झारखंड शराब नीति घोटाला: बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन से पूछा — ₹55 करोड़ का हिसाब कौन देगा?
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने 30 सितंबर 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर राज्य की शराब नीति में कथित घूसखोरी के मामले में सीधे सवाल दागे हैं। मरांडी ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में दावा किया कि झारखंड की उत्पाद नीति में संशोधन के लिए छत्तीसगढ़ के कारोबारी अनवर ढेबर की ओर से तत्कालीन प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे को कथित तौर पर ₹50 करोड़ दिए गए, जबकि अरुणपति त्रिपाठी को झारखंड स्टेट बेवरेजेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) का सलाहकार नियुक्त कराने के लिए अलग से ₹5 करोड़ के कथित भुगतान की बात जाँच में सामने आई है।
मरांडी के मुख्य आरोप
मरांडी के अनुसार, जनवरी 2022 में तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को ₹5 करोड़ का कथित भुगतान अरुणपति त्रिपाठी द्वारा किया गया, जिसकी चर्चा झारखंड उच्च न्यायालय के अप्रैल 2026 के एक आदेश में भी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन के छत्तीसगढ़ दौरे के दौरान अनवर ढेबर ने उनकी मेजबानी की थी।
भाजपा नेता ने दावा किया कि झारखंड के अधिकारियों की एक टीम को रायपुर भेजकर छत्तीसगढ़ की उत्पाद नीति का अध्ययन कराया गया, किंतु टीम ने कथित तौर पर महज 24 घंटे में रिपोर्ट तैयार कर छत्तीसगढ़ मॉडल लागू करने की अनुशंसा कर दी। मरांडी ने इसे संदेहास्पद जल्दबाज़ी करार दिया।
एसीबी जाँच और अदालती रिकॉर्ड
हाल में सामने आई भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की जाँच रिपोर्टों में कथित तौर पर ₹55 करोड़ की डील का उल्लेख है — जिसमें ₹5 करोड़ अरुणपति त्रिपाठी की JSBCL में सलाहकार नियुक्ति के लिए और शेष ₹50 करोड़ उत्पाद नीति में संशोधन के लिए बताए गए हैं।
झारखंड उच्च न्यायालय के अप्रैल 2026 के आदेश में ACB जाँच से जुड़े दस्तावेज़ों और कई गवाहों के बयानों का हवाला दिया गया है, जिनमें इन कथित भुगतानों तथा त्रिपाठी की सलाहकार नियुक्ति से संबंधित दावे दर्ज हैं। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि ये आरोप जाँच के दौरान सामने आई सामग्री पर आधारित हैं और मामले का अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी लंबित है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रतिक्रिया
मरांडी के इन राजनीतिक आरोपों पर 30 सितंबर 2026 तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अथवा उनके कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में विपक्ष सरकार की प्रशासनिक पारदर्शिता पर लगातार दबाव बनाए हुए है।
पूर्व चेतावनी का दावा
मरांडी ने अपने बयान में यह भी कहा कि उन्होंने शराब नीति में बदलाव और उससे जुड़े कथित घोटाले की आशंका को लेकर पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सावधान किया था। उन्होंने दावा किया कि टेंडर जारी होने से पूर्व ही सरकार को उन व्यक्तियों के बारे में जानकारी दे दी गई थी जिन्हें कथित तौर पर काम सौंपे जाने की आशंका थी।
मरांडी ने अंत में सवाल किया कि यदि फ़ाइलें चलीं, कैबिनेट का फ़ैसला हुआ और भुगतान हुए — तो मुख्यमंत्री कार्यालय को इसकी जानकारी थी या नहीं, और नैतिक ज़िम्मेदारी किसकी बनती है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया के तहत वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक होना चाहिए। आने वाले दिनों में ACB की जाँच की दिशा और उच्च न्यायालय की अगली सुनवाई यह तय करेगी कि यह मामला कहाँ तक जाता है।