4 नवंबर 2026
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राजनाथ सिंह आईपीआरडी-2026 में 18 देशों के समक्ष रखेंगे हिंद-प्रशांत सहयोग पर भारत का दृष्टिकोण

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राजनाथ सिंह आईपीआरडी-2026 में 18 देशों के समक्ष रखेंगे हिंद-प्रशांत सहयोग पर भारत का दृष्टिकोण

सारांश

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का आईपीआरडी-2026 में उपस्थित होना महज़ औपचारिकता नहीं — यह हिंद-प्रशांत में भारत की बढ़ती रणनीतिक सक्रियता का प्रतीक है। 18 देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष 'महासागर' विजन को रखना भारत की समुद्री कूटनीति को नई ऊँचाई देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 4 नवंबर 2026 को आईपीआरडी-2026 में 18 देशों के प्रतिनिधियों के समक्ष हिंद-प्रशांत सहयोग पर भारत का दृष्टिकोण रखेंगे।
तीन दिवसीय संवाद 3 नवंबर को नई दिल्ली में शुरू हुआ; मुख्य विषय 'विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग' है।
भारत 'महासागर' विजन के तहत हिंद-प्रशांत को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध बनाने की प्रतिबद्धता जता चुका है।
पहले दिन फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान और मालदीव सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने शैक्षणिक नेटवर्क और समुद्री निगरानी पर चर्चा की।
त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) और वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (सेवानिवृत्त) ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बुधवार, 4 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय समुद्री संवाद 'इंडो पैसिफिक रीजनल डायलॉग-2026' (आईपीआरडी-2026) में भाग लेंगे। इस मंच पर वह 18 देशों के समुद्री विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं और राजनयिकों के समक्ष हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को सुदृढ़ करने पर भारत का आधिकारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे।

भारत का 'महासागर' विजन और प्रतिबद्धता

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि भारत मजबूत साझेदारियों, बेहतर समन्वय और सामूहिक प्रयासों के ज़रिये 'महासागर' विजन की परिकल्पना को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए सभी देशों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करना है।

आईपीआरडी-2026 का परिचय और मुख्य विषय

भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित यह वार्षिक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक वार्ता 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में आरंभ हुई थी। तीन दिवसीय इस संवाद का केंद्रीय विषय 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग' है। इसमें विशेष रूप से इस बात पर बल दिया जा रहा है कि विज्ञान और तकनीक में हो रही प्रगति को देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा को मज़बूत करने के अवसरों में कैसे रूपांतरित किया जाए।

पहले दिन की चर्चा का सार

संवाद के पहले दिन वैज्ञानिक ज्ञान और तकनीकी नवाचार को क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोग में लाने पर केंद्रित चर्चाएँ हुईं। नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन (NMF) के अध्यक्ष और नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी (सेवानिवृत्त) ने उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इसके बाद भारत सरकार के राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (सेवानिवृत्त) ने विशेष संबोधन दिया।

नौसेना के पूर्व उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय महिंद्रू (सेवानिवृत्त) की अध्यक्षता में आयोजित शुरुआती सत्र में फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान और मालदीव के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस सत्र में हिंद महासागर क्षेत्र के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने, तटीय शहरों के शैक्षणिक संस्थानों को जोड़ने वाले नेटवर्क तथा सामाजिक विज्ञान अनुसंधान के लिए साझा मंच विकसित करने की संभावनाओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

समुद्री सुरक्षा और बुनियादी ढाँचे पर विशेष सत्र

पहले दिन का दूसरा महत्वपूर्ण सत्र समुद्री क्षेत्र की निगरानी और समुद्री बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा पर केंद्रित था। इसमें समुद्री व्यापार मार्गों और समुद्र के भीतर मौजूद महत्वपूर्ण संरचनाओं के समक्ष उभर रही चुनौतियों को रेखांकित किया गया। गौरतलब है कि यह संवाद ऐसे समय में हो रहा है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा और समुद्री सुरक्षा के प्रश्न वैश्विक एजेंडे पर प्रमुखता से स्थान पा रहे हैं।

आगे की राह

संवाद का समापन 5 नवंबर 2026 को होने की संभावना है, जिसमें भाग लेने वाले देशों के बीच सहयोग के ठोस प्रस्तावों पर सहमति बनने की उम्मीद है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि भारत हिंद-प्रशांत रणनीति को अपनी विदेश और रक्षा नीति में सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सक्रिय रणनीतिक परियोजना मान रहा है। परंतु 'महासागर' विजन और विज्ञान-तकनीक सहयोग की घोषणाएँ तब तक प्रभावी नहीं होतीं, जब तक इनके साथ संस्थागत ढाँचा, बजट आवंटन और स्पष्ट समयसीमा न जुड़ी हो। भारत के लिए असली चुनौती यह है कि वह 18 देशों के साथ सहयोग को केवल वार्षिक संवाद तक सीमित न रखे, बल्कि ठोस समुद्री क्षमता-निर्माण और साझा निगरानी तंत्र की दिशा में कदम उठाए। इस क्षेत्र में चीन की बढ़ती मौजूदगी को देखते हुए, भारत की पहल की विश्वसनीयता उसके क्रियान्वयन की गति से आँकी जाएगी।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आईपीआरडी-2026 क्या है और इसका आयोजन कहाँ हो रहा है?
'इंडो पैसिफिक रीजनल डायलॉग-2026' भारतीय नौसेना द्वारा आयोजित वार्षिक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक वार्ता है। यह तीन दिवसीय संवाद 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में शुरू हुआ और इसमें 18 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
राजनाथ सिंह आईपीआरडी-2026 में क्या प्रस्तुत करेंगे?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह 18 देशों के समुद्री विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और राजनयिकों के समक्ष हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सहयोग को मज़बूत करने पर भारत का आधिकारिक दृष्टिकोण रखेंगे। वह भारत के 'महासागर' विजन और सामूहिक प्रयासों पर भी प्रकाश डालेंगे।
आईपीआरडी-2026 का मुख्य विषय क्या है?
इस वर्ष के संवाद का केंद्रीय विषय 'हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और शैक्षणिक सहयोग' है। इसमें विज्ञान-तकनीक की प्रगति को समुद्री सुरक्षा और देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग में बदलने पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।
भारत का 'महासागर' विजन क्या है?
भारत का 'महासागर' विजन हिंद-प्रशांत क्षेत्र को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और समृद्ध बनाने की व्यापक परिकल्पना है। इसके तहत भारत मजबूत साझेदारियों, बेहतर तकनीकी सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से क्षेत्रीय देशों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
आईपीआरडी-2026 के पहले दिन कौन-सी प्रमुख चर्चाएँ हुईं?
पहले दिन शैक्षणिक नेटवर्क, अनुसंधान और मानव संसाधन विकास तथा समुद्री निगरानी और बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा पर दो महत्वपूर्ण सत्र आयोजित हुए। फ्रांस, इंडोनेशिया, जापान और मालदीव के प्रतिनिधियों ने हिंद महासागर क्षेत्र के विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग और साझा शोध मंच विकसित करने पर विचार-विमर्श किया।
राष्ट्र प्रेस
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