मुहर्रम पर CM योगी के निर्देशों को BJP सांसद जगदंबिका पाल का समर्थन, बोले — 'पर्व की मर्यादा ज़रूरी'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश में मुहर्रम की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ तेज़ हो गई हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'मुहर्रम मातम का अवसर है, शक्ति प्रदर्शन का नहीं।' भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद जगदंबिका पाल ने 17 जून 2025 को मुख्यमंत्री के निर्देशों का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि हर नागरिक को अपना धार्मिक त्योहार मनाने का पूर्ण अधिकार है, परंतु प्रत्येक पर्व की एक निर्धारित मर्यादा, परंपरा और उद्देश्य होता है।
जगदंबिका पाल ने क्या कहा
मीडिया से बातचीत में जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि मुहर्रम मूलतः शोक और मातम का पर्व है, इसलिए इसे उसी धार्मिक भावना और परंपरा के अनुरूप मनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'यदि किसी त्योहार का कोई विशेष महत्व और स्वरूप है, तो उसका पालन उसी तरीके से होना चाहिए।'
पाल ने यह भी जोड़ा कि किसी भी पर्व के आयोजन के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि किसी अन्य समुदाय या व्यक्ति को असुविधा न हो। उनके अनुसार, त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य समाज को जोड़ना और भाईचारे को मज़बूत करना है — न कि ऐसा वातावरण बनाना जो दूसरों पर नकारात्मक प्रभाव डाले।
CM योगी के मूल निर्देश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में लखनऊ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए प्रदेश की कानून-व्यवस्था, आगामी पर्वों, नीट परीक्षा और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों की समीक्षा की थी। इस बैठक में उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मुहर्रम के अवसर पर किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र प्रदर्शन की अनुमति न दी जाए।
इसके अलावा, नई परंपराओं की शुरुआत, कानफोड़ू डीजे और ढोल-ताशों के अनियंत्रित उपयोग पर रोक लगाने के भी निर्देश जारी किए गए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ताजियों की ऊँचाई निर्धारित मानकों के अनुरूप रखी जाए और पूरे प्रदेश में शांति, सुरक्षा तथा सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुनिश्चित की जाएँ।
राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक संवेदनशीलता को लेकर प्रशासनिक सतर्कता पहले से बढ़ी हुई है। गौरतलब है कि मुहर्रम जुलूसों के दौरान कानून-व्यवस्था की चुनौतियाँ कई राज्यों में अतीत में सामने आ चुकी हैं, और योगी सरकार पर्व-विशेष पर पूर्व-निर्धारित दिशानिर्देश जारी करने की नीति अपनाती रही है। आलोचकों का कहना है कि इस प्रकार के निर्देश एकपक्षीय हो सकते हैं, जबकि समर्थकों का तर्क है कि ये सार्वजनिक व्यवस्था के लिए आवश्यक हैं।
आगे क्या
प्रदेश प्रशासन मुहर्रम से पहले ज़िला स्तर पर शांति समितियों की बैठकें आयोजित करने की तैयारी में है। सभी ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ये दिशानिर्देश ज़मीनी स्तर पर किस रूप में लागू होते हैं।