1 अक्टूबर 2026
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रांची के अशोक नगर में IPS पर धमकी और रास्ता रोकने के आरोप, मरांडी ने CM सोरेन से निष्पक्ष जांच माँगी

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रांची के अशोक नगर में IPS पर धमकी और रास्ता रोकने के आरोप, मरांडी ने CM सोरेन से निष्पक्ष जांच माँगी

सारांश

रांची के अशोक नगर में DIG आलोक प्रियदर्शी पर पत्रकार परिवार को धमकाने, रास्ता रोकने और धार्मिक टिप्पणी के आरोप लगे हैं। BJP प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच और परिवार की सुरक्षा की माँग की — झारखंड में पुलिस जवाबदेही का अहम सवाल।

मुख्य बातें

BJP प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने 1 अक्टूबर 2026 को CM हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर निष्पक्ष जांच की माँग की।
आरोप पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) आलोक प्रियदर्शी पर — रास्ता अवरुद्ध करने, धमकी देने और धार्मिक टिप्पणी करने के।
शिकायतकर्ता पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम और उनका परिवार करीब पाँच दशकों से अशोक नगर रोड नंबर-1 पर रह रहे हैं।
कथित घटना 28 सितंबर शाम 6 बजे की — DIG ने सुरक्षाकर्मियों के साथ आकर 40 फीट चौड़े रास्ते पर वाहन खड़ा किया।
मरांडी ने वरिष्ठ स्वतंत्र अधिकारी या जांच एजेंसी से जाँच और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने 1 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर रांची के अशोक नगर में एक पत्रकार परिवार के साथ कथित उत्पीड़न, धमकी और रास्ता अवरुद्ध करने के मामले में स्वतंत्र जांच की माँग की है। यह आरोप पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) आलोक प्रियदर्शी पर लगाए गए हैं। मरांडी ने शिकायतकर्ता परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से बचाने का भी आग्रह किया है।

शिकायत का विवरण

मरांडी के पत्र के अनुसार, अशोक नगर रोड नंबर-1 निवासी पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम और उनके परिवार ने DIG आलोक प्रियदर्शी के खिलाफ अरगोड़ा थाना प्रभारी को शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत की प्रति मुख्यमंत्री को भी भेजी गई है। परिवार का कहना है कि वे करीब पाँच दशकों से अशोक नगर की अपनी पैतृक भूमि पर निवास कर रहे हैं।

परिवार का दावा है कि भवन के स्वीकृत नक्शे और संबंधित दस्तावेजों में अशोक नगर सोसाइटी की ओर से करीब 40 फीट चौड़ा रास्ता अंकित है, जिसका लंबे समय से आवागमन के लिए उपयोग होता रहा है। शिकायत के मुताबिक हाल के दिनों में इस रास्ते पर अवरोध उत्पन्न किया गया, जिससे परिवार और आसपास के निवासियों को परेशानी हुई।

28 सितंबर की कथित घटना

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 28 सितंबर की शाम करीब शाम 6 बजे DIG आलोक प्रियदर्शी अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ मौके पर पहुँचे और परिवार के मुख्य द्वार के सामने वाहन खड़ा कर रास्ता पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। इस दौरान कथित तौर पर परिवार को झूठे मुकदमे में फँसाने, जेल भेजने और जान से मारने की धमकी दी गई।

शिकायत में यह भी आरोप है कि हथियार दिखाकर धमकाया गया और परिवार की धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की गई। ये आरोप गंभीर प्रकृति के हैं; हालाँकि ये अभी तक कथित तौर पर ही हैं और स्वतंत्र जांच का विषय हैं।

मरांडी की माँगें

मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से निम्नलिखित कदम उठाने का आग्रह किया है: संबंधित भूमि, स्वामित्व, भवन के स्वीकृत नक्शे और रास्ते से जुड़े अभिलेखों की जांच; कथित धमकी, रास्ता अवरुद्ध करने और धार्मिक टिप्पणी के आरोपों की साक्ष्य-आधारित जांच; तथा DIG के सुरक्षाकर्मियों की भूमिका की भी जाँच। उन्होंने माँग की है कि जांच किसी स्वतंत्र एवं वरिष्ठ अधिकारी या उपयुक्त जांच एजेंसी को सौंपी जाए।

मरांडी ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर भी निर्णय निष्पक्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही होना चाहिए। उनका कहना है कि कानून के शासन और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा हर स्तर पर सुनिश्चित होनी चाहिए।

व्यापक संदर्भ

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब झारखंड में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध इस प्रकार के आरोप पारदर्शिता और जवाबदेही के व्यापक सवाल उठाते हैं। अरगोड़ा थाने में दर्ज शिकायत और मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र के बाद अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।

मामले की अगली सुनवाई और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि राज्य सरकार स्वतंत्र जांच के आदेश देती है, तो यह नागरिक-पुलिस संबंधों और संस्थागत जवाबदेही के लिहाज से एक महत्त्वपूर्ण मिसाल होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इससे शिकायत की गंभीरता कम नहीं होती; पत्रकार सुरक्षा और पुलिस जवाबदेही दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्यों के स्तंभ हैं।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रांची के अशोक नगर में DIG पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
पत्रकार सैयद शरीफ इब्राहिम के परिवार ने DIG आलोक प्रियदर्शी पर 28 सितंबर को उनके मुख्य द्वार के सामने वाहन खड़ाकर रास्ता अवरुद्ध करने, झूठे मुकदमे में फँसाने व जान से मारने की धमकी देने और धार्मिक पहचान को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगाए हैं। ये आरोप अरगोड़ा थाने में दर्ज शिकायत का हिस्सा हैं और अभी तक कथित हैं।
बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन से क्या माँग की है?
BJP प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने CM हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मामले की जांच किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी या उपयुक्त जांच एजेंसी से कराने की माँग की है। उन्होंने शिकायतकर्ता परिवार की सुरक्षा और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई से संरक्षण का भी आग्रह किया है।
विवादित रास्ते को लेकर क्या दावा है?
परिवार का दावा है कि भवन के स्वीकृत नक्शे और दस्तावेजों में अशोक नगर सोसाइटी की ओर से करीब 40 फीट चौड़ा रास्ता अंकित है, जो लंबे समय से आवागमन के लिए उपयोग में रहा है। शिकायत के अनुसार हाल के दिनों में इस रास्ते को जानबूझकर अवरुद्ध किया गया।
इस मामले में अब आगे क्या होने की संभावना है?
मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुँच चुका है और अरगोड़ा थाने में शिकायत भी दर्ज है। अब सरकार की प्रतिक्रिया — स्वतंत्र जांच के आदेश या विभागीय जाँच — इस मामले की दिशा तय करेगी। राज्य में विपक्ष की सक्रिय भागीदारी से राजनीतिक दबाव भी बना रहेगा।
क्या पुलिस अधिकारी पर ऐसे आरोपों की जांच हो सकती है?
हाँ, यदि कोई शिकायत दर्ज हो और वरिष्ठ अधिकारी या सरकार जांच का आदेश दे, तो पुलिस अधिकारी के विरुद्ध विभागीय या स्वतंत्र जांच संभव है। मरांडी ने विशेष रूप से माँग की है कि जांच निष्पक्ष हो और साक्ष्यों के आधार पर हो — चाहे आरोपी जो भी हो।
राष्ट्र प्रेस
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