जालंधर में हथियार तस्करी गिरोह का भंडाफोड़: 9 पिस्तौल, 40 कारतूस बरामद, तीन गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब पुलिस ने 29 मई 2026 को जालंधर में अवैध हथियारों की तस्करी करने वाले एक सक्रिय गिरोह का भंडाफोड़ किया, जिसमें तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर कुल 9 पिस्तौल, 17 मैगजीन और 40 जिंदा कारतूस बरामद किए गए। जालंधर पुलिस कमिश्नरेट की विशेष टीम द्वारा की गई इस कार्रवाई को राज्य में अवैध हथियारों के खिलाफ चल रहे अभियान की एक बड़ी सफलता बताया जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
पुलिस ने सबसे पहले जालंधर बस स्टैंड के निकट एक संदिग्ध को हिरासत में लिया। प्रारंभिक पूछताछ में मिली सूचनाओं के आधार पर टीम ने 5 पिस्तौल (.32 बोर), 9 मैगजीन और 22 जिंदा कारतूस बरामद किए।
इसके बाद मिले सुरागों के आधार पर पुलिस गुरदासपुर जिले के भैनी पसवाल गांव के पास पहुँची, जहाँ छिपाकर रखे गए अतिरिक्त हथियार बरामद हुए — 4 और पिस्तौलें, 8 मैगजीन तथा 18 जिंदा कारतूस। इस दोहरी कार्रवाई में कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
नेटवर्क की पृष्ठभूमि
जांच अधिकारियों के अनुसार, यह गिरोह पंजाब के भीतर अवैध हथियारों की आपूर्ति का एक संगठित नेटवर्क संचालित कर रहा था। पुलिस के अनुसार, ऐसे गिरोह प्रायः अंतरराज्यीय माध्यमों से हथियार मँगाते हैं और स्थानीय स्तर पर उनका वितरण करते हैं।
गौरतलब है कि पंजाब में पिछले कुछ वर्षों से अवैध हथियारों की बरामदगी और उनके आपराधिक उपयोग की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब राज्य पुलिस संगठित अपराध और हथियार तस्करी पर नकेल कसने के लिए विशेष अभियान चला रही है।
सरकार और पुलिस की प्रतिक्रिया
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए लिखा, 'अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ हमारी 'जीरो टॉलरेंस' नीति है। राज्य में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।'
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है और उनके अन्य साथियों तथा हथियार आपूर्तिकर्ताओं का पता लगाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
आगे की जांच
बरामद हथियारों की फोरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि इन्हें पहले किन आपराधिक घटनाओं में इस्तेमाल किया गया। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस पूरे नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने तक जांच जारी रहेगी और गिरोह के सभी संभावित संपर्कों की पहचान की जाएगी।