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रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की महारैली: लोकतंत्र, मताधिकार और चुनाव आयोग पर केंद्र को घेरा

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रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की महारैली: लोकतंत्र, मताधिकार और चुनाव आयोग पर केंद्र को घेरा

सारांश

रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की महारैली महज़ एक विरोध प्रदर्शन नहीं थी — यह लोकतंत्र और मताधिकार की आड़ में विपक्ष की एकजुटता का बड़ा संदेश था। कांग्रेस से लेकर TMC और झामुमो तक, सबने एक सुर में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को घेरा।

मुख्य बातें

1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में इंडिया गठबंधन की महारैली आयोजित हुई।
कांग्रेस, सपा, TMC और झामुमो समेत कई दलों के नेता व कार्यकर्ता शामिल हुए।
रैली का मुख्य मुद्दा लोकतंत्र की रक्षा , मताधिकार और चुनाव आयोग की निष्पक्षता था।
AITC सांसद सागरिका घोष ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग की।
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने रैली को डॉ.
अंबेडकर के मताधिकार की रक्षा से जोड़ा।

नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर 2026 को इंडिया गठबंधन ने एक बड़ी महारैली आयोजित की, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (TMC) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) समेत कई घटक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। रैली का केंद्रबिंदु लोकतंत्र की रक्षा, मताधिकार, चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे रहे। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर तीखे प्रहार करते हुए इसे एक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन की शुरुआत बताया।

मुख्य घटनाक्रम

कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि देश का प्रधानमंत्री भारत की जनता चुनती है, और यह रैली देश के आम नागरिकों और कार्यकर्ताओं की भावनाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने कहा, 'रैली में शामिल लोगों की संख्या से जनता के समर्थन और भावनाओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।' खुर्शीद ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक रैली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे भी जारी रहेगा।

कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के रैली-विरोध को खारिज करते हुए कहा, 'यह लोकतंत्र है और इस देश की धरती पर हमारा भी अधिकार है। हम इस संविधान के बराबर के हकदार हैं।' उन्होंने तंज कसते हुए जोड़ा कि रैली की अनुमति खुद उन्हीं लोगों ने दी है जो विरोध जता रहे हैं।

सपा और झामुमो की आवाज़

समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने रैली को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इसका उद्देश्य किसी को नुकसान पहुँचाना नहीं, बल्कि देश में लोकतंत्र को बचाना और डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए मताधिकार की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

झामुमो सांसद महुआ माजी ने कहा कि इंडिया गठबंधन लोकतांत्रिक तरीके से हर संभव प्रयास कर रहा है और सरकार से माँग है कि जनता को न्याय मिले व उसकी आवाज़ सुनी जाए।

चुनाव आयोग पर तीखा प्रहार

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (AITC) की सांसद सागरिका घोष ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार को 'मोदी-शाह-ज्ञानेश गठबंधन' बताया। उन्होंने दावा किया कि जनता और विपक्ष की आवाज़ को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता और रामलीला मैदान की रैली के बाद ज्ञानेश कुमार अपने पद पर नहीं रह पाएँगे। AITC सांसद सौगत रॉय ने भी कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में लोग ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की माँग को लेकर एकजुट हुए हैं। गौरतलब है कि इन दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका है।

ज़मीनी आवाज़

रैली में मौजूद एक कार्यकर्ता ने कहा कि पहले राहुल गांधी का मज़ाक उड़ाया जाता था, लेकिन धीरे-धीरे गठबंधन के सभी घटक दलों को कथित 'वोट चोरी' का अहसास होने लगा। कार्यकर्ता ने कहा कि ऐसे में यदि सरकार नहीं बदली, तो चुनाव और लोकतंत्र का कोई अर्थ नहीं रहेगा। यह ध्यान देने योग्य है कि 'वोट चोरी' के आरोप विपक्षी दलों की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

आगे क्या

खुर्शीद के अनुसार यह आंदोलन जारी रहेगा और आने वाले समय में इसकी अगली कड़ी स्पष्ट होगी। यह रैली ऐसे समय में आई है जब 2027 के कई राज्य विधानसभा चुनाव नज़दीक हैं और विपक्ष अपनी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गठबंधन की आंतरिक सामंजस्य क्षमता ही यह तय करेगी कि यह आंदोलन टिकाऊ साबित होता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि विपक्ष का यह आंदोलन कितना टिकाऊ है — क्योंकि 2024 के बाद से गठबंधन के भीतर तालमेल की कमी बार-बार उजागर होती रही है। चुनाव आयोग पर आरोप नए नहीं हैं, लेकिन बिना ठोस कानूनी या संवैधानिक माँग के ये रैलियाँ राजनीतिक दबाव तो बनाती हैं, संरचनात्मक बदलाव नहीं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नेताओं के बयानों पर केंद्रित रहती है — जो छूट जाता है वह यह है कि जनता के बीच 'वोट चोरी' के आरोपों की विश्वसनीयता और सत्यापनीयता को लेकर कोई गंभीर विमर्श नहीं हो रहा। इस रैली की असली परीक्षा यह होगी कि अगले चुनावों तक यह आंदोलन नीतिगत एजेंडे में तब्दील हो पाता है या बस एक और भीड़भरी शाम बनकर रह जाता है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की महारैली किस मुद्दे पर आयोजित हुई?
यह रैली 1 नवंबर 2026 को लोकतंत्र की रक्षा, मताधिकार और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता के मुद्दे पर आयोजित की गई। इसके साथ ही चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों और चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग भी उठाई गई।
इंडिया गठबंधन की इस रैली में कौन-कौन से दल शामिल हुए?
रैली में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत गठबंधन के कई घटक दलों के नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए।
AITC सांसद सागरिका घोष ने चुनाव आयोग पर क्या कहा?
AITC सांसद सागरिका घोष ने केंद्र सरकार को 'मोदी-शाह-ज्ञानेश गठबंधन' बताया और दावा किया कि रामलीला मैदान की रैली के बाद चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद पर नहीं रह पाएँगे। ये आरोप विपक्षी दल की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने रैली को लेकर क्या कहा?
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि यह रैली देश की जनता, कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की भावनाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल एक रैली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आगे भी जारी रहेगा।
सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने रैली का उद्देश्य क्या बताया?
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने रैली को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इसका उद्देश्य देश में लोकतंत्र को बचाना और डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए मताधिकार की रक्षा करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इंडिया गठबंधन लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्र प्रेस
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