13 अक्टूबर 2026
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बाबूलाल मरांडी का कांग्रेस पर हमला: बिष्टुपुर भिड़ंत के बाद जमशेदपुर में बयानबाजी तेज

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बाबूलाल मरांडी का कांग्रेस पर हमला: बिष्टुपुर भिड़ंत के बाद जमशेदपुर में बयानबाजी तेज

सारांश

जमशेदपुर के बिष्टुपुर में BJP-कांग्रेस भिड़ंत के बाद झारखंड नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर टकराव का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया — नवरात्र में सामाजिक सद्भाव की अपील के साथ।

मुख्य बातें

झारखंड नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 14 अक्टूबर 2026 को जमशेदपुर में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस पर हिंसा और टकराव का रास्ता अपनाने का आरोप लगाया।
बिष्टुपुर में सोमवार को BJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच भिड़ंत हुई; तिलक पुस्तकालय के बाहर पथराव का आरोप।
मरांडी ने स्वयं भी माना कि हिंसा और पथराव किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस पर सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकालकर संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाने का आरोप लगाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 हटाने और माओवाद-विरोधी कार्रवाई को उपलब्धि बताया।

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार, 14 अक्टूबर 2026 को जमशेदपुर के साकची स्थित सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक विरोध का उचित जवाब देने के बजाय टकराव और हिंसा का रास्ता अपना रही है। यह बयान जमशेदपुर के बिष्टुपुर में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) कार्यकर्ताओं के बीच हुई भिड़ंत के एक दिन बाद आया।

मुख्य घटनाक्रम

मरांडी ने बताया कि BJP कार्यकर्ता कांग्रेस की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन करने पहुँचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान तिलक पुस्तकालय के बाहर — जो कि जमशेदपुर में कांग्रेस मुख्यालय है — पथराव किया गया। उन्होंने स्वयं भी यह स्वीकार किया कि राजनीतिक मतभेदों के बीच हिंसा और पथराव किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है।

मरांडी की तीखी टिप्पणी

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मरांडी ने कहा, 'कांग्रेस और कॉकरोच एक ही हैं, दोनों अंधेरे में पनपते हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक सवालों का सामना करने के बजाय टकराव की स्थिति पैदा कर रही है। साथ ही नवरात्र पर्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से त्योहारों के दौरान शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की।

संवैधानिक संस्थाओं पर बयान

प्रेस वार्ता में मरांडी ने राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने का आरोप लगाया और सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकाले जाने की घटना पर सवाल उठाए। उनके अनुसार सभी राजनीतिक दलों को न्यायपालिका सहित संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता का सम्मान करना चाहिए।

केंद्र सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख

मरांडी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने और माओवादी गतिविधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को सरकार की प्रमुख उपलब्धियाँ बताया। गौरतलब है कि झारखंड में विधानसभा चुनाव से पहले का यह राजनीतिक माहौल भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।

आगे क्या

बिष्टुपुर भिड़ंत के बाद जमशेदपुर में राजनीतिक तनाव बना हुआ है। मरांडी ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर दल को विरोध का अधिकार है, किंतु यह विरोध शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए — तथ्यों और जनहित के मुद्दों पर आधारित, न कि हिंसा पर। दोनों दलों के बीच यह टकराव आगे किस रूप लेता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि दोनों दलों के बीच बढ़ते ज़मीनी तनाव का संकेत है। विडंबना यह है कि जो दल हिंसा की निंदा कर रहा है, उसके कार्यकर्ता भी उसी घटनाक्रम के हिस्सा थे — यह तथ्य मरांडी के बयान की विश्वसनीयता को कमज़ोर करता है। सर्वोच्च न्यायालय मार्च और संवैधानिक संस्थाओं पर टिप्पणी राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा के उस व्यापक आख्यान को दोहराती है जो विपक्ष को 'संस्था-विरोधी' के रूप में प्रस्तुत करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है, वह यह है कि नवरात्र जैसे संवेदनशील समय में इस तरह की राजनीतिक भिड़ंत सामाजिक सद्भाव के लिए वास्तविक जोखिम पैदा करती है।
RashtraPress
13 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमशेदपुर के बिष्टुपुर में BJP-कांग्रेस भिड़ंत क्यों हुई?
BJP कार्यकर्ता कांग्रेस की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन करने बिष्टुपुर पहुँचे थे, जहाँ दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच भिड़ंत हो गई। इस दौरान कांग्रेस मुख्यालय तिलक पुस्तकालय के बाहर पथराव का आरोप भी लगाया गया है।
बाबूलाल मरांडी ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
झारखंड नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक सवालों का जवाब देने के बजाय टकराव और हिंसा का रास्ता अपना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस ने सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकालकर संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाया है।
क्या मरांडी ने हिंसा की निंदा की?
हाँ, मरांडी ने स्वयं भी कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बीच हिंसा और पथराव किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने सभी दलों से नवरात्र के दौरान शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की।
मरांडी ने केंद्र सरकार की कौन-सी उपलब्धियों का उल्लेख किया?
मरांडी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने और माओवादी गतिविधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को केंद्र सरकार की प्रमुख उपलब्धियाँ बताया।
इस राजनीतिक तनाव का झारखंड की राजनीति पर क्या असर हो सकता है?
झारखंड में विधानसभा चुनाव से पूर्व यह भिड़ंत दोनों दलों के बीच ज़मीनी तनाव को उजागर करती है। नवरात्र जैसे संवेदनशील समय में इस तरह की राजनीतिक हिंसा सामाजिक सद्भाव के लिए चिंता का विषय बन सकती है और राज्य की राजनीतिक फ़िज़ा को प्रभावित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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