जयंत चौधरी परिवार सहित PM मोदी से मिले, मुजफ्फरनगर सम्मेलन से पहले एकजुटता का संदेश
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने 18 सितंबर 2026 को अपनी पत्नी और दोनों बेटियों के साथ नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और एनडीए गठबंधन में एकजुटता का संदेश दिया। यह पारिवारिक मुलाकात ऐसे समय हुई जब 20 सितंबर को मुजफ्फरनगर में रालोद का सामाजिक समरसता सम्मेलन निर्धारित है।
मुलाकात का संदर्भ
जयंत चौधरी ने इस मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की, जिसमें उनके साथ उनकी पत्नी और दोनों बेटियाँ भी नज़र आ रही हैं। उल्लेखनीय है कि इससे एक दिन पहले, 17 सितंबर को, जयंत चौधरी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएँ देते हुए उनकी कार्यशैली, समर्पण और सार्वजनिक सेवा के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की थी।
चौधरी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री की कार्यशैली को 'करीब से देखने और सीखने' की बात कही थी। यह क्रम — पहले जन्मदिन की शुभकामनाएँ और फिर अगले दिन पारिवारिक मुलाकात — राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
मुजफ्फरनगर सम्मेलन की पृष्ठभूमि
रालोद की ओर से 20 सितंबर 2026 को मुजफ्फरनगर के पचेंडा रोड स्थित प्लेटिनम बैंक्वेट हॉल परिसर में सामाजिक समरसता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें जयंत चौधरी मुख्य अतिथि होंगे। पार्टी ने कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में सम्मेलन में उपस्थित होने की अपील की है।
गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इन दिनों विभिन्न राजनीतिक दलों की गतिविधियाँ तेज़ हो रही हैं, और आगामी विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में इस क्षेत्र की राजनीतिक सरगर्मी पर सभी दलों की नज़र है। ऐसे में रालोद की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बढ़ती सक्रियता को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा रहा है।
एनडीए में रालोद की स्थिति
रालोद और भारतीय जनता पार्टी (BJP) दोनों वर्तमान में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का हिस्सा हैं। इस पारिवारिक मुलाकात को सहयोगी दलों के बीच आपसी तालमेल और समन्वय के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।
हालाँकि, जयंत चौधरी की ओर से साझा की गई जानकारी में किसी राजनीतिक निर्णय या चुनावी रणनीति का ब्यौरा नहीं दिया गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुलाकात एनडीए की आंतरिक एकजुटता को सार्वजनिक रूप से रेखांकित करने का प्रयास हो सकती है।
राजनीतिक हलकों में चर्चा
PM मोदी से मुलाकात और ठीक दो दिन बाद मुजफ्फरनगर में होने वाले सम्मेलन के बीच के समय को लेकर राजनीतिक दलों और समर्थकों में अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के बीच रालोद का पारंपरिक आधार मज़बूत माना जाता है, और आगामी चुनावी समीकरणों में यह गठजोड़ महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
आने वाले दिनों में मुजफ्फरनगर सम्मेलन की सफलता और उसमें उठाए जाने वाले मुद्दों से रालोद की रणनीतिक दिशा अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।