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महंगाई पर जयराम रमेश का केंद्र पर हमला — 'रसोई का बजट ध्वस्त, सरकार आँकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त'

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महंगाई पर जयराम रमेश का केंद्र पर हमला — 'रसोई का बजट ध्वस्त, सरकार आँकड़ों की बाजीगरी में व्यस्त'

सारांश

जयराम रमेश ने एक्स पर केंद्र सरकार को आम आदमी की रसोई पर 'चौतरफा हमले' का दोषी ठहराया — और पाँच चुनावी राज्यों की जनता को सीधी चेतावनी दी कि वह मतपेटी में जवाब देगी। यह बयान कांग्रेस की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो महंगाई को आगामी चुनावों का केंद्रीय मुद्दा बनाना चाहती है।

मुख्य बातें

जयराम रमेश ने 19 सितंबर 2026 को एक्स पर केंद्र सरकार को महंगाई के लिए सीधे ज़िम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि आटे-दाल से लेकर खाद्य तेल तक रसोई का बजट पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
रमेश का आरोप — सरकार ठोस कदम उठाने की बजाय 'आँकड़ों की बाजीगरी' से महंगाई छिपा रही है।
उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा की जनता को चुनावों में जवाब देने की चेतावनी दी।
इससे पहले 13 सितंबर 2026 को रमेश ने भारत-चीन सीमा मुद्दे पर भी सरकार को घेरा था।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, संचार प्रभारी महासचिव और राज्यसभा सदस्य जयराम रमेश ने 19 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर केंद्र सरकार पर महंगाई के मुद्दे पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने आम आदमी की रसोई पर 'चौतरफा हमला' बोल दिया है और रसोई का बजट पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाँच राज्यों — उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा — में चुनावी माहौल गर्माया हुआ है।

रमेश के आरोप: क्या कहा एक्स पर

अपनी पोस्ट में जयराम रमेश ने लिखा, 'ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार ने आम आदमी की रसोई पर चौतरफा हमला बोल दिया है। रसोई का बजट पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।' उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार की नीतियों के चलते आटे-दाल से लेकर खाद्य तेल तक हर ज़रूरी चीज़ की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और महंगाई 'आसमान पर' है।

रमेश ने यह भी आरोप लगाया कि 'केवल कुछ मित्र पूंजीपति ही आनंद में हैं, जबकि करोड़ों परिवार पीड़ित हैं।' उन्होंने कहा कि सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने की बजाय 'सच्चाई छिपाने' में जुटी है।

चुनावी चेतावनी और सरकार को सीधी चुनौती

रमेश ने अपनी पोस्ट के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'प्रधानमंत्री, ये जो पब्लिक है, सब जानती है। महंगाई झेल रही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा की जनता चुनावों में आपको आटे-दाल का भाव मालूम करा देगी।' यह टिप्पणी स्पष्ट रूप से आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर दी गई है।

कांग्रेस की व्यापक रणनीति: आँकड़ों बनाम ज़मीनी हकीकत

कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि सरकार महंगाई नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाने की बजाय 'आँकड़ों की बाजीगरी' से स्थिति को काबू में दिखाने की कोशिश करती है। रमेश ने भी इसी सुर में दोहराया कि 'आम आदमी की थाली महंगी होती जा रही है, लेकिन सरकार आँकड़ों से महंगाई पर काबू पाने का दावा करती है।'

गौरतलब है कि रमेश भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस / INC) के मुखर प्रवक्ताओं में से एक हैं और महंगाई, बेरोज़गारी और विदेश नीति जैसे विषयों पर केंद्र सरकार को नियमित रूप से घेरते रहे हैं।

पृष्ठभूमि: रमेश का हालिया विपक्षी मोर्चा

इससे कुछ दिन पहले, 13 सितंबर 2026 को भी रमेश ने एक प्रेस नोट के ज़रिये भारत-चीन सीमा पर हुई झड़पों के संदर्भ में प्रधानमंत्री मोदी के 2020 के बयानों पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दावा किया था कि भारत ने पूर्वी लद्दाख के कुछ हिस्सों में पारंपरिक गश्त और चराई के अधिकार चीन को सौंप दिए हैं — जो केंद्र सरकार ने अब तक खारिज किया है।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष बहुआयामी मुद्दों — महंगाई, रोज़गार, राष्ट्रीय सुरक्षा — को चुनावी एजेंडे में सबसे आगे रखने की कोशिश में है। आने वाले हफ्तों में इन मुद्दों पर संसद और सड़क, दोनों स्तरों पर और अधिक तीखी बहस होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल नीतिगत आलोचना। असली सवाल यह है कि क्या कांग्रेस इस मुद्दे पर ठोस वैकल्पिक नीति भी सामने रख सकती है, या यह केवल सत्तापक्ष पर निशाना साधने तक सीमित रहेगी। 'मित्र पूंजीपति' वाला शब्द-प्रयोग पुराना पड़ चुका है — मतदाता अब यह जानना चाहते हैं कि महंगाई घटाने के लिए विकल्प क्या है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयराम रमेश ने महंगाई पर केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों से आटे-दाल और खाद्य तेल तक रसोई का बजट पूरी तरह ध्वस्त हो गया है और सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने की बजाय आँकड़ों की बाजीगरी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल 'मित्र पूंजीपति' लाभ में हैं जबकि करोड़ों परिवार पीड़ित हैं।
रमेश ने किन राज्यों का ज़िक्र किया और क्यों?
उन्होंने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा का नाम लेते हुए प्रधानमंत्री मोदी को चेताया कि इन राज्यों की जनता चुनावों में महंगाई का हिसाब माँगेगी। ये सभी राज्य आगामी विधानसभा चुनावों की दृष्टि से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
जयराम रमेश ने यह बात कहाँ और कब कही?
रमेश ने यह बयान 19 सितंबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट के ज़रिये दिया। वे कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव और राज्यसभा सदस्य हैं।
क्या रमेश ने हाल ही में सरकार पर कोई और हमला किया था?
हाँ, 13 सितंबर 2026 को उन्होंने एक प्रेस नोट में भारत-चीन सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री मोदी के 2020 के बयानों पर सवाल उठाए थे और दावा किया था कि पूर्वी लद्दाख में चीन को गश्त और चराई के अधिकार सौंपे गए हैं।
सरकार ने महंगाई के इन आरोपों पर क्या कहा?
स्रोत सामग्री में केंद्र सरकार की तरफ से इन विशेष आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है। सरकार पहले भी ऐसे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताती रही है और महंगाई नियंत्रण के अपने प्रयासों का हवाला देती रही है।
राष्ट्र प्रेस
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