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कानपुर: आईटीबीपी जवान की मां का हाथ काटने के मामले में दोबारा जांच, CMO ने दी सहमति

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कानपुर: आईटीबीपी जवान की मां का हाथ काटने के मामले में दोबारा जांच, CMO ने दी सहमति

सारांश

कानपुर में आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां के हाथ काटे जाने के मामले में अब दोबारा जांच होगी। पुलिस कमिश्नर कार्यालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद CMO ने विशेष बिंदुओं पर पुनः जांच की सहमति दी। लापरवाही साबित होने पर कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

मुख्य बातें

आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां निर्मला देवी (56) का कानपुर के एक निजी अस्पताल में कथित गलत इंजेक्शन के कारण हाथ काटना पड़ा।
23 मई 2026 को पुलिस कमिश्नर कार्यालय में सीएमओ, पुलिस कमिश्नर और आईटीबीपी कमांडेंट गौरव प्रसाद के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ.
हरिदत्त नेमी ने विशेष बिंदुओं पर दोबारा जांच कराने की सहमति दी।
एडिशनल पुलिस कमिश्नर विपिन ताडा ने कमिश्नरेट परिसर के घेराव की बात को निराधार बताया।
जांच में लापरवाही साबित होने पर कानूनी कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के कानपुर में आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां निर्मला देवी (56) के हाथ काटे जाने के मामले में अब दोबारा जांच होगी। 23 मई 2026 को पुलिस कमिश्नर कार्यालय में हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने कुछ विशेष बिंदुओं पर पुनः जांच कराने की सहमति दी है। कथित चिकित्सीय लापरवाही के इस मामले में पुलिस कमिश्नर, सीएमओ और आईटीबीपी कानपुर कमांडेंट गौरव प्रसाद के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

मुख्य घटनाक्रम

फतेहपुर के अलीमऊ गांव के मूल निवासी विकास सिंह वर्तमान में महाराजपुर आईटीबीपी कैंप में कांस्टेबल पद पर तैनात हैं। उनके अनुसार, उनकी मां को सांस लेने में तकलीफ, कब्ज और कमज़ोरी की शिकायत थी। पहले उन्हें आईटीबीपी अस्पताल महाराजपुर में दिखाया गया, जहाँ से प्राथमिक उपचार के बाद कानपुर के एक निजी अस्पताल में रेफर किया गया और वेंटीलेटर पर रखा गया।

विकास का आरोप है कि इलाज के दौरान उनकी मां को गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिससे हाथ काला पड़ गया और सूजन बढ़ती गई। हालत बिगड़ने पर उन्हें बिठूर रोड, बैकुंठपुर स्थित दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ चिकित्सकों को उनका हाथ काटना पड़ा।

पुलिस कमिश्नर कार्यालय में बैठक

इस मामले में कार्रवाई न होने से नाराज आईटीबीपी कमांडेंट गौरव प्रसाद अपने अधिकारियों व जवानों के साथ पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करने पहुँचे थे। एडिशनल पुलिस कमिश्नर (कानून-व्यवस्था) विपिन ताडा ने स्पष्ट किया कि कमिश्नरेट परिसर के घेराव की बात निराधार है — जवान अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के लिए आए थे और बाकी जवान बाहर प्रतीक्षा में खड़े थे।

कमांडेंट गौरव प्रसाद ने भी पुष्टि की कि पुलिस कमिश्नर से पूर्व-निर्धारित अपॉइंटमेंट लेकर आए थे और पुलिस की ओर से पूरा सहयोग मिल रहा है।

सीएमओ की स्थिति और दोबारा जांच

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि पहले डॉक्टरों की एक समिति गठित कर सभी पहलुओं की जांच कराई गई थी और वह रिपोर्ट सही है। हालाँकि, बैठक में जिन विशेष बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई गई, उन पर दोबारा जांच की जाएगी और उसके बाद अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

अधिकारियों के अनुसार, जांच पूरी तरह तथ्यों पर आधारित होगी और यदि लापरवाही साबित हुई तो संबंधित के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आगे क्या होगा

दोबारा जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। यह मामला स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही और अर्धसैनिक बल के जवानों के परिजनों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि इस तरह के मामलों में पारदर्शी जांच और समयबद्ध कार्रवाई पीड़ित परिवार के लिए न्याय की कुंजी होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी देखभाल की जवाबदेही तय करने का तंत्र कमज़ोर है। पहली जांच रिपोर्ट पर जवान की आपत्ति और उसके बाद दोबारा जांच की सहमति यह संकेत देती है कि प्रारंभिक प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था। असली परीक्षा यह होगी कि दूसरी जांच रिपोर्ट स्वतंत्र और सत्यापन-योग्य होगी या नहीं — अन्यथा यह मामला भी उन फाइलों में दब जाएगा जहाँ न्याय की प्रतीक्षा अनंत हो जाती है।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कानपुर में आईटीबीपी जवान की मां का हाथ क्यों काटा गया?
आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह का आरोप है कि कानपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मां निर्मला देवी को गलत इंजेक्शन लगाया गया, जिससे हाथ काला पड़ गया और सूजन बढ़ती रही। बाद में बिठूर रोड स्थित दूसरे अस्पताल में चिकित्सकों को उनका हाथ काटना पड़ा।
इस मामले में दोबारा जांच क्यों होगी?
पहली जांच रिपोर्ट पर आईटीबीपी जवान ने कुछ विशेष बिंदुओं पर आपत्ति दर्ज कराई। 23 मई 2026 को पुलिस कमिश्नर कार्यालय में हुई बैठक के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने उन बिंदुओं पर दोबारा जांच कराने की सहमति दी।
क्या आईटीबीपी जवानों ने कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय का घेराव किया था?
नहीं। एडिशनल पुलिस कमिश्नर विपिन ताडा और आईटीबीपी कमांडेंट गौरव प्रसाद दोनों ने घेराव की बात को निराधार बताया। कमांडेंट के अनुसार, पुलिस कमिश्नर से पूर्व-निर्धारित अपॉइंटमेंट लेकर बातचीत के लिए आए थे और बाकी जवान बाहर प्रतीक्षा में खड़े थे।
इस मामले में अब आगे क्या होगा?
मुख्य चिकित्सा अधिकारी विशेष बिंदुओं पर दोबारा जांच करेंगे और अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, यदि चिकित्सीय लापरवाही साबित हुई तो संबंधित के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह कौन हैं और उनकी मां का इलाज कहाँ हुआ?
विकास सिंह मूलतः फतेहपुर के अलीमऊ गांव के निवासी हैं और महाराजपुर आईटीबीपी कैंप में कांस्टेबल पद पर तैनात हैं। उनकी मां निर्मला देवी (56) को पहले आईटीबीपी अस्पताल महाराजपुर में दिखाया गया, फिर कानपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, और बाद में बिठूर रोड, बैकुंठपुर स्थित दूसरे अस्पताल में उनका हाथ काटा गया।
राष्ट्र प्रेस
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