जकात और वक्फ फंड में ₹90,000 करोड़ के दुरुपयोग का आरोप: मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन
सारांश
मुख्य बातें
अलीगढ़ में 1 जुलाई 2026 को शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जकात फंड और वक्फ संपत्तियों से होने वाली आय का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है, जिससे मुस्लिम समाज के गरीब, यतीम और जरूरतमंद वर्गों को उनका हक नहीं मिल पा रहा। उन्होंने मुस्लिम चैरिटेबल संस्थाओं के प्रबंधन में तत्काल पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग की तथा निष्पक्ष जाँच का आह्वान किया।
जकात में कथित चोरी के आरोप
मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने आरोप लगाया कि मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों — जिनमें हाजी अली दरगाह (मुंबई) और अजमेर शरीफ दरगाह जैसी प्रमुख धार्मिक संस्थाएँ शामिल हैं — में जकात की चोरी बड़े पैमाने पर हो रही है। उनके अनुसार, कथित तौर पर लगभग ₹40,000 करोड़ की जकात राशि — जो इस्लामी विधान के तहत गरीब, यतीम, मिस्कीन और मुस्तहिक लोगों के लिए निर्धारित है — का दुरुपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन संसाधनों को प्रभावशाली और संपन्न लोगों ने अपने निजी हितों के लिए इस्तेमाल किया और कई हजार करोड़ रुपए की संपत्तियाँ अपने नाम करा लीं।
वक्फ संपत्ति की आय में कथित अनियमितताएँ
मौलाना हुसैन ने वक्फ संपत्तियों से जुड़े वित्तीय मामले को और भी गंभीर बताया। उनके अनुसार, वक्फ जायदाद से होने वाली कथित तौर पर लगभग ₹50,000 करोड़ की वार्षिक आय में भी बड़े पैमाने पर अनियमितताएँ हो रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह राशि सही तरीके से खर्च होती, तो मुस्लिम समाज के कमजोर वर्गों के विकास में इसका महत्वपूर्ण योगदान होता।
गौरतलब है कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों के प्रबंधन और उनसे होने वाली आय के वितरण को लेकर विभिन्न स्तरों पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
SIT जाँच की माँग
मौलाना हुसैन ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा श्रीराम मंदिर से जुड़े कथित चोरी के मामले में विशेष जाँच दल (SIT) गठित कर की गई त्वरित कार्रवाई का उदाहरण देते हुए माँग की कि जकात और वक्फ के इस बड़े वित्तीय मामले में भी उसी प्रकार की निष्पक्ष और कठोर जाँच होनी चाहिए। उन्होंने FIR दर्ज करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की अपील की।
मुस्लिम समाज पर असर
मौलाना हुसैन के अनुसार, इस कथित दुरुपयोग का सबसे बड़ा खामियाजा मुस्लिम समाज के सबसे कमजोर तबके को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से मुस्लिम समाज का एक बड़ा वर्ग पिछड़ गया है और उसकी मूलभूत जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और वक्फ (संशोधन) अधिनियम को लेकर देशभर में व्यापक बहस जारी है। आने वाले दिनों में यह माँग और राजनीतिक-सामाजिक विमर्श को नई दिशा दे सकती है।