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वक्फ संपत्तियों को सबसे ज़्यादा नुकसान कांग्रेस-सपा राज में: मौलाना इब्राहिम हुसैन का बड़ा बयान

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वक्फ संपत्तियों को सबसे ज़्यादा नुकसान कांग्रेस-सपा राज में: मौलाना इब्राहिम हुसैन का बड़ा बयान

सारांश

उत्तर प्रदेश के शाही मुख्य मुफ्ती मौलाना इब्राहिम हुसैन ने कांग्रेस और सपा पर वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि सही प्रबंधन होता तो सालाना ₹50,000 करोड़ की आय से गरीब मुसलमानों को फायदा मिलता। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया।

मुख्य बातें

मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन ने 7 जुलाई 2025 को अलीगढ़ में कहा कि वक्फ संपत्तियों को सर्वाधिक नुकसान कांग्रेस और सपा शासनकाल में हुआ।
उनके अनुसार, सही प्रबंधन होता तो वक्फ संपत्तियों से प्रतिवर्ष लगभग ₹50,000 करोड़ की आय संभव थी।
मौलाना ने कथित माफिया तत्वों के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पात्र गरीब, यतीम और कमज़ोर वर्ग अपने अधिकारों से वंचित रहे।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के वक्फ संबंधी बयान का समर्थन किया।
सपा पर दोहरी राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग करती है।

उत्तर प्रदेश के शाही मुख्य मुफ्ती मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन ने 7 जुलाई 2025 को अलीगढ़ में कहा कि वक्फ संपत्तियों को सबसे अधिक नुकसान कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के शासनकाल में हुआ, और इस कुप्रबंधन के कारण गरीब व जरूरतमंद मुसलमान अपने अधिकारों से वंचित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान का समर्थन करते हुए यह आरोप लगाए।

मुख्य आरोप: कुप्रबंधन और माफिया तत्वों का प्रभाव

मौलाना इब्राहिम हुसैन ने कहा कि कांग्रेस और सपा के शासनकाल में वक्फ की ज़मीनों और संपत्तियों के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएँ हुईं। उनके अनुसार, कुछ प्रभावशाली लोगों ने इसका लाभ उठाया, जबकि वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का असली उद्देश्य गरीब, यतीम और समाज के कमज़ोर वर्गों की सहायता करना था।

उन्होंने दावा किया कि कथित तौर पर कुछ माफिया तत्वों का इन संपत्तियों पर प्रभाव बढ़ गया, जिसके चलते बड़ी संख्या में पात्र लोग अपने अधिकारों से महरूम रहे।

₹50,000 करोड़ की संभावित आय का दावा

मौलाना ने दावा किया कि यदि वक्फ संपत्तियों का सही प्रबंधन होता, तो इनसे प्रतिवर्ष लगभग ₹50,000 करोड़ तक की आय अर्जित की जा सकती थी। उन्होंने कहा कि इस राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और आर्थिक रूप से कमज़ोर मुसलमानों के उत्थान के लिए किया जा सकता था। कथित कुप्रबंधन के कारण यह लक्ष्य कभी पूरा नहीं हो सका।

सपा की 'दोहरी राजनीति' पर निशाना

अयोध्या के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी की बदलती रणनीति का उल्लेख करते हुए मौलाना ने कहा कि पार्टी पहले एक अलग रुख अपनाती थी और अब धार्मिक मुद्दों पर भिन्न प्रकार की बातें कर रही है। उनके अनुसार, सपा का रवैया दोहरा दिखाई देता है और वह अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार समय-समय पर अपना रुख बदलती रही है।

उन्होंने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल वास्तव में धार्मिक मूल्यों की बात करता है, तो उसे इंसानियत, सेवा और गरीबों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करना चाहिए — न कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक मुद्दों का उपयोग करना चाहिए।

मुसलमानों के असली मुद्दों पर ध्यान न देने का आरोप

मौलाना ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और सपा दोनों ने मुसलमानों के वास्तविक मुद्दों — शिक्षा, रोज़गार, सामाजिक विकास और आर्थिक सशक्तिकरण — पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया। उनका कहना था कि इन मुद्दों से ध्यान हटाकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास किया गया।

जनता की बदलती सोच

मौलाना इब्राहिम हुसैन ने कहा कि अब मतदाता राजनीतिक दलों की कार्यशैली को भली-भाँति समझ चुके हैं और केवल चुनावी वादों या धार्मिक बयानबाज़ी के आधार पर निर्णय नहीं लेंगे। उनके अनुसार, मतदाता अब विकास, सुशासन और वास्तविक जनहित को प्राथमिकता देंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और नए वक्फ संशोधन कानून को लेकर देशभर में राजनीतिक बहस तेज़ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

₹50,000 करोड़ की संभावित आय का दावा स्वयं मौलाना का अनुमान है और इसका कोई स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है, जो इसे तथ्य से अधिक राजनीतिक तर्क बनाता है। गौरतलब है कि वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार की माँग दशकों पुरानी है और इसे विभिन्न सरकारों के कार्यकाल में उठाया जाता रहा है — केवल विपक्षी दलों के शासन में नहीं। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान के राजनीतिक संदर्भ को अक्सर नज़रअंदाज़ करती है: यह बयान ऐसे दौर में आया है जब सत्तारूढ़ दल वक्फ सुधारों को लेकर अपनी स्थिति मज़बूत करने में जुटा है।
RashtraPress
7 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना इब्राहिम हुसैन ने वक्फ संपत्तियों को लेकर क्या कहा?
मौलाना चौधरी इब्राहिम हुसैन ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शासनकाल में वक्फ संपत्तियों का सही प्रबंधन नहीं हुआ, जिससे गरीब और जरूरतमंद मुसलमान अपने अधिकारों से वंचित रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया।
वक्फ संपत्तियों से ₹50,000 करोड़ की आय का दावा क्या है?
मौलाना इब्राहिम हुसैन ने दावा किया कि यदि वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से प्रबंधन किया जाता, तो प्रतिवर्ष लगभग ₹50,000 करोड़ की आय हो सकती थी। यह उनका व्यक्तिगत अनुमान है और इसका स्वतंत्र सत्यापन उपलब्ध नहीं है।
मौलाना ने समाजवादी पार्टी पर क्या आरोप लगाए?
मौलाना ने सपा पर 'दोहरी राजनीति' का आरोप लगाया — कहा कि पार्टी अयोध्या जैसे धार्मिक मुद्दों पर अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार रुख बदलती रही है। उनके अनुसार, सपा ने मुसलमानों के वास्तविक मुद्दों — शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक विकास — पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया।
वक्फ संपत्तियों के कुप्रबंधन से कौन प्रभावित हुआ?
मौलाना के अनुसार, वक्फ संपत्तियों के कथित कुप्रबंधन से सबसे अधिक नुकसान गरीब, यतीम और समाज के कमज़ोर वर्गों को हुआ, जिन्हें इन संपत्तियों से मिलने वाली आय का लाभ मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कुछ कथित माफिया तत्वों ने इन संपत्तियों पर अपना प्रभाव जमा लिया।
यह बयान किस संदर्भ में आया है?
यह बयान ऐसे समय में आया है जब देशभर में वक्फ संशोधन कानून और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। मौलाना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया था।
राष्ट्र प्रेस
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