समुद्री विज्ञान और शैक्षणिक सहयोग, महासागर प्रशासन, द्वीपीय देशों की आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे और AI तथा क्वांटम तकनीक के जिम्मेदार समुद्री उपयोग जैसे विषय शामिल रहे। दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीकों के प्रबंधन के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग-ढाँचा तैयार करना एक प्रमुख एजेंडा था।
MAHASAGAR परिकल्पना क्या है और इसका आईआरपीडी-2026 से क्या संबंध है?
MAHASAGAR भारत की उस नीतिगत दृष्टि को दर्शाता है जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सभी देशों के लिए सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। आईआरपीडी-2026 को इसी परिकल्पना को बहुपक्षीय संवाद और तकनीकी सहयोग के माध्यम से आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में आयोजित किया गया।
सम्मेलन में किन वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया?
चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने अंतिम दिन प्रतिभागियों के साथ संवाद किया। तीन दिवसीय सम्मेलन का समापन रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के समापन संबोधन के साथ हुआ।
IRIS कार्यक्रम क्या है और यह द्वीपीय देशों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
IRIS कार्यक्रम आपदा रोधी बुनियादी ढाँचे के लिए गठबंधन (CDRI) की एक पहल है, जिसका उद्देश्य द्वीपीय देशों के बुनियादी ढाँचे को प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित बनाना है। सम्मेलन में CDRI के रामराज नरसिम्हन ने इसके क्रियान्वयन की जानकारी साझा की।
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