गम्हरिया थाने में महिला से कथित दुष्कर्म: मरांडी-चंपई सोरेन ने झारखंड सरकार को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाना परिसर में एक महिला के साथ कथित दुष्कर्म की घटना ने राज्य की राजनीति में भूचाल ला दिया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने इस मामले पर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। दोनों विपक्षी नेताओं ने इसे झारखंड में कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण बताते हुए दोषी पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की माँग की है।
घटनाक्रम: क्या हुआ गम्हरिया थाने में
गम्हरिया थाना क्षेत्र के दुग्धा गाँव की रहने वाली पीड़ित महिला गुरुवार की देर रात पारिवारिक विवाद और पति की प्रताड़ना की शिकायत लेकर थाने पहुँची थी। रात अधिक हो जाने के कारण वहाँ तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे थाने में ही रुकने की सलाह दी। आरोप है कि इस दौरान ड्यूटी पर तैनात वायरलेस ऑपरेटर एवं सिपाही नीरज लकड़ा महिला को थाने के एक कमरे में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया।
पुलिस की कार्रवाई: गिरफ्तारी और SIT गठन
मामले की जानकारी मिलते ही एसपी मनोज स्वर्गियारी के निर्देश पर सरायकेला एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया गया। पुलिस ने आरोपी सिपाही नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। गम्हरिया थाना प्रभारी सहित चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है और साक्ष्य सुरक्षित रखने के लिए घटनास्थल वाले कमरे को सील कर दिया गया है।
मरांडी का हमला: DGP की भूमिका पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस घटना को 'बेहद शर्मनाक और चिंताजनक' करार देते हुए कहा कि इससे पहले बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में भी एक महिला कैदी के यौन शोषण और गर्भवती होने का मामला सामने आया था। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा की जिम्मेदारी सँभालने वाले संस्थानों में ही महिलाएँ सुरक्षित नहीं हैं, तो वे न्याय की उम्मीद किससे करेंगी। मरांडी ने पुलिस महानिदेशक तदाशा मिश्रा की भूमिका पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि महिला DGP के कार्यकाल में भी इस प्रकार की घटनाएँ सामने आना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने सरायकेला के पुलिस अधीक्षक से आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की माँग की।
चंपई सोरेन बोले: 'जंगल राज का उदाहरण'
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने इस घटना को राज्य में 'जंगल राज' का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि एक फरियादी महिला जब अपने पति की प्रताड़ना से बचने के लिए थाने जाती है और वहीं उसके साथ अपराध होता है, तो यह पूरे तंत्र की विफलता है। चंपई सोरेन ने माँग की कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है — दोषी पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जाए और वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए।
आगे की राह: जाँच और जवाबदेही
यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में कानून-व्यवस्था पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है। गौरतलब है कि यह मामला महज एक अपराध नहीं, बल्कि उन संस्थाओं की साख पर सवाल है जिन पर नागरिक सबसे पहले भरोसा करते हैं। SIT की जाँच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया यह तय करेगी कि आरोपियों के खिलाफ किस स्तर की कार्रवाई होती है। राजनीतिक दबाव के बीच राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और जवाबदेही का इंतजार अब पूरे प्रदेश को है।