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जमशेदपुर रेस्टोरेंट गोलीबारी: बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना, पुलिस नियुक्तियों पर उठाए सवाल

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जमशेदपुर रेस्टोरेंट गोलीबारी: बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना, पुलिस नियुक्तियों पर उठाए सवाल

सारांश

जमशेदपुर के बिंदल मॉल में दिनदहाड़े हुई गोलीबारी ने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए पुलिस नियुक्तियों में 'सत्ता-कृपा' और 'सेटिंग' का आरोप लगाया — और कोयला तस्करी व अवैध वसूली की शिकायतों पर निष्पक्ष जाँच की माँग की।

मुख्य बातें

जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में 27 सितंबर 2026 को दिनदहाड़े गोलीबारी में 4 लोग घायल हुए।
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर पुलिस नियुक्तियों में 'सत्ता-कृपा' और 'राजनीतिक वफादारी' को तरजीह देने का आरोप लगाया।
मरांडी के अनुसार धनबाद तक सीमित रहा अपराध का माहौल अब अन्य शहरों में भी फैल रहा है।
विपक्षी नेता ने कोयला तस्करी, अवैध वसूली और अपराधियों को संरक्षण जैसे मामलों में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जाँच की माँग की।
मरांडी ने सरकार से अतिरिक्त प्रभार की नियुक्तियों का आधार और खाली पदों की जानकारी सार्वजनिक करने की माँग की।

जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में 27 सितंबर 2026 को दिनदहाड़े हुई ताबड़तोड़ गोलीबारी में चार लोग घायल हो गए, जिसने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर एक बार फिर तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना के बाद नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को आड़े हाथों लिया और पुलिस व्यवस्था में व्याप्त कथित खामियों को उजागर किया।

मुख्य घटनाक्रम

जमशेदपुर के व्यस्त बिंदल मॉल परिसर में स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में दिनदहाड़े गोलीबारी की इस घटना ने शहर में दहशत का माहौल बना दिया। इस हमले में चार लोग घायल हुए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब झारखंड में अपराध की घटनाओं को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेरता रहा है।

बाबूलाल मरांडी की सरकार पर प्रतिक्रिया

नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब पुलिस नेतृत्व का आधार योग्यता के बजाय सत्ता-कृपा, राजनीतिक वफादारी और 'सेटिंग' बनेगा, तो सड़क पर कानून नहीं, डर का राज ही दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि कभी धनबाद तक सीमित माना जाने वाला अपराध और भय का माहौल अब दूसरे शहरों में भी दिखाई देने लगा है।

मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में मेरिट और नियमों के बजाय सत्ता की कृपा, चापलूसी और राजनीतिक वफादारी को प्राथमिकता दी जा रही है। उनके अनुसार इसका सीधा असर पुलिस की कार्यक्षमता और अपराधियों के बीच कानून के भय पर पड़ता है।

पुलिस नियुक्तियों और अतिरिक्त प्रभार पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधे पूछा कि अतिरिक्त प्रभार के नाम पर अधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों का इतना केंद्रीकरण क्यों किया जा रहा है। मरांडी ने माँग की कि सरकार स्पष्ट करे कि अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देने का आधार क्या है और किन परिस्थितियों में महत्वपूर्ण पद खाली रखे जा रहे हैं।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब झारखंड में पुलिस नियुक्तियों पर सवाल उठे हों। विपक्ष पहले भी राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सरकार को घेरता रहा है।

भ्रष्टाचार और शिकायतों की जाँच की माँग

मरांडी ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सामने आई शिकायतों की निष्पक्ष जाँच की माँग करते हुए आरोप लगाया कि कोयला तस्करी, अवैध वसूली और अपराधियों को संरक्षण जैसे मामलों में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ गंभीर शिकायत आती है तो उसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

आम जनता की सुरक्षा और आगे का रास्ता

नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट कहा कि किसी घटना के बाद महज अधिकारियों को घटनास्थल पर भेज देना कानून-व्यवस्था संभालना नहीं है। अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि अपराध को संरक्षण देने वालों की पहचान हो और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। मरांडी ने कहा कि पुलिस का काम आम जनता को सुरक्षा का भरोसा देना है, न कि किसी सत्ता या विशेष समूह के हितों की रक्षा करना। यह घटना झारखंड सरकार के लिए एक कड़ी चुनौती बनकर सामने आई है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक दबाव और बढ़ने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जब दिनदहाड़े किसी व्यस्त मॉल के रेस्टोरेंट में गोलियाँ चलती हैं, तो यह सवाल और भी तीखा हो जाता है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर विपक्ष के बयान को राजनीतिक हमले तक सीमित कर देती है, जबकि असली मुद्दा यह है कि क्या राज्य सरकार पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही का कोई सत्यापन-योग्य तंत्र प्रस्तुत कर सकती है। कोयला तस्करी और अवैध वसूली की शिकायतों पर निष्क्रियता के आरोप यदि सही हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि शासन के मूल ढाँचे का सवाल है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जमशेदपुर के उडुपी रेस्टोरेंट में गोलीबारी की घटना क्या है?
27 सितंबर 2026 को जमशेदपुर के बिंदल मॉल स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में दिनदहाड़े ताबड़तोड़ गोलीबारी हुई, जिसमें चार लोग घायल हो गए। इस घटना ने झारखंड की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर क्या आरोप लगाए?
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में पुलिस के महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति में मेरिट के बजाय सत्ता-कृपा, चापलूसी और राजनीतिक वफादारी को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कोयला तस्करी और अवैध वसूली के मामलों में शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने का भी आरोप लगाया।
मरांडी ने हेमंत सोरेन से क्या माँगें रखीं?
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से माँग की कि अतिरिक्त प्रभार देने का आधार सार्वजनिक किया जाए और महत्वपूर्ण पदों को खाली रखने की वजह स्पष्ट की जाए। साथ ही उन्होंने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की।
झारखंड में अपराध का माहौल कैसे बदल रहा है?
बाबूलाल मरांडी के अनुसार कभी धनबाद तक सीमित माना जाने वाला अपराध और भय का माहौल अब जमशेदपुर जैसे अन्य शहरों में भी दिखाई देने लगा है। जमशेदपुर में दिनदहाड़े हुई यह गोलीबारी इसी बदलती स्थिति का संकेत मानी जा रही है।
इस घटना का राजनीतिक असर क्या होगा?
इस घटना ने झारखंड में विपक्ष को हेमंत सोरेन सरकार पर दबाव बढ़ाने का एक और मौका दे दिया है। मरांडी की माँगों के बाद सरकार पर पुलिस प्रशासन और नियुक्तियों को लेकर जवाब देने का दबाव बढ़ेगा, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और राजनीतिक मंचों पर गूँजने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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