बाबूलाल मरांडी का कांग्रेस पर हमला: बिष्टुपुर भिड़ंत के बाद जमशेदपुर में बयानबाजी तेज
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मंगलवार, 14 अक्टूबर 2026 को जमशेदपुर के साकची स्थित सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह राजनीतिक विरोध का उचित जवाब देने के बजाय टकराव और हिंसा का रास्ता अपना रही है। यह बयान जमशेदपुर के बिष्टुपुर में सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) कार्यकर्ताओं के बीच हुई भिड़ंत के एक दिन बाद आया।
मुख्य घटनाक्रम
मरांडी ने बताया कि BJP कार्यकर्ता कांग्रेस की नीतियों के विरोध में प्रदर्शन करने पहुँचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान तिलक पुस्तकालय के बाहर — जो कि जमशेदपुर में कांग्रेस मुख्यालय है — पथराव किया गया। उन्होंने स्वयं भी यह स्वीकार किया कि राजनीतिक मतभेदों के बीच हिंसा और पथराव किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है।
मरांडी की तीखी टिप्पणी
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए मरांडी ने कहा, 'कांग्रेस और कॉकरोच एक ही हैं, दोनों अंधेरे में पनपते हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक सवालों का सामना करने के बजाय टकराव की स्थिति पैदा कर रही है। साथ ही नवरात्र पर्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से त्योहारों के दौरान शांति और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की अपील की।
संवैधानिक संस्थाओं पर बयान
प्रेस वार्ता में मरांडी ने राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा को प्रभावित करने का आरोप लगाया और सर्वोच्च न्यायालय तक मार्च निकाले जाने की घटना पर सवाल उठाए। उनके अनुसार सभी राजनीतिक दलों को न्यायपालिका सहित संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता का सम्मान करना चाहिए।
केंद्र सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख
मरांडी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के कामकाज की सराहना करते हुए अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने और माओवादी गतिविधियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को सरकार की प्रमुख उपलब्धियाँ बताया। गौरतलब है कि झारखंड में विधानसभा चुनाव से पहले का यह राजनीतिक माहौल भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
आगे क्या
बिष्टुपुर भिड़ंत के बाद जमशेदपुर में राजनीतिक तनाव बना हुआ है। मरांडी ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में हर दल को विरोध का अधिकार है, किंतु यह विरोध शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए — तथ्यों और जनहित के मुद्दों पर आधारित, न कि हिंसा पर। दोनों दलों के बीच यह टकराव आगे किस रूप लेता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।