बाबूलाल मरांडी का हेमंत सोरेन पर निशाना: जमीन घोटाले से पेपर लीक तक, भ्रष्टाचार पर बड़े सवाल
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने 4 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा कि भ्रष्टाचार व कथित घोटालों की एक लंबी फेहरिस्त के बावजूद व्यवस्था सुधारने के लिए अभी भी वक्त बाकी है। पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता मरांडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के ज़रिए सोरेन से आत्ममंथन की अपील की।
मुख्य आरोप और मामले
मरांडी ने अपनी पोस्ट में जमीन घोटाला, शराब नीति, पत्थर घोटाला और पेपर लीक से जुड़े मामलों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों में अदालतों और जाँच एजेंसियों की कार्रवाई व टिप्पणियाँ सरकार के लिए गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती हैं। उनके अनुसार, जमीन घोटाला मामले में मुख्यमंत्री के विरुद्ध कथित तौर पर आरोप गठित हो चुके हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ SC-ST अधिनियम के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले में हाई कोर्ट द्वारा जुर्माना लगाए जाने का भी मरांडी ने हवाला दिया। इसके साथ ही शराब नीति मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की अदालत में कथित तौर पर सामने आई रिश्वत की बात और पत्थर घोटाले में केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) जाँच के आदेश का उन्होंने उल्लेख किया।
पेपर लीक पर सीधा सवाल
मरांडी ने पेपर लीक प्रकरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि पहले सरकार ने छात्रों को ही माफिया करार दिया था, लेकिन अब अदालत के समक्ष कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य सामने आ रहे हैं जिनमें सरकार के करीबी लोगों पर पैसे लेकर साक्षात्कार में अंक बढ़ाने के आरोप हैं। उन्होंने सीधे पूछा कि यदि सरकार अपने विश्वस्त लोगों और अधिकारियों को भ्रष्टाचार से रोकने में सक्षम थी, तो ऐसा क्यों नहीं किया गया।
गौरतलब है कि झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में धाँधली के आरोप बार-बार सामने आए हैं, जो हर बार सत्तारूढ़ दल के लिए राजनीतिक असहजता का कारण बने हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में आने वाले विधानसभा सत्र से पहले विपक्ष आक्रामक मुद्रा में है।
संस्थाओं और जनभरोसे पर असर
मरांडी ने कहा कि भ्रष्टाचार के इन मामलों से अधिकारियों के करियर, संस्थाओं की विश्वसनीयता और जनता के शासन-व्यवस्था पर भरोसे को गहरी चोट पहुँचती है। उन्होंने सरकार से बालू, पत्थर, कोयला और अन्य खनिज संसाधनों का उपयोग जनहित, विकास और रोजगार के लिए करने की माँग की। साथ ही उन्होंने प्रखंडों, थानों और सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
सत्ता के स्थायित्व पर चेतावनी
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री सोरेन को सत्ता के अहंकार से बचने की भी नसीहत दी। उन्होंने लालू प्रसाद यादव और ममता बनर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक परिस्थितियाँ कभी भी बदल सकती हैं और सत्ता-पद किसी के पास हमेशा नहीं टिकते। मरांडी के मुताबिक, सरकार के पास अभी भी व्यवस्था में सुधार कर जनता का भरोसा कायम करने का अवसर मौजूद है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या उनके कार्यालय की ओर से मरांडी की इस पोस्ट पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में सत्तापक्ष का जवाब राजनीतिक रूप से निर्णायक साबित हो सकता है।