3 नवंबर 2026
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आईपीआरडी-2026: नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत देशों का समुद्री सुरक्षा व वैज्ञानिक सहयोग पर महामंथन

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आईपीआरडी-2026: नई दिल्ली में हिंद-प्रशांत देशों का समुद्री सुरक्षा व वैज्ञानिक सहयोग पर महामंथन

सारांश

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्र के नीचे के ढाँचे की सुरक्षा से लेकर विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक नेटवर्क तक — भारतीय नौसेना के आईपीआरडी-2026 में सात से अधिक देशों ने नई दिल्ली में एक बड़े क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचे की नींव रखने की कोशिश की।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन द्वारा आयोजित आईपीआरडी-2026 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ।
सम्मेलन का विषय 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग' रखा गया।
फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान, मालदीव, श्रीलंका, फिलीपींस और नॉर्वे के प्रतिनिधि एवं राजनयिक शामिल हुए।
पूर्व उप नौसेना प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती की अध्यक्षता में आईपीएमडीए के अवसरों और चुनौतियों पर चर्चा हुई।
समुद्र के नीचे महत्वपूर्ण ढाँचे की सुरक्षा और सूचना-साझाकरण तंत्र विकसित करने पर सहमति बनी।
'सी ब्लाइंडनेस एंड मैरीटाइम हेरिटेज इन इंडिया' नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026 (आईपीआरडी-2026) का तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ, जिसमें फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान, मालदीव, श्रीलंका, फिलीपींस और नॉर्वे समेत कई देशों के प्रतिनिधि, समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ और शिक्षाविद शामिल हुए। सम्मेलन का केंद्रीय विषय 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग' रखा गया है, जो इस मंच की अब तक की सबसे व्यापक थीम मानी जा रही है।

उद्घाटन और आयोजन

सम्मेलन का उद्घाटन नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (एनएमएफ) के अध्यक्ष और भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) के संबोधन से हुआ। भारतीय नौसेना अपने नॉलेज सहयोगी नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के साथ मिलकर इस वार्षिक संवाद का आयोजन करती है। यह ऐसे समय में आया है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री गतिविधियों की निगरानी और समुद्र के नीचे के ढाँचे की सुरक्षा को लेकर क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग की माँग तेज़ी से बढ़ी है।

समुद्री सुरक्षा पर मुख्य विमर्श

सम्मेलन के पहले दिन समुद्री सुरक्षा और शैक्षणिक सहयोग — दो प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा हुई। वाइस एडमिरल तरुण सोबती (सेवानिवृत्त), पूर्व उप नौसेना प्रमुख की अध्यक्षता में आयोजित सत्र में हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता साझेदारी (आईपीएमडीए) के अवसरों और चुनौतियों पर विस्तार से विचार किया गया।

चर्चा में समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा, पानी के नीचे के महत्वपूर्ण ढाँचे — जैसे पनडुब्बी केबल और पाइपलाइन — की निगरानी, तथा इस उद्देश्य के लिए देशों के बीच सूचना-साझाकरण की व्यवस्था विकसित करने पर ज़ोर दिया गया। हिंद महासागर आयोग ने भी महत्वपूर्ण समुद्री ढाँचे की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

शैक्षणिक और वैज्ञानिक सहयोग

वाइस एडमिरल संजय महिंदरू (सेवानिवृत्त), पूर्व उप नौसेना प्रमुख के संचालन में हुए अकादमिक सत्र में फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान और मालदीव के प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की। इस सत्र में हिंद महासागर के तटीय शहरों के विश्वविद्यालयों को एक व्यापक शैक्षणिक नेटवर्क से जोड़ने, सामाजिक विज्ञान में साझा शोध, और सरकारों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने की संभावनाएँ तलाशी गईं।

गौरतलब है कि क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में शैक्षणिक संस्थाओं की भूमिका को मुख्यधारा की सुरक्षा वार्ताओं में पहले अपेक्षाकृत कम महत्व दिया जाता था। आईपीआरडी-2026 में इसे केंद्रीय विषय बनाना एक उल्लेखनीय नीतिगत बदलाव का संकेत है।

राजनयिक संवाद और पुस्तक विमोचन

पहले दिन 'सहयोग का संवाद' नाम से एक विशेष राजनयिक बातचीत भी आयोजित की गई। इसमें श्रीलंका की उच्चायुक्त महिशिनी कोलोन, फिलीपींस के राजदूत जोसेल एफ. इग्नासियो और नॉर्वे की राजदूत मे-एलिन स्टेनर शामिल हुईं। इस संवाद की मेजबानी नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के महानिदेशक वाइस एडमिरल प्रदीप चौहान (सेवानिवृत्त) ने की।

इस अवसर पर 'सी ब्लाइंडनेस एंड मैरीटाइम हेरिटेज इन इंडिया' नामक पुस्तक का विमोचन भी किया गया, जो भारत में समुद्र के प्रति जागरूकता और समुद्री विरासत के विषयों पर केंद्रित है।

आगे की दिशा

सम्मेलन के पहले दिन प्रतिभागियों ने विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक साझेदारी के ज़रिये क्षेत्रीय सहयोग को मज़बूत करने के लिए कई व्यावहारिक नीतिगत सुझाव दिए। दो और दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए साझा समुद्री सुरक्षा ढाँचे की रूपरेखा और ठोस सहयोग तंत्र की दिशा में आगे की चर्चा अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संस्थागत और शैक्षणिक बंधनों से भी मज़बूत किया जाए। लेकिन असली परीक्षा यह है कि इन नीतिगत सुझावों का ठोस सहयोग ढाँचे में रूपांतरण कितनी तेज़ी से होता है — क्योंकि हिंद-प्रशांत में 'संवाद' की कमी नहीं, बल्कि क्रियान्वयन की कमी है। समुद्र के नीचे के ढाँचे की सुरक्षा — जो अब वैश्विक चिंता का विषय है — पर क्षेत्रीय सूचना-साझाकरण का तंत्र अभी भी शैशवावस्था में है, और इस मंच की विश्वसनीयता इसी पर टिकी है।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईपीआरडी-2026 क्या है और इसका आयोजन कहाँ हो रहा है?
आईपीआरडी-2026 यानी हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद-2026, भारतीय नौसेना और नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन है, जो 3 नवंबर 2026 से नई दिल्ली में शुरू हुआ है। इसमें सात से अधिक देशों के राजनयिक, समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं।
इस सम्मेलन का मुख्य विषय क्या है?
आईपीआरडी-2026 का केंद्रीय विषय 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अकादमिक सहयोग' है। सम्मेलन में समुद्री निगरानी, पानी के नीचे के महत्वपूर्ण ढाँचे की सुरक्षा, और विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक नेटवर्क बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस सम्मेलन में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
सम्मेलन में फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान, मालदीव, श्रीलंका, फिलीपींस और नॉर्वे के प्रतिनिधि और राजनयिक शामिल हुए हैं। इसके अलावा हिंद महासागर आयोग ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
समुद्री सुरक्षा पर पहले दिन की चर्चा में किन बिंदुओं पर सहमति बनी?
पहले दिन की चर्चा में देशों के बीच समुद्री सूचना-साझाकरण तंत्र विकसित करने, पानी के नीचे की पनडुब्बी केबल और पाइपलाइन जैसे महत्वपूर्ण ढाँचे की सामूहिक सुरक्षा, और हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता साझेदारी (आईपीएमडीए) को मज़बूत करने पर सहमति बनी।
आईपीआरडी-2026 में शैक्षणिक सहयोग क्यों महत्वपूर्ण है?
इस सम्मेलन में पहली बार शैक्षणिक और वैज्ञानिक साझेदारी को समुद्री सुरक्षा के साथ जोड़ा गया है। हिंद महासागर के तटीय देशों के विश्वविद्यालयों को एक नेटवर्क से जोड़ने और सामाजिक विज्ञान में साझा शोध को बढ़ावा देने से दीर्घकालिक क्षेत्रीय सहयोग की नींव मज़बूत होती है, जो केवल सैन्य अभ्यासों पर निर्भरता कम करती है।
राष्ट्र प्रेस
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