बहुविवाह में न्याय अनिवार्य: शाही चीफ मुफ्ती मौलाना इफराहीम हुसैन ने CM मोहन यादव के UCC बयान का किया स्वागत
सारांश
मुख्य बातें
अलीगढ़ के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने 17 जुलाई को स्पष्ट किया कि इस्लाम में बहुविवाह की अनुमति केवल तभी है जब व्यक्ति सभी पत्नियों के साथ पूर्ण और समान न्याय करने में सक्षम हो। उन्होंने यह बात मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) और बहुविवाह संबंधी बयान का स्वागत करते हुए कही।
मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा था कि यदि रामचंद्र एक विवाह करते हैं, तो रहीम से भी एक ही विवाह की अपेक्षा होनी चाहिए, क्योंकि मुस्लिम महिलाएँ भी हमारी बहनें हैं और उनके साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए। शाही चीफ मुफ्ती ने इस बयान को 'काबिले-तारीफ' बताया और कहा कि यह महिलाओं के प्रति न्याय और सम्मान की भावना को सामने रखता है।
इस्लाम की शिक्षा: न्याय के बिना बहुविवाह वर्जित
मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने कहा कि इस्लाम की मूल शिक्षा इंसाफ, करुणा और मानवता पर आधारित है। उनके अनुसार, इस्लाम किसी भी व्यक्ति को किसी अन्य को तकलीफ पहुँचाने, उसका हक मारने या उसके साथ अन्याय करने की अनुमति नहीं देता। यदि कोई व्यक्ति अपनी पहली पत्नी के साथ न्याय नहीं कर सकता या सभी पत्नियों के साथ समान व्यवहार सुनिश्चित करने में असमर्थ है, तो दूसरी, तीसरी या चौथी शादी करना इस्लामी शिक्षाओं के अनुरूप नहीं माना जाता।
उन्होंने आगे कहा कि किसी महिला के साथ धोखा करना, उसके अधिकारों का हनन करना या नाइंसाफी करना इस्लाम के मूल सिद्धांतों के सीधे विरुद्ध है। यदि कोई व्यक्ति समान न्याय करने में सक्षम नहीं है और फिर भी बहुविवाह करता है, तो वह इस्लामी शिक्षाओं का उल्लंघन करता है।
महिला अधिकारों पर जोर
शाही चीफ मुफ्ती ने कहा कि धर्म यह सिखाता है कि किसी को दुख न दिया जाए, किसी का नुकसान न किया जाए और किसी की दिल आजारी न हो। इसलिए परिवार और समाज में न्याय तथा समानता बनाए रखना हर मुसलमान की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव का बयान इसी भावना को व्यक्त करता है।
गौरतलब है कि UCC को लेकर देश में बहस लंबे समय से जारी है और इस संदर्भ में धार्मिक नेताओं का यह स्वर एक उल्लेखनीय बदलाव की ओर संकेत करता है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य सरकारें UCC के क्रियान्वयन पर विचार कर रही हैं।
आगे की राह
शाही चीफ मुफ्ती के इस बयान को व्यापक संदर्भ में देखा जाए तो यह इस्लामी विद्वानों और राजनीतिक नेतृत्व के बीच महिला अधिकारों पर एक साझा जमीन खोजने की कोशिश के रूप में सामने आता है। महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके साथ न्याय सुनिश्चित करना हर समाज और हर धर्म की प्राथमिकता होनी चाहिए — यह संदेश आने वाले समय में UCC विमर्श को नई दिशा दे सकता है।